दिल्ली जिमखाना क्लब ने अधिग्रहण की स्थिति में पुनर्वास के लिए वैकल्पिक भूमि मांगी
सुरेश
- 25 May 2026, 11:14 PM
- Updated: 11:14 PM
नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) दिल्ली जिमखाना क्लब की आम समिति ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि जब तक क्लब के पुनर्वास और कर्मचारियों के संरक्षण जैसे मुद्दों पर स्पष्टता नहीं आ जाती, तब तक संस्थान के कामकाज को बाधित न किया जाए। भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) को भेजे गए एक पत्र में यह बात कही गई है।
भारत सरकार द्वारा गठित इस समिति ने आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय तथा एलएंडडीओ से अनुरोध किया है कि यदि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो क्लब को दूसरी जगह स्थानांतरित करने के लिए एक वैकल्पिक भूखंड आवंटित करने पर विचार किया जाए।
समिति के एक सदस्य ने कहा कि क्लब के संचालन को प्रभावित करने वाले किसी भी निर्णय को लागू करने से पहले सदस्यों, कर्मचारियों और अन्य हितधारकों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए।
समिति ने पत्र में उल्लेख किया कि राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के एक अप्रैल, 2022 के आदेश के तहत कार्यभार संभालने के बाद से वह पिछले चार वर्षों से क्लब के प्रशासन और वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए काम कर रही है।
पत्र के अनुसार, समिति के कार्यकाल में क्लब की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है। वर्ष 2021-22 में जहां क्लब को 12.39 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था, वहीं 2023-24 के अनुमानित लाभ-हानि विवरण में 9.25 करोड़ रुपये का लाभ दिखाया गया है।
यह भी कहा गया है कि यह सुधार नए सदस्यों को जोड़े बिना हासिल किया गया है, जो पहले क्लब के लिए राजस्व का एक बड़ा स्रोत हुआ करते थे।
समिति ने कहा कि उसने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया है, सभी विभागों में मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) लागू की हैं और श्रम विवादों सहित लंबित मुकदमों को कम किया है।
इसने यह भी दावा किया कि सदस्यता रिकॉर्ड को डिजिटल और अद्यतित करने के प्रयास किए गए हैं। समिति ने ध्यान दिलाया कि 2022 में लगभग 43 प्रतिशत ऐसे रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे।
समिति ने यह भी कहा कि क्लब के स्थानांतरण के लिए दशकों में विकसित बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के पुनर्निर्माण हेतु भारी खर्च की आवश्यकता होगी। साथ ही, समिति स्थानांतरण की स्थिति में क्लब से जुड़े लगभग 600 कर्मचारियों के लिए सुरक्षा और संरक्षण की मांग कर रही है।
पत्र के अनुसार, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (एमसीए) द्वारा नियुक्त समिति के सदस्य पेशेवर लोग हैं, जो बिना किसी बैठक शुल्क, वित्तीय लाभ या खर्चों की प्रतिपूर्ति के मानद रूप से काम कर रहे हैं।
समिति ने यह भी कहा कि क्लब को स्थानांतरित करने के लिए बुनियादी ढांचे और कई दशकों में विकसित की गई सुविधाओं के पुनर्निर्माण पर भारी खर्च की आवश्यकता होगी।
इस बीच, क्लब के सदस्यों ने सोमवार को एक बैठक की और प्रस्तावित अधिग्रहण को "अवैध" करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने संस्थान के खिलाफ की जा रही चुनिंदा कार्रवाई पर भी चिंता व्यक्त की।
भाषा सुमित सुरेश
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