एएलपीए इंडिया की पायलटों की मौत के बाद एफडीटीएल में ढील न देने की मांग
मनीषा
- 01 May 2026, 01:16 PM
- Updated: 01:16 PM
नयी दिल्ली, एक मई (भाषा) पायलटों के संगठन एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ (एएलपीए) इंडिया ने नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से विमानन कंपनियों के लिए थकान से जुड़े मानकों में किसी भी तरह की ढील न देने की शुक्रवार को मांग की।
यह मांग पिछले दो दिन में दो पायलट की दिल का दौरा पड़ने से हुई मौत के बाद की गई है।
संगठन ने कहा कि नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) को 'फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन' (एफडीटीएल) नियमों के पूर्ण क्रियान्वयन के लिए समयबद्ध खाका तैयार करना चाहिए। साथ ही पायलटों की थकान की सूचना देने संबंधी प्रणाली पारदर्शी और जवाबदेही तय करने वाली हो तथा इसकी हर तिमाही सार्वजनिक जानकारी भी दी जाए।
एएलपीए इंडिया ने कहा कि हाल की घटनाओं के बाद उड़ान सुरक्षा, नियामकीय विश्वसनीयता और पायलट के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएं हैं।
एयर इंडिया और अकासा एयर के एक-एक पायलट की हाल ही में दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई। दोनों उस समय ड्यूटी पर नहीं थे। एयर इंडिया के पायलट की बाली में निर्धारित विश्राम के दौरान और अकासा एयर के पायलट की प्रशिक्षण के दौरान मौत हुई।
संशोधित एफडीटीएल नियम में पायलटों के लिए अधिक विश्राम समय का प्रावधान है लेकिन यह अभी पूरी तरह लागू नहीं हुए हैं क्योंकि विमानन कंपनियों ने परिचालन चुनौतियों का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय मांगा है।
संगठन ने मांग की कि इन अस्थायी छूटों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के लिए एक स्पष्ट और समयबद्ध कार्यक्रम बनाया जाए, ताकि सभी विमानन कंपनियों में नियमों का समान रूप से पालन हो सके।
आरटीआई से मिली जानकारी का हवाला देते हुए संगठन ने कहा कि पायलटों द्वारा दी गई थकान रिपोर्ट को संचालकों द्वारा बहुत कम स्वीकार किया जा रहा है जो सुरक्षित कार्य संस्कृति के सिद्धांतों के खिलाफ है।
एएलपीए इंडिया के अध्यक्ष कैप्टन सैम थॉमस ने डीजीसीए प्रमुख वीर विक्रम यादव को एक पत्र लिखा है, जिसकी एक प्रति नागर विमानन सचिव समीर कुमार सिन्हा को भी भेजी गई है।
संगठन ने कहा कि इस स्तर पर एफडीटीएल ढांचे में किसी भी प्रकार की ढील देना उचित नहीं होगा और विमानन कंपनियों के ऐसे किसी भी प्रस्ताव को सख्ती से खारिज किया जाना चाहिए।
उसने यह भी कहा कि व्यावसायिक हितों को सुरक्षा से ऊपर नहीं रखा जा सकता और पायलटों की पर्याप्त उपलब्धता को थकान सुरक्षा मानकों को कमजोर करने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
भाषा निहारिका मनीषा
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