दहेज हत्या: अदालत ने ट्विशा के शव को सुरक्षित रखने का आदेश दिया, दूसरे पोस्टमॉर्टम से इनकार
धीरज
- 20 May 2026, 08:04 PM
- Updated: 08:04 PM
भोपाल, 20 मई (भाषा) मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की एक स्थानीय अदालत ने बुधवार को आदेश दिया कि दहेज के लिए कथित तौर पर प्रताड़ित की गई और पिछले हफ्ते मृत पाई गई नोएडा की महिला ट्विशा शर्मा के शव को सुरक्षित रखा जाए।
अदालत ने हालांकि शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की परिवार की मांग खारिज कर दी।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अनुदिता गुप्ता ने आदेश पारित करते हुए कहा कि पुलिस को एक पत्र जारी किया जाए, जिसमें उसे निर्देश दिया जाए कि वे मध्यप्रदेश में कम तापमान वाले संरक्षण सुविधा के बारे में तुरंत जानकारी प्राप्त करें और बिना किसी देरी के अदालत में इस संबंध में एक लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
अदालत के इस निर्देश से कुछ घंटे पहले ही भोपाल पुलिस ने ट्विशा शर्मा के परिवार से शव के खराब होने की आशंकाओं के मद्देनजर उसे कब्जे में लेने का अनुरोध किया था।
एक दिन पहले, अदालत ने शव को संरक्षित करने और मध्यप्रदेश के बाहर दूसरा पोस्टमॉर्टम करने का फैसला करने से पहले केस डायरी की समीक्षा करने की बात कही थी।
ट्विशा का 13 मई को राजधानी भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पोस्टमॉर्टम हुआ था और तभी से उसका शव वहां के मुर्दाघर में रखा हुआ है।
ट्विशा 12 मई की रात को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में मृत पाई गई थी, जिसके बाद पुलिस ने उसके पति वकील समर्थ सिंह और उसकी सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज हत्या और उत्पीड़न के आरोपों से संबंधित एक प्राथमिकी दर्ज की।
मृतका की सास गिरिबाला सिंह सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं।
नोएडा निवासी ट्विशा के परिजनों ने दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए एम्स दिल्ली में दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने का अनुरोध करते हुए याचिका दाखिल की थी।
कटारा हिल्स थाने के प्रभारी ने ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा को पत्र लिखकर कहा कि उनकी बेटी का पोस्टमॉर्टम 13 मई को हुआ था और वर्तमान में शव शून्य से चार डिग्री सेल्सियस नीचे (-4) तापमान पर भोपाल स्थित एम्स के मुर्दाघर में रखा गया है।
पुलिस ने एम्स के एक पत्र का हवाला देते हुए कहा कि शव को खराब होने से रोकने के लिए शून्य से 80 डिग्री सेल्सियस नीचे का तापमान चाहिए और यह सुविधा एम्स भोपाल में नहीं है।
नवनिधि शर्मा के वकील अंकुर पांडे ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि पीड़िता के परिवार ने जांच में खामियों की ओर इशारा किया है और अदालत को सूचित किया है कि प्राथमिकी मौत के तीन दिन बाद दर्ज की गई।
अर्जी में यह भी कहा गया है कि संक्षिप्त पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उल्लेख है कि जांचकर्ताओं ने पोस्टमॉर्टम के दौरान कथित फंदे के लिए इस्तेमाल वस्तु उपलब्ध नहीं कराई।
पांडे ने बताया कि परिवार ने दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में दूसरी बार पोस्टमॉर्टम कराने का अनुरोध किया गया था।
उन्होंने कहा कि ट्विशा के माता-पिता को आशंका है कि उसकी सास सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की बहन भोपाल की सर्जन हैं, इसलिए अगर शहर के किसी अस्पताल में शव परीक्षण किया जाता है तो वह दूसरी पोस्टमॉर्टम को प्रभावित कर सकती हैं।
पांडे ने दावा किया कि जब ट्विशा की पहली पोस्टमॉर्टम हुई तो सर्जन को एम्स भोपाल के पास देखा गया था।
पुलिस ने फरार पति की गिरफ्तारी में सहायक जानकारी देने वाले को 10,000 रुपये का नकद इनाम देने की घोषणा की है।
सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान, गिरिबाला सिंह ने कहा था कि वह एम्स स्थित मुर्दाघर गई थीं, जहां पीड़िता के परिवार ने कथित तौर पर उसका पीछा किया था।
ट्विशा के परिजनों ने मंगलवार को एक बयान जारी कर आरोपियों को चुनौती दी थी कि यदि उनके दावों में सच्चाई है तो वे स्वतंत्र, प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के साथ सहयोग करके खुद को निर्दोष साबित करें।
उन्होंने सवाल किया कि वे एम्स दिल्ली में दूसरी स्वतंत्र पोस्टमॉर्टम कराने से क्यों झिझक रहे हैं और क्यों इस मांग का प्रतिरोध कर रहे हैं।
पीड़िता के परिवार ने लोगों और संवैधानिक अधिकारियों से अपील करते हुए कहा, "जब एक युवा महिला खुद के लिए बोलने के लिए जीवित नहीं है, तो हर अनुत्तरित सवाल दर्द को गहरा कर देता है।"
उन्होंने अपील की कि इस मामले को एक अलग घटना के रूप में नहीं माना जाए, बल्कि इस बात की एक महत्वपूर्ण परीक्षा के रूप में लें कि क्या एक साधारण परिवार शक्तिशाली लोगों के खिलाफ न्याय पा सकता है।
भाषा ब्रजेन्द्र
धीरज
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2005 2004 भोपाल