सारस की बढ़ती आबादी से किसान, वन्यजीव प्रेमी व वन अधिकारी उत्साहित
अविनाश
- 01 May 2026, 12:47 PM
- Updated: 12:47 PM
बरेली (उप्र), एक मई (भाषा) उत्तर प्रदेश के राज्य पक्षी सारस की बढ़ती आबादी ने किसानों, वन्यजीव प्रेमियों और वन अधिकारियों के बीच उत्साह पैदा कर दिया है, जो इसे पारिस्थितिक संतुलन के लिए एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखते हैं।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सारस की संख्या में वृद्धि मौजूदा संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाती है और विशेष रूप से आर्द्रभूमि और दलदली क्षेत्रों में पर्यावरणीय स्थितियों में सुधार का संकेत देती है।
रुहेलखंड उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक भौगोलिक क्षेत्र है जिसमें बरेली, मुरादाबाद और बिजनौर जैसे जिले शामिल हैं।
मुख्य वन संरक्षक (रुहेलखंड क्षेत्र) पीपी सिंह के अनुसार दुनिया में उड़ने वाला सबसे लंबा पक्षी (भारतीय सारस क्रेन) सारस पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा, वयस्क पक्षी लगभग 156-180 सेमी की ऊंचाई तक पहुंच सकते हैं और नर और मादा दोनों एक जैसे दिखते हैं।
सिंह ने कहा कि यह पक्षी उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में पाया जाता है, जहां व्यापक आर्द्रभूमि की उपस्थिति के कारण इटावा, मैनपुरी, औरैया, एटा, अलीगढ़ और शाहजहांपुर जैसे जिलों में बड़ी आबादी है।
रुहेलखंड क्षेत्र में कुल 1,942 सारस क्रेन दर्ज किए गए हैं, जिनमें बरेली में 380, शाहजहांपुर में 1,078, बदांयू में 115, पीलीभीत में 98, मुरादाबाद में 50, बिजनौर में 174, संभल में 25, नजीबाबाद में 18 और रामपुर में चार शामिल हैं। उन्होंने इसे बड़ी उपलब्धि बताया।
अधिकारियों ने प्रजनन प्रवृत्तियों को प्रोत्साहित करने की भी सूचना दी तथा पूरे क्षेत्र में 302 चूजों को दर्ज किया गया, जिनमें शाहजहांपुर में 146 और बरेली में 71 शामिल हैं, जो स्वस्थ प्रजनन चक्र का संकेत देते हैं।
प्रभागीय वन अधिकारी दीक्षा भंडारी ने कहा कि सारस क्रेन भूरे रंग का पक्षी है जिसके लाल पैर और चोंच तथा सिर और गर्दन अलग लाल रंग के होते हैं। इनहें आम तौर पर जोड़ों में या पारिवारिक समूहों में देखा जाता है और अपने मजबूत बंधन व्यवहार के लिए जाना जाता है, जिसे अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में प्यार और निष्ठा का प्रतीक माना जाता है।
उन्होंने कहा कि पक्षी पूरे वर्ष प्रजनन करते हैं, अगस्त और सितंबर के दौरान चरम प्रजनन होता है। वे आम तौर पर उथले आर्द्रभूमि या धान के खेतों में घोंसले बनाते हैं, जहां मादा दो अंडे देती है। माता-पिता दोनों बच्चों के पालन-पोषण और सुरक्षा की जिम्मेदारी साझा करते हैं।
विशेषज्ञों ने कहा कि सारस क्रेन की उपस्थिति एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेतक है, क्योंकि वे आर्द्रभूमि पर निर्भर हैं जो विविध जलीय पौधों और जानवरों का भी समर्थन करते हैं।
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के पूर्व निदेशक आर के सिंह ने कहा कि सारस के संरक्षण से आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने में भी मदद मिलती है, जो प्राकृतिक जल शोधक के रूप में कार्य करता है। उन्होंने किसानों को सारस के आवासों के पास कीटनाशकों के उपयोग से बचने और उनके घोंसलों और चूजों को जानवरों से बचाने की सलाह दी।
सारस, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की अनुसूची चार में सूचीबद्ध है। इसका शिकार करना, अण्डों को चुराना अथवा व्यापार करना दण्डनीय अपराध है।
अधिकारियों के अनुसार कई क्षेत्रों में किसान अपने खेतों में सारस क्रेन की उपस्थिति को शुभ मानते हैं, जिससे समुदाय के नेतृत्व वाले संरक्षण प्रयासों को मदद मिलती है।
भाषा सं जफर अविनाश
अविनाश
0105 1247 बरेली