प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया
जफर सलीम मनीष रवि कांत
- 29 Apr 2026, 03:39 PM
- Updated: 03:39 PM
हरदोई/लखनऊ, 29 अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को हरदोई के मल्लावां में 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया।
आधिकारिक बयान के अनुसार लगभग 36,230 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह एक्सप्रेसवे मेरठ और प्रयागराज के बीच यात्रा समय को मौजूदा 10–12 घंटे से घटाकर करीब छह घंटे कर देगा।
बयान में कहा गया है कि गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज सहित 12 प्रमुख जिलों को जोड़ेगा।
इससे पहले, प्रधानमंत्री के हरदोई पहुंचने पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया और उन्हें स्मृति-चिह्न भेंट किया। आदित्यनाथ ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि इस एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से राज्य की विकास यात्रा को नयी गति मिलेगी।
आदित्यनाथ ने छह-लेन वाले इस एक्सप्रेसवे को गांवों, किसानों, उद्यमियों और युवाओं को जोड़ने वाली "जीवन रेखा" बताते हुए कहा कि यह विकास को गति देने और दूरियां कम करने में अहम भूमिका निभाएगा।
केंद्रीय मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी इस परियोजना को देश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में से एक बताते हुए इसे आधुनिक बुनियादी ढांचे का महत्वपूर्ण उपहार करार दिया।
आधिकारिक बयान के अनुसार प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीईआईडीए) की प्रदर्शनी का अवलोकन किया, पौधरोपण किया और जनसभा को संबोधित करने के बाद दोपहर में वापस लौटने का कार्यक्रम है।
बयान में कहा गया कि यह एक्सप्रेसवे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर विकसित किया गया है। यह छह लेन का है, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकता है।
इस परियोजना की एक प्रमुख विशेषता शाहजहांपुर के पास बनी 3.2 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी है, जहां आपात स्थिति में वायुसेना के विमान उतर सकते हैं। पूरे मार्ग पर उन्नत तकनीक आधारित इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस), सीसीटीवी निगरानी, इमरजेंसी कॉल बॉक्स और एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा एक्सप्रेसवे के किनारे 'इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर' (आईएमएलसी) विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें बड़े गोदाम, शीतगृह (कोल्ड स्टोरेज) और खाद्य प्रसंस्करण केंद्र जैसी सुविधाएं होंगी, जिससे निवेश आकर्षित होगा और रोजगार सृजन में मदद मिलेगी।
यह एक्सप्रेसवे पूर्वांचल, आगरा-लखनऊ, बुंदेलखंड और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे सहित अन्य प्रमुख कॉरिडोर से भी जुड़ेगा, जिससे एक व्यापक अंतरसंपर्क तंत्र विकसित होगा।
अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगी और उत्तर प्रदेश को एक हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
एक बयान के मुताबिक, अदाणी रोड ट्रांसपोर्ट लिमिटेड ने इस परियोजना के 464 किलोमीटर, यानी कुल एलाइनमेंट के लगभग 80 प्रतिशत हिस्से का निर्माण किया है। शेष भाग का निर्माण आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर ने किया है।
निर्माण के दौरान इस परियोजना में 12,000 से अधिक श्रमिक तैनात रहे।
उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार यह एक्सप्रेसवे प्रत्येक वर्ष 25,000–30,000 करोड़ रुपये की लॉजिस्टिक्स लागत में बचत करेगा, अगले एक दशक में लगभग तीन लाख रोजगार सृजित करेगा और राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का योगदान देगा।
भाषा
जफर सलीम मनीष रवि कांत
2904 1539 हरदोई/लखनऊ