देशव्यापी दवा विक्रेताओं की हड़ताल का मिला-जुला असर, एआईओसीडी ने भारी समर्थन का दावा किया
माधव
- 20 May 2026, 09:15 PM
- Updated: 09:15 PM
नयी दिल्ली, 20 मई (भाषा) ऑनलाइन दवा विक्रेताओं द्वारा अनियमित कारोबार और भारी छूट दिए जाने के विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स द्वारा आहूत एक दिवसीय बंद का असर सीमित रहा, हालांकि संगठन ने दावा किया कि उसे देशभर में अपने सदस्यों का व्यापक समर्थन मिला।
ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (एआईओसीडी) का दावा है कि वह 12.4 लाख दवा विक्रेताओं, फार्मासिस्टों और वितरकों का प्रतिनिधित्व करता है। संगठन ऑनलाइन दवा कंपनियों की उन गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है, जिन्हें उसने "अवैध" बताया है।
एआईओसीडी ने एक बयान में कहा, "देशव्यापी बंद पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और देशभर के केमिस्टों तथा दवा विक्रेताओं का इसे भारी समर्थन मिला।"
संगठन ने यह भी कहा कि मानवीय जिम्मेदारी निभाते हुए जरूरतमंद मरीजों को आवश्यक और आपातकालीन दवाएँ उपलब्ध कराई गयी।
बयान के अनुसार, विभिन्न राज्यों के केमिस्ट और ड्रगिस्ट संघों तथा देशभर के सभी जिलों के दवा विक्रेताओं ने अपनी दुकानें बंद रखकर आंदोलन को सर्वसम्मति से समर्थन दिया।
हालांकि, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कुछ संगठित दवा दुकान श्रृंखलाओं के प्रतिष्ठान खुले रहे।
एक बिक्री प्रतिनिधि ने एआईओसीडी द्वारा दिए गए बंद के आह्वान के बारे में पूछे जाने पर कहा, "हम इस बंद का हिस्सा नहीं हैं।"
एक अन्य स्वतंत्र दवा विक्रेता ने भी कहा कि उनकी दुकान दिनभर खुली रही और कारोबार सामान्य रूप से चलता रहा।
एआईओसीडी ने कहा कि उसने "दवाओं की अवैध और अनियंत्रित ऑनलाइन बिक्री, वैध पर्चे के बिना दवाओं की बिक्री तथा ऑनलाइन दवा मंचों द्वारा की जा रही अत्यधिक छूट की शोषणकारी नीति" के विरोध में यह एक दिवसीय देशव्यापी बंद बुलाया था।
संगठन के अध्यक्ष जे. एस. शिंदे और महासचिव राजीव सिंघल ने बताया कि बंद के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक ज्ञापन देशभर में संभागीय आयुक्तों, जिला कलेक्टरों, उपमंडल अधिकारियों और तहसीलदारों के माध्यम से सौंपा गया।
ज्ञापन में दवा विक्रेताओं और केमिस्टों की प्रमुख चिंताओं को उठाया गया, जिनमें दवाओं की अवैध और अनियमित ऑनलाइन बिक्री, वैध और सत्यापित पर्चे के बिना दवाओं की बिक्री और घर तक आपूर्ति, तथा ऑनलाइन मंचों द्वारा दी जा रही भारी छूट शामिल है, जिससे लाखों छोटे और लाइसेंसधारी दवा विक्रेताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
ज्ञापन में "जीएसआर 817(ई) और जीएसआर 220(ई)" अधिसूचनाओं को तत्काल वापस लेने की भी मांग की गई। संगठन का आरोप है कि इन प्रावधानों का उपयोग ऑनलाइन मंचों और त्वरित आपूर्ति सेवाओं द्वारा दवाओं की अनियंत्रित ऑनलाइन बिक्री के लिए किया जा रहा है।
इससे पहले दिन में एआईओसीडी के महासचिव राजीव सिंघल ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, "सभी मेडिकल दुकानें बंद हैं... हमें अपनी सभी राज्य इकाइयों से प्रतिक्रिया मिल रही है कि हर कोई इस बंद में हिस्सा ले रहा है। हमने अस्पतालों के भीतर चल रही नर्सिंग होम फार्मेसियों पर बंद का दबाव नहीं डाला है।"
सिंघल ने दोहराया कि एआईओसीडी जीएसआर 817 और जीएसआर 220 अधिसूचनाओं का विरोध कर रहा है, क्योंकि इनके जरिए ऑनलाइन फार्मेसियों को प्रभावी रूप से नियमित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों के कारण बिना उचित भौतिक सत्यापन के दवाओं की बिक्री हो रही है, जबकि बड़े कॉरपोरेट समर्थन वाली ऑनलाइन फार्मेसियाँ भारी छूट देकर पारंपरिक दवा विक्रेताओं को नुकसान पहुंचा रही हैं।
सिंघल ने कहा कि एआईओसीडी अपने सदस्यों और संबंधित पक्षों के हितों की रक्षा के लिए इस एक दिवसीय देशव्यापी बंद के बाद आगे की रणनीति पर विचार करेगा।
भाषा रंजन माधव
माधव
2005 2115 दिल्ली