दिल्ली में आठ करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़, 14 गिरफ्तार
प्रशांत
- 08 May 2026, 08:12 PM
- Updated: 08:12 PM
नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) दिल्ली पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 14 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन पर आठ करोड़ रुपये से अधिक की ठगी में शामिल होने का आरोप है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने सोशल मीडिया मंचों, 'मैसेजिंग ऐप' और 'जॉब पोर्टल' के माध्यम से नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को निशाना बनाया और उन्हें घर से काम करने की पेशकश, अंशकालिक नौकरियां और आकर्षक वेतन पैकेज की पेशकश की।
शाहदरा के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) राजेंद्र प्रसाद मीणा ने कहा, "गीता कॉलोनी क्षेत्र के एक होटल से संदिग्ध साइबर धोखाधड़ी का संचालन होने के संबंध में 25 अप्रैल को मिली सूचना के बाद यह अभियान चलाया गया।"
उन्होंने कहा कि पुलिस की एक टीम ने होटल पर छापा मारा और पाया कि विभिन्न राज्यों के कई संदिग्धों को अलग-अलग कमरों में ठहरे हुए थे।
डीसीपी ने बताया कि पूछताछ और तलाशी के दौरान पुलिस ने 12 लोगों को गिरफ्तार किया और संगठित साइबर धोखाधड़ी गिरोह में उनकी कथित संलिप्तता सामने आई।
पुलिस ने बताया कि आगे की जांच के दौरान पंजाब के लुधियाना में प्रदीप उर्फ अल्फा और गेवी नाम के दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिससे गिरफ्तार किए गए लोगों की कुल संख्या 14 हो गई है।
उन्होंने बताया कि इस गिरोह के सदस्य पंजाब, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम और मध्य प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से थे और अपने आकाओं के कहने पर सोशल मीडिया समूहों के माध्यम से काम करते थे। उनके कुछ आका कंबोडिया सहित भारत के बाहर बैठे हैं।
अधिकारी ने बताया कि टीम ने पाया कि गिरोह पकड़े जाने से बचने के लिए 'म्यूल' (कमीशन पर मिलने वाले) बैंक खातों का इस्तेमाल करता था।
उन्होंने बताया कि आरोपियों के बैंक खाते का संबंध राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 40 शिकायतों से है जिनमें लगभग 1.5 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ था।
डीसीपी ने बताया कि अभियान के दौरान बरामद एक अन्य एटीएम कार्ड कथित तौर पर लगभग तीन करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ था।
उन्होने बताया कि आरोपी पहले कॉल करके या संदेश भेजकर पीड़ितों से संपर्क करते थे और उन्हें फर्जी नौकरी की पेशकश देकर लुभाते थे। अधिकारी ने बताया कि बाद में पीड़ितों को एन्क्रिप्टेड मंच ले जाया जाता था और उनका विश्वास जीतने के लिए उन्हें फर्जी कंपनी प्रोफाइल, नियुक्ति पत्र और काम आधारित कमाई की योजनाएं दिखाई जाती थीं।
पुलिस ने बताया कि जालसाज ने पीड़ितों से पंजीकरण शुल्क, सुरक्षा जमा, निवेश योजनाओं और कार्य पूर्णता शुल्क के नाम पर पैसे वसूले और बड़ी रकम मिलने के बाद वे पीड़ितों को ब्लॉक कर देते थे।
मीणा ने बताया, "छापेमारी के दौरान पुलिस ने 18 मोबाइल फोन, 19 सिम कार्ड, एक लैपटॉप, तीन एटीएम कार्ड, चार चेक बुक और दो स्टाम्प बरामद किए, जिनका साइबर धोखाधड़ी की गतिविधियों में कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया था।"
भाषा नोमान प्रशांत
प्रशांत
0805 2012 दिल्ली