जयपुर वैक्स संग्रहालय में पर्यटकों को मिलेगा सिनेमा का नया अनुभव
बाकोलिया रवि कांत
- 17 May 2026, 08:55 PM
- Updated: 08:55 PM
जयपुर, 17 मई (भाषा) राजस्थान की राजधानी जयपुर में नाहरगढ़ किले की ऐतिहासिक दीवारों के बीच स्थित जयपुर वैक्स संग्रहालय अब पर्यटकों को केवल मोम की प्रतिमाओं तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि उन्हें वर्चुअल रियलिटी और सिनेमा के रोमांचक अनुभव से भी जोड़ेगा।
विश्व संग्रहालय दिवस से एक दिन पहले संग्रहालय प्रबंधन ने नयी तकनीकी पहल की घोषणा की है, जिसके तहत पर्यटक प्रतिमाओं को केवल देखेंगे ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी कहानियों को महसूस भी कर सकेंगे।
संग्रहालय के संस्थापक निदेशक अनूप श्रीवास्तव ने कहा, "पर्यटक अब सिर्फ मूर्तियां देखना नहीं चाहते, वे उन्हें महसूस करना और वर्चुअल रियलिटी के जरिए अनुभव लेना चाहते हैं। इसी सोच के साथ संग्रहालय को अत्याधुनिक तकनीक से उन्नत किया जा रहा है।"
उन्होंने बताया कि इस पहल की शुरुआत हाड़ी रानी की मोम प्रतिमा से होगी। इसके लिए विशेष रूप से 10 मिनट की फिल्म तैयार की गई है। पर्यटक 22 सीटों वाले थिएटर में न केवल हाड़ी रानी की प्रतिमा देख सकेंगे, बल्कि उनके त्याग, समर्पण, प्रेम और देशभक्ति की कहानी का अनुभव भी कर सकेंगे। फिल्म का पोस्ट-प्रोडक्शन कार्य मुंबई में चल रहा है।
अनूप श्रीवास्तव ने बताया कि संग्रहालय नाहरगढ़ किले के इतिहास पर भी एक विशेष फिल्म तैयार कर रहा है। इसमें किले के निर्माण, उससे जुड़ी चुनौतियों तथा सवाई जय सिंह, सवाई माधो सिंह और नाहर सिंह से जुड़े ऐतिहासिक पहलुओं को दर्शाया जाएगा।
इससे पर्यटकों को नाहरगढ़ किले के इतिहास को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि आगामी पर्यटन सीजन से कुछ मोम प्रतिमाओं पर आधारित वर्चुअल रियलिटी फिल्में भी उपलब्ध होंगी।
श्रीवास्तव के अनुसार, अगस्त के पहले सप्ताह तक ये सभी बदलाव पर्यटकों के लिए शुरू कर दिए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि देश में कई सामान्य मोम संग्रहालय हैं, लेकिन जयपुर वैक्स संग्रहालय देश का एकमात्र ऐसा संग्रहालय है, जो 300 वर्ष पुराने विरासत किले के भीतर स्थित है। यहां लाइव सेट, ध्वनि प्रभाव और कहानियों के साथ मोम प्रतिमाएं प्रदर्शित की गई हैं, जिससे इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान मिली है।
उन्होंने बताया कि 'रॉयल फिगर्स' और 'शीश महल' संग्रहालय की प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं। शीश महल में 25 लाख से अधिक कांच के टुकड़ों और ठिकरी कला के साथ शुद्ध सोने का इस्तेमाल किया गया है।
पर्यटकों को और आकर्षित करने के लिए शीश महल की लाइटिंग के ऑटोमेशन पर भी काम किया जा रहा है, जिससे लोग विभिन्न प्रकार की रोशनी में इसकी खूबसूरती देख सकेंगे। साथ ही संग्रहालय के बाहरी हिस्से को रंगीन एलईडी लाइटों से सजाया जाएगा, ताकि रात में भी पर्यटक विशेष अनुभव प्राप्त कर सकें।
भाषा
बाकोलिया रवि कांत
1705 2055 जयपुर