हरियाणा में रबी फसल खरीद केंद्रों पर गेहूं, सरसों की रिकॉर्ड आवक
अजय
- 13 Apr 2026, 09:27 PM
- Updated: 09:27 PM
चंडीगढ़, 13 अप्रैल (भाषा) हरियाणा में फसल खरीद केंद्रों पर पिछले दो सप्ताह में गेहूं और सरसों की नई रबी पैदावार की रिकॉर्ड आवक रही है। इसकी वजह यह है कि राज्य ने किसानों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) और जांच की प्रक्रिया को आसान बना दिया है।
अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि 2026-27 के रबी सत्र के लिए, 12 अप्रैल तक मंडियों में लगभग 39.65 लाख टन गेहूं आ चुका है। इसमें से 10.92 लाख टन गेहूं खरीदा जा चुका है, और लगभग 188 करोड़ रुपये किसानों के बैंक खातों में भेजे गए हैं।
इसके विपरीत, पिछले साल 12 अप्रैल तक राज्य भर की मंडियों में पिछले सत्र में कुल गेहूं की आवक 20.39 लाख टन दर्ज की गई थी। उनमें से 10.47 लाख टन खरीदा गया था, और किसानों को 174.39 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था।
हरियाणा में सरसों की खरीद 28 मार्च से और गेहूं की खरीद एक अप्रैल से शुरू हुई थी। केंद्र सरकार ने सरसों और गेहूं के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) क्रमशः 6,200 रुपये और 2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।
सोमवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कुरुक्षेत्र की पिपली अनाज मंडी में गेहूं खरीद प्रक्रिया का निरीक्षण किया। सैनी ने मंडी के प्रवेश द्वार पर गेट पास जारी करने की प्रणाली की समीक्षा की, खरीद व्यवस्था का आकलन किया और गेहूं की बिक्री के दौरान आने वाली समस्याओं को समझने के लिए किसानों से बातचीत की।
राज्य सरकार ने सरसों की खरीद के लिए 112 मंडियां/खरीद केंद्र बनाए हैं, जबकि गेहूं की खरीद के लिए 416 मंडियों के अलावा 264 खरीद केन्द्र खोले गए हैं।
पिपली अनाज मंडी के अपने दौरे के दौरान, मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि राज्य की सभी मंडियों और खरीद केंद्रों में गेहूं की खरीद का काम आसानी से चल रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को कोई दिक्कत नहीं हो रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी उपज का एक-एक दाना खरीदा जाएगा।
सरसों की खरीद राज्य के सहकारी महासंघ, हाफेड द्वारा की जा रही है, जबकि गेहूं की खरीद कई एजेंसियों द्वारा की जा रही है, जिसमें खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों का विभाग, हाफेड, हरियाणा भंडारण निगम और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) शामिल हैं।
राज्य सरकार ने खरीद प्रक्रिया में परदर्शिता बढ़ाने के लिए नए नियम शुरू किए हैं।
एक सरकारी बयान के अनुसार, इनमें किसानों का बायोमेट्रिक जांच, गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर की निगरानी, मंडियों व खरीद केंद्रों की जियो-फेंसिंग और कैमरे लगाना शामिल है। सरकार ने किसानों की जांच के लिए मंडियों और खरीद केंद्रों में 1,281 बायोमेट्रिक मशीनें लगाई हैं।
'मेरी फसल मेरा ब्योरा' पोर्टल पर पंजीकृत किसान, या उनके नामित प्रतिनिधि, मंडी पहुंचने पर बायोमेट्रिक जांच पूरा करने के बाद अपनी उपज बेच सकते हैं।
खरीद का काम आसानी से हो, इसके लिए लगभग 2,500 कर्मचारी और 114 तकनीकी कर्मचारी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा, मंडियों में लगभग 932 कैमरे लगाए गए हैं।
बयान में आगे कहा गया है कि राज्य ने खरीद के लिए मजबूत इंतज़ाम किए हैं और यह पक्का करेगा कि किसानों को अपनी उपज बेचने में कोई दिक्कत न हो।
भाषा राजेश राजेश अजय
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