जम्मू में ध्वस्तीकरण के दौरान वन अधिकार अधिनियम के उल्लंघन की जांच महज दिखावा है: लोन
रंजन
- 20 May 2026, 10:13 PM
- Updated: 10:13 PM
श्रीनगर, 20 मई (भाषा) पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन ने बुधवार को कहा कि जम्मू में चलाए गए अतिक्रमण रोधी अभियान के दौरान वन अधिकार कानून के उल्लंघन की जांच के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा दिए गए जांच के आदेश महज़ दिखावा हैं।
लोन ने बताया कि यह जांच तभी सार्थक होगी जब वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के तहत प्रभावित लोगों के दावे लंबित रहेंगे।
अवामी इत्तेहाद पार्टी (एआईपी) और कश्मीर के प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने भी मंगलवार को चलाए गए अतिक्रमण रोधी अभियान की निंदा की।
लोन ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा, "जम्मू में अतिक्रमण रोधी अभियान के दौरान वन अधिकार अधिनियम के किसी भी उल्लंघन की जांच और रिपोर्ट का आदेश देने का नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली सरकार का कदम महज दिखावा है, ठीक उसी तरह जैसे पिछले तीन दशकों में जम्मू-कश्मीर में नागरिकों की हत्याओं की हजारों मजिस्ट्रेट जांचों का आदेश जनता के गुस्से को शांत करने के लिए दिया गया था।"
उन्होंने कहा कि सरकार को यह पता लगाने में 10 मिनट से अधिक समय नहीं लगता कि एफआरए का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
उन्होंने कहा, "जिस बात का 10 मिनट में पता चल सकता था, उसके लिए सात दिन का समय क्यों? मेरी समझ से, यदि व्यक्तिगत या सामुदायिक अधिकारों के लिए दावे लंबित हैं, तो घरों को गिराना एफआरए का उल्लंघन होगा।"
वन अधिकार अधिनियम की धारा चार की उपधारा (पांच) का हवाला देते हुए लोन ने कहा कि यदि अनुसूचित जनजाति या अन्य पारंपरिक वनवासी श्रेणी के लोग वन भूमि पर रह रहे हैं या खेती कर रहे हैं, तो सरकार मान्यता और सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने और उचित प्रक्रिया के बाद वन अधिकार अधिनियम के दावों को पूरी तरह से खारिज किए जाने तक उनके घरों को खाली नहीं करा सकती या ध्वस्त नहीं कर सकती।
उन्होंने कहा, "यह एक और जिम्मेदारी से बचने का प्रयास है। आश्चर्यचकित न हों। यदि विधानसभा में सरकार जांच समिति के गठन के लिए खुद को रिश्वत देती है और ध्वस्तीकरण का बचाव भी करती है, तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा। इस सरकार के बारे में मुझे कुछ भी आश्चर्यचकित नहीं करता।"
मंगलवार को पुलिस और वन विभाग ने जम्मू शहर के बाहरी इलाकों में अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया और निचले शिवालिक पर्वतमाला के रायका बांदी वन क्षेत्र में लगभग 60 कनाल बहुमूल्य वन भूमि को पुनः प्राप्त करने के लिए लगभग 20-30 ढांचों को ध्वस्त कर दिया।
प्रभावित परिवारों ने इस कार्रवाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और ध्वस्तीकरण को "अन्यायपूर्ण" बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह अभियान बिना किसी पूर्व सूचना के संचालित किया गया था।
इस बीच, शेख अब्दुल राशिद के नेतृत्व वाली अवामी इत्तेहाद पार्टी (एआईपी) ने भी जम्मू के सिदरा क्षेत्र में अतिक्रमण रोधी अभियान को लेकर सरकार की आलोचना की।
एआईपी के मुख्य प्रवक्ता इनाम उन नबी ने कहा कि यह कार्रवाई "अमानवीय, गरीब-विरोधी और आर्थिक रूप से कमजोर और आदिवासी परिवारों पर सीधा हमला" है। नबी ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकारी जमीन पर कथित तौर पर कब्जा किए हुए गरीब और लाचार लोगों के खिलाफ बुलडोजर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि जमीन हड़पने वाले और ताकतवर अतिक्रमणकारी पूरी तरह से बेखौफ हैं।
उन्होंने इस अभियान का आदेश देने वालों से सवाल किया कि क्या उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि अकेले जम्मू मंडल में ही लगभग 14 लाख कनाल सरकारी जमीन पर कथित तौर पर अवैध कब्जा है।
उन्होंने पूछा, "अगर प्रशासन वाकई सरकारी जमीन वापस लेने को लेकर गंभीर है, तो बुलडोजर सिर्फ आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, आदिवासी समुदायों और गरीब परिवारों के घरों तक ही क्यों पहुंच रहे हैं? सिर्फ बेबस लोगों के खिलाफ ही चुनिंदा कार्रवाई क्यों की जा रही है?"
मीरवाइज ने भी इस अतिक्रमण रोधी अभियान पर चिंता व्यक्त की।
मीरवाइज ने एक पोस्ट में कहा, "जम्मू के सिदरा इलाके में अधिकारियों द्वारा आदिवासी गुर्जर बकरवाल समुदाय के घरों को बड़े पैमाने पर गिराने और उन्हें बेघर करने की खबर बेहद परेशान करने वाली है! कानून प्रवर्तन की आड़ में समुदायों को चुनिंदा रूप से निशाना बनाया जा रहा है।"
भाषा
राखी रंजन
रंजन
2005 2213 श्रीनगर