आप का पंजीकरण निरस्त करने और अरविंद केजरीवाल को अयोग्य ठहराने की याचिका हुई खारिज
नरेश
- 20 May 2026, 07:20 PM
- Updated: 07:20 PM
(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 20 मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने शराब नीति मामले में उच्च न्यायालय की कार्यवाही का बहिष्कार करने पर निर्वाचन आयोग को आम आदमी पार्टी (आप) का पंजीकरण रद्द करने और उसके प्रमुख अरविंद केजरीवाल एवं अन्य नेताओं को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित करने का निर्देश देने का अनुरोध करते हुए दायर की गयी एक जनहित याचिका बुधवार को खारिज कर दी।
मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि सतीश कुमार अग्रवाल की इस याचिका में कोई दम नहीं है और उनका तर्क 'बहुत ही बेतुका, अत्यधिक भ्रामक और निराधार' है।
जनहित याचिका में कहा गया है कि चूंकि आम आदमी पार्टी के पदाधिकारियों और सदस्यों - केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक - ने शराब नीति मामले में न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष कार्यवाही का बहिष्कार किया, इसलिए इस पार्टी का पंजीकरण जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29ए (5) के तहत निरस्त करने लायक है।
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि धारा 29ए (5) के तहत एक राजनीतिक दल के लिए 'संविधान के प्रति सच्ची निष्ठा और वफादारी' रखना जरूरी है लेकिन केजरीवाल, सिसोदिया और पाठक शराब नीति मामले में 'पूरी व्यवस्था को कलंकित एवं उसे राजनीतिक रंग' देकर संवैधानिक सिद्धांतों का पालन करने में विफल रहे।
उच्च न्यायालय ने कहा, "रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि प्रतिवादी संख्या तीन (आप) ने यह स्वीकार किया हो कि उसे संविधान या धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद या लोकतंत्र के सिद्धांतों में विश्वास नहीं है।"
उच्च न्यायालय ने कहा कि निर्वाचन आयोग के पास किसी राजनीतिक दल का पंजीकरण रद्द करने का अधिकार नहीं है तथा वैसे भी इन नेताओं के आचरण के लिए उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही पहले ही शुरू की जा चुकी है।
उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता के इस तर्क को भी 'पूरी तरह निराधार' बताया कि केजरीवाल और अन्य को संवैधानिक प्रावधानों के प्रति निष्ठा न रखने के कारण चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया जाए।
उच्च न्यायालय ने कहा कि चुनाव लड़ने के लिए उन्हें अयोग्य ठहराने का मुद्दा तब उठेगा जब आगामी चुनाव होंगे और ये तीनों नेता उनमें चुनाव लड़ने का फैसला करेंगे।
पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता का यह मामला नहीं था कि आम आदमी पार्टी ने धोखाधड़ी से पंजीकरण कराया था या उसने निर्वाचन आयोग से कहा था कि अब वह संविधान के प्रति निष्ठावान नहीं है।
अदालत ने निष्कर्ष निकाला, ''याचिका में कोई दम नहीं है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है।''
निचली अदालत ने 27 फरवरी को शराब नीति मामले में केजरीवाल, सिसोदिया और 21 अन्य को बरी कर दिया। निचली अदालत ने कहा था कि मामला न्यायिक जांच में पूरी तरह से खरा नहीं उतरता और पूरी तरह से निराधार है।
सीबीआई ने इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की थी।
आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ सीबीआई द्वारा दायर की गयी याचिका पर सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी करते हुए न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि आरोप तय करने के चरण में निचली अदालत की कुछ टिप्पणियां और निष्कर्ष प्रथम दृष्टया त्रुटिपूर्ण प्रतीत होते हैं और उन पर विचार करने की आवश्यकता है।
इसके बाद, केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य प्रतिवादियों ने हितों के टकराव एवं पक्षपात की आशंका जताते हुए न्यायमूर्ति शर्मा से इस मामले से हटने का अनुरोध करते हुए एक आवेदन दायर किया।
लेकिन जब न्यायमूर्ति शर्मा ने इस मामले की सुनवाई से हटने से इनकार कर दिया तब केजरीवाल एवं अन्य ने सुनवाई का बहिष्कार किया।
न्यायमूर्ति शर्मा ने 14 मई को केजरीवाल, सिसोदिया और विनय मिश्रा एवं आम आदमी पार्टी के अन्य नेताओं के खिलाफ आबकारी नीति मामले से संबंधित सोशल मीडिया पोस्टों में उनके कथित 'अपमानजनक' बयानों के लिए आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की।
न्यायमूर्ति शर्मा ने यह भी कहा कि सभी आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर अब दूसरी पीठ सुनवाई करेगी।
भाषा राजकुमार नरेश
नरेश
2005 1920 दिल्ली