'नागरिक देवो भव' हर निर्णय का मूलमंत्र हो: प्रधानमंत्री का एक करोड़ से अधिक लोक सेवकों को पत्र
वैभव
- 22 Apr 2026, 02:30 PM
- Updated: 02:30 PM
नयी दिल्ली, 22 अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक करोड़ से अधिक लोक सेवकों को पत्र लिखकर कहा है कि 'नागरिक देवो भव' (नागरिक ही भगवान है) का सिद्धांत हर निर्णय का मूलमंत्र होना चाहिए और सरकार को अपनी क्षमता के अनुसार जनता की सेवा करनी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने लोक सेवकों को यह भी बताया कि शासन करुणा पर आधारित होना चाहिए और सार्वजनिक सेवा की जिम्मेदारी निभाने वालों को आजीवन सीखते रहने का एक सर्वोत्तम उदाहरण बनना चाहिए।
सिविल सेवा दिवस से एक दिन पहले 20 अप्रैल को लिखे गए ये पत्र 12 भाषाओं - हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, ओडिया, गुजराती, बांग्ला, कन्नड़, पंजाबी, असमिया, मलयालम, तेलुगु और तमिल में जारी किए गए।
मोदी ने कहा कि 21वीं सदी बड़ी चुनौतियों के साथ-साथ अवसरों का भी समय है और रुझान हर दिन बदल रहे हैं, नई प्रौद्योगिकियां उभर रही हैं और लगातार नए नवाचार हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि नागरिकों और दुनिया दोनों को देश से बहुत उम्मीदें हैं।
उन्होंने कहा, ''यह महत्वपूर्ण है कि सरकार की सेवाएं और कार्य संस्कृति इस ऐतिहासिक युग का अधिकतम लाभ उठाने के लिए अनुकूल हों। इस दिशा में 'आईगॉट कर्मयोगी' जैसे मंचों के उपयोग से आजीवन सीखने को आदत बनाना महत्वपूर्ण है। आप बेहतर बनने का चुनाव कर रहे हैं ताकि भारत बेहतर बन सके।''
प्रधानमंत्री ने लोक सेवकों को 'कर्मयोगी' कहकर संबोधित किया और कहा कि उन्होंने यह पत्र उन्हें एक बहुत ही विशेष समय पर लिखा है, क्योंकि भारत के कई हिस्सों में त्योहारों का मौसम है।
उन्होंने कहा कि रोंगाली बिहू, विशु, पुथंडू, पोइला बोइशाख, महा बिशुबा पाना संक्रांति और बैसाखी के उत्साह से पूरा वातावरण सराबोर है।
मोदी ने कहा कि ये त्योहार आशा और नई शुरुआत के प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा, ''ऐसे समय में, आप सीखने और विकास के एक उत्सव - 'साधना सप्ताह' का हिस्सा बन गए हैं। भारत के कोने-कोने से लोक सेवकों को एक साथ लाने वाले इस अनूठे प्रयास का हिस्सा बनने के लिए मैं आपको बधाई देता हूं।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि वह लोक सेवकों के सेवाभाव के प्रति गहरी सराहना व्यक्त करना चाहते हैं, इसी सेवाभाव के कारण वे इस प्रयास का हिस्सा बन सके।
उन्होंने कहा, ''मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि ऐसे मंच व्यक्तिगत विकास और पेशेवर क्षमताओं को बढ़ाने के लिए आवश्यक हैं।''
मोदी ने कहा कि कुछ नया खोजना जीवन के सबसे बेहतरीन अनुभवों में से एक है और हर किसी को जिज्ञासा की इस भावना को जीवित रखना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी लोक सेवकों को यह याद रखना चाहिए कि पहले बेहतर प्रदर्शन को मापदंड माना जाता था, लेकिन अब सभी प्रयासों का मूल्यांकन 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के आधार पर किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ''हमारे प्रयासों की गति, व्यापकता, दिशा और तीव्रता इसी दृष्टिकोण से निर्देशित होनी चाहिए... 'नागरिक देवो भव' का सिद्धांत हर निर्णय के केंद्र में होना चाहिए।''
मोदी ने कहा कि 'आईगॉट कर्मयोगी' मंच, जिस पर लोक सेवक अब प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं ''हमारी सरकार की मानव पूंजी को रूपांतरित करने का सबसे बड़ा और सबसे महत्वाकांक्षी प्रयास है और आप इसके मूल में हैं।''
उन्होंने कहा, ''मुझे बताया गया था कि साधना सप्ताह के तीन उद्देश्य हैं: तकनीकी रूप से तैयार होना, अपनी परंपराओं को समझना और नागरिक केंद्रीयता पर आधारित ठोस परिणाम प्राप्त करना।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि ये वास्तव में आदर्श सिद्धांत हैं और जब इन सभी सिद्धांतों को एक साथ पिरोया जाता है, तो शासन आधुनिक, संस्कृति में निहित और 'जन सेवा' में दृढ़ता से निहित बन जाता है।
मोदी ने कहा कि यह याद रखना होगा कि भारत की प्रगति हर राज्य और हर विभाग में मिली सामूहिक जीत का योग है।
भाषा शोभना वैभव
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