संसदीय समिति जी राम जी अधिनियम के शुरुआती कार्यान्वयन की समीक्षा करेगी
पारुल
- 18 May 2026, 06:55 PM
- Updated: 06:55 PM
नयी दिल्ली, 18 मई (भाषा) ग्रामीण विकास और पंचायती राज संबंधी संसद की स्थायी समिति 'विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम' के कार्यान्वयन के लिए किए गए प्रारंभिक कार्यों पर ग्रामीण विकास विभाग के प्रतिनिधियों के साथ 20 मई को चर्चा करेगी।
संसद की वेबसाइट पर साझा की गई जानकारी के मुताबिक, ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारी समिति को इस विषय पर जानकारी देंगे कि इस कानून के कार्यान्वयन के लिए क्या प्रारंभिक कार्य किए गए हैं।
यह बैठक केंद्र सरकार की इस घोषणा के कुछ दिन बाद होगी कि जी राम जी अधिनियम एक जुलाई से पूरे देश में लागू होगा। यह कानून महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लाया गया है।
सरकार ने इस कदम को 'विकसित भारत 2047' के दृष्टिकोण के अनुरूप भारत के ग्रामीण विकास ढांचे में एक "ऐतिहासिक परिवर्तन" के रूप में वर्णित किया।
नये कानून के तहत वित्तीय वर्ष में 125 दिन का रोजगार प्रदान किया जाएगा, जबकि मनरेगा के तहत सालाना 100 दिन के रोजगार की गारंटी थी।
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा है कि मनरेगा से नये ढांचे में बदलाव निर्बाध होगा और मौजूदा योजना के तहत किए जा रहे काम 30 जून से नयी प्रणाली के तहत जारी रहेंगे।
केंद्र सरकार ने कहा है कि मौजूदा 'ई-केवाईसी' सत्यापित मनरेगा जॉब कार्ड नये "ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड" जारी होने तक वैध रहेंगे और बिना जॉब कार्ड वाले श्रमिक ग्राम पंचायत स्तर पर पंजीकरण कराना जारी रख सकते हैं।
सरकार ने कहा है कि लंबित 'ई-केवाईसी' के कारण श्रमिकों को रोजगार से वंचित नहीं किया जाएगा और वेतन प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से सीधे बैंक या डाकघर खातों में भेजना जारी रहेगा।
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा कि वेतन भुगतान, शिकायत निवारण, आवंटन मानदंड, प्रशासनिक व्यय और संक्रमणकालीन प्रावधानों को शामिल करने वाले मसौदा नियम राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों के परामर्श से तैयार किए जा रहे हैं और सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किए जाएंगे।
केंद्र ने 2026-27 में इस कार्यक्रम के लिए 95,692.31 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं। इसे ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए अब तक का सबसे अधिक बजट अनुमान आवंटन बताया गया है। राज्यों के योगदान के साथ, कुल परिव्यय 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की उम्मीद है।
भाषा
हक हक पारुल
पारुल
1805 1855 दिल्ली