बंगाल सरकार ने कल्याण बनर्जी और राजीव कुमार सहित कई नेताओं की सुरक्षा में कटौती की
नरेश
- 17 May 2026, 08:54 PM
- Updated: 08:54 PM
कोलकाता, 17 मई(भाषा) पश्चिम बंगाल सरकार ने खतरे का आकलन करने के बाद कई नेताओं, पूर्व अधिकारियों और अन्य प्रमुख व्यक्तियों को मुहैया कराई गई सुरक्षा में कटौती कर दी है। आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि सरकार ने इसी के साथ विशिष्ट व्यक्ति (वीआईपी) श्रेणी के तहत सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों के घरों पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को वापस बुला लिया है और उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मियों की संख्या कम कर दी है।
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी सहित कई चर्चित हस्तियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था में कटौती करने के कुछ दिनों बाद यह नवीन फैसला सामने आया है।
सूत्रों ने बताया कि हाल ही में जारी एक आधिकारिक निर्देश के अनुसार, खतरे के नवीनतम आकलन के आधार पर वीआईपी सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों को मिली सुरक्षा का पुनर्मूल्यांकन व संशोधन किया गया।
सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी, पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी, बेलियाघाटा के विधायक कुणाल घोष, कोलकाता के पूर्व महापौर और तृणमूल कांग्रेस नेता सोवन चटर्जी, राज्यसभा सदस्य और राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार, सेवानिवृत्त डीजीपी मनोज मालवीय और पूर्व कार्यवाहक डीजीपी पीयूष पांडे सहित कई लोगों की सुरक्षा घटा दी गई है।
उन्होंने बताया कि संशोधित व्यवस्था के तहत उनके आवासों के बाहर तैनात पुलिस कर्मियों को वापस बुला लिया गया है।
प्रशासन के सूत्रों ने बताया कि समीक्षा में पाया गया कि सूची में शामिल कुछ लोगों को अब अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है और उन्हें केवल उनकी वर्तमान संवैधानिक या आधिकारिक स्थिति के अनुरूप ही सुरक्षा मिलनी चाहिए।
अधिकारियों ने बताया कि संसद सदस्य कल्याण बनर्जी और राजीव कुमार दोनों को सांसदों को मिलने वाली सुरक्षा जारी रहेगी।
उन्होंने बताया कि अरूप बिस्वास को पहले राज्य मंत्री के रूप में सुरक्षा मिली थी, लेकिन उन्हें उस स्तर की सुरक्षा नहीं दी जाएगी क्योंकि वर्तमान में वह न तो मंत्री हैं और न ही विधायक।
अधिकारियों ने बताया कि सारदा घोटाला मामले में जमानत मिलने के बाद कुणाल घोष ने हमलों की आशंका जताई थी और अदालत के निर्देशों पर उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया कराई थी। उन्होंने बताया कि घोष को अब केवल विधायक के रूप में मिलने वाली सुरक्षा ही दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि इसी तरह, पिछली सरकार के दौरान तृणमूल और राज्य सरकार के लिए कई कानूनी मामलों की पैरवी करने वाले एक वकील को दी गई अतिरिक्त सुरक्षा भी वापस ले ली गई है, क्योंकि अधिकारियों को कथित तौर पर निरंतर बढ़ी हुई सुरक्षा के लिए कोई औचित्य नहीं मिला।
अधिकारियों ने बताया कि कार्यवाहक डीजीपी के रूप में पीयूष पांडे को अतिरिक्त सुरक्षा मिली थी, लेकिन अब उन्हें उनके मौजूदा स्थिति के अनुरूप सुरक्षा दी जाएगी।
यह ताजा कदम उस निर्देश के बाद उठाया गया है जिसमें कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को वास्तविक आवश्यकताओं से अधिक सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने के तुरंत बाद वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू की गई और सबसे पहले अभिषेक बनर्जी को दी जाने वाली सुरक्षा में कटौती की गई।
राज्य सरकार ने अभिषेक बनर्जी की 'जेड-प्लस' श्रेणी की सुरक्षा वापस लेने के अलावा, विशेष पायलट कार सुविधा भी बंद कर दी है। इससे पहले, कालीघाट स्थित उनके आवास और कैमक स्ट्रीट स्थित उनके कार्यालय परिसर के बाहर तैनात पुलिस बल को भी हटा लिया गया था।
प्रशासन ने हालांकि स्पष्ट किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि कोलकाता पुलिस को उनके आवास, आवागमन और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं और उनकी सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
भाषा धीरज नरेश
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