दिल्ली में 'जाने पहचाने अनजाने' नाटक में साथ दिखेंगे अनुपम खेर और स्वरूप संपत
अविनाश
- 18 May 2026, 09:34 PM
- Updated: 09:34 PM
नयी दिल्ली, 18 मई (भाषा) अभिनेता अनुपम खेर और स्वरूप संपत संगीतमय कॉमेडी-नाटक ''जाने पहचाने अनजाने'' के दिल्ली प्रीमियर में मुख्य भूमिका में दिखेंगे। यह नाटक 22 से 24 मई तक कमानी ऑडिटोरियम में मंचित किया जाएगा।
पुरस्कृत फिल्मकार गजेंद्र अहिरे द्वारा लिखित और निर्देशित यह नाटक प्रेम, पहचान और आधुनिक रिश्तों की पड़ताल करता है। इसके साथ ही संगीतकार अनु मलिक नाटक संगीत के क्षेत्र में कदम रख रहे हैं। अनुपम खेर स्टूडियो इस नाटक की निर्माता है।
फेलिसिटी थिएटर और पीयूष शर्मा प्रोडक्शंस द्वारा प्रस्तुत इस नाटक में खेर और स्वरूप संपत मुख्य भूमिकाओं में हैं, जिनके साथ मेघना मलिक, माया शर्मा, विकास रावत, श्रद्धा मंडले और हरमन डी सूजा जैसे कलाकारों की टीम भी शामिल है।
यह नाटक पड़ोसियों के जीवन के इर्द-गिर्द घूमता है—एक विधवा, एक विधुर, एक युवा पेइंग गेस्ट और एक ऐसी महिला जो जीवन के मध्य में अलगाव का सामना कर रही है। ये सभी अकेलेपन और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच अपना रास्ता तलाशते हैं।
खेर ने कहा कि इस नाटक को राष्ट्रीय राजधानी में लाना उनके लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी शहर ने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में बिताए समय ने उनकी थिएटर यात्रा को आकार दिया था।
उन्होंने कहा, ''यह नाटक (जाने पहचाने अनजाने) को दिल्ली लाना—वह शहर जहां मैंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में अभिनय सीखते हुए कई साल बिताए, जहां मैंने जीवन और थिएटर की धड़कन को महसूस किया—ऐसा लगता है जैसे मैं एक कहानी उसके घर वापस ला रहा हूं।''
उन्होंने कहा, ''यह नाटक उन रिश्तों की बात करता है जिन्हें हम पहचानते तो हैं, लेकिन शायद ही कभी रुककर उन पर सवाल उठाते हैं और उसी ठहराव में इसकी सच्चाई छिपी है। दिल्ली की वह भावना—जो गहराई से सुनती है, निडर होकर प्रतिक्रिया देती है और पूरी ईमानदारी से जुड़ती है—इस प्रीमियर को हम सभी के लिए बेहद खास बनाती है।''
यह नाटक अनुपम खेर स्टूडियो की पिछली सफल मंच प्रस्तुतियों की कड़ी में शामिल है, जिनमें 'सालगिरह', 'कुछ भी हो सकता है' और 'मेरा वो मतलब नहीं था' शामिल हैं।
लेखक-निर्देशक अहिरे ने कहा कि यह नाटक दर्शकों को रिश्तों और भावनात्मक अकेलेपन के बारे में सोचने और अपनी खुद की व्याख्याएं खोजने के लिए आमंत्रित करता है।
अहिरे ने एक बयान में कहा, ''यह एक ऐसी कहानी है जो अपने साथ कोई जवाब लेकर नहीं आती, बल्कि यह दर्शकों को अपने जवाब खुद खोजने के लिए प्रेरित करती है, और यही बात इस शो को इतना प्रासंगिक बनाती है। अनुपम खेर, स्वरूप संपत और पूरी टीम के साथ काम करना बेहद समृद्ध अनुभव रहा है।''
नाटक का संगीत मलिक ने तैयार किया है, और गाने शान, सुखविंदर सिंह, आनंदी जोशी और खुद खेर ने गाए हैं। गाने के बोल कौसर मुनीर ने लिखे हैं, जबकि कोरियोग्राफी चिराग अग्रवाल ने की है।
भाषा राजेश राजेश अविनाश
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