न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा केजरीवाल की याचिका पर आज ढाई बजे सुनाएंगी फैसला
वैभव
- 20 Apr 2026, 11:35 AM
- Updated: 11:35 AM
नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और अन्य लोगों की उस याचिका पर सोमवार को अपराह्न ढाई बजे फैसला सुनाएंगी जिसमें उनसे आबकारी नीति मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग करने का अनुरोध किया गया है।
न्यायमूर्ति शर्मा ने 13 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
केजरीवाल ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की उस याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति शर्मा द्वारा किए जाने पर कई आपत्तियां उठाई थीं, जिसमें आबकारी नीति मामले में उन्हें आरोपमुक्त किए जाने को चुनौती दी गई है। उन्होंने कहा था कि न्यायमूर्ति शर्मा उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर उन्हें राहत देने से पहले इनकार कर चुकी हैं और उन्होंने मनीष सिसोदिया एवं के. कविता सहित अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर भी उन्हें राहत नहीं दी थी।
उन्होंने यह भी दावा किया था कि न्यायमूर्ति शर्मा ने ''कड़े और निर्णायक'' निष्कर्ष दिए थे।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने ''हितों के सीधे टकराव'' का भी आरोप लगाया और दावा किया कि न्यायमूर्ति शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में शामिल वकील हैं जिन्हें सॉलिसिटर जनरल के माध्यम से काम मिलता है और इस मामले में सॉलिसिटर जनरल सीबीआई की ओर से पेश हो रहे हैं।
केजरीवाल के अलावा आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने भी न्यायाधीश के सुनवाई से अलग होने का अनुरोध करते हुए याचिकाएं दायर की थीं। विजय नायर और अरुण रामचंद्र पिल्लई समेत अन्य प्रतिवादियों ने भी न्यायमूर्ति शर्मा से सुनवाई से स्वयं को अलग करने का अनुरोध किया है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सीबीआई की ओर से पेश हुए और उन्होंने इस याचिका का विरोध किया। उन्होंने न्यायमूर्ति शर्मा से आग्रह किया कि वह न्यायाधीश से सुनवाई से अलग होने का अनुरोध करने पर केजरीवाल और अन्य के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करें।
मेहता ने कहा कि ये एक "अपरिपक्व दिमाग" की आशंकाएं हैं। उन्होंने कहा कि यह ''संस्थागत सम्मान'' का मामला है और न्यायमूर्ति शर्मा को दबाव के आगे नहीं झुकना चाहिए क्योंकि ''बेबुनियाद आरोपों'' पर उनके सुनवाई से अलग होने से गलत परंपरा शुरू होगी।
अधीनस्थ अदालत ने 27 फरवरी को दिल्ली आबकारी नीति मामले में केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य को आरोपमुक्त कर दिया था। अदालत ने कहा था कि सीबीआई का मामला न्यायिक जांच की कसौटी पर टिक नहीं पाया और पूरी तरह से निराधार साबित हुआ।
भाषा सिम्मी वैभव
वैभव
2004 1135 दिल्ली