संयुक्त राष्ट्र ने बाल विवाह के प्रावधान वाले अफगान तालिबान के कानून पर चिंता जताई
शोभना
- 22 May 2026, 08:50 AM
- Updated: 08:50 AM
काबुल (अफगानिस्तान), 22 मई (एपी) संयुक्त राष्ट्र ने बृहस्पतिवार को अफगानिस्तान की तालिबान सरकार द्वारा विवाह में अलगाव पर जारी किए गए एक नए कानून पर ''गंभीर चिंता'' जताई जिसमें बाल विवाह से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि यह कानून महिलाओं और लड़कियों के प्रति भेदभाव को और बढ़ाता है।
वहीं अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह आदेश इस्लामी कानून के अनुरूप है और देश में लड़कियों की जबरन शादी पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया गया है।
अफगानिस्तान के न्याय मंत्रालय ने पिछले सप्ताह ''पति-पत्नी के कानून के अनुसार अलग होने'' पर फरमान संख्या 18 प्रकाशित किया, जिसमें विवाहित जोड़े के अलग होने के नियम निर्धारित किए गए हैं।
अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) ने एक बयान में कहा कि इसके सबसे विवादास्पद प्रावधानों में से एक यह है कि किशोरावस्था में कदम रखने वाली किसी लड़की की चुप्पी को विवाह के लिए सहमति माना जा सकता है। इसमें किशोर और विवाहित लड़कियों के अलगाव से संबंधित एक खंड भी शामिल है जो ''बाल विवाह की अनुमति का संकेत देता है''।
बयान में कहा गया है, ''यह स्वतंत्र और पूर्ण सहमति के सिद्धांत को कमजोर करता है और बच्चे के सर्वोत्तम हितों की रक्षा करने में विफल है।''
इस आदेश में कहा गया है कि ''अगर पिता या दादा ने किसी नाबालिग लड़की या लड़के का विवाह बिना दहेज के, अपर्याप्त दहेज के साथ या घोर गबन के साथ किया हो'' तो विवाह को अमान्य घोषित किया जा सकता है। इसमें यह भी कहा गया है कि अगर किसी बच्ची का विवाह उसके पिता या दादा द्वारा ऐसे पुरुष से किया गया हो जिसने उसके साथ अच्छा बर्ताव नहीं किया हो या जो अपने बुरे फैसलों के लिए बदनाम हो... तो उसे किशोरावस्था में पहुंचने पर विवाह अनुबंध को रद्द करने के लिए न्यायालय में जाने का अधिकार है।
नया कानून कहता है कि अगर कोई लड़की अपने पति से तलाक मांगती है और वह इनकार करता है तो ''इस मामले में लड़की के साथ कोई गवाह नहीं होने की स्थिति में पति का बयान मान्य होगा''। हां अगर वह न्यायाधीश के समक्ष याचिका दायर करती है तो उसे गवाहों की आवश्यकता नहीं होगी।
एपी सुरभि शोभना
शोभना
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