सीएपीएफ विधेयक को मिली संसद की मंजूरी; राय ने कहा, यह बल के किसी भी वर्ग के खिलाफ नहीं
अविनाश
- 02 Apr 2026, 09:14 PM
- Updated: 09:14 PM
नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 के संबंध में विपक्ष की आशंकाओं को खारिज करते हुए बृहस्पतिवार को लोकसभा में कहा कि यह सीएपीएफ के किसी भी वर्ग के अहित में नहीं है और यह बलों को अधिक सशक्त बनाने में सहायक होगा।
राय ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि विधेयक इस सदन के समक्ष केवल एक विधायी प्रस्ताव के रूप में ही नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ और संगठित बनाने के लिए लाया गया है।
कुछ विपक्षी सदस्यों के संशोधनों को खारिज करते हुए सदन (लोकसभा) ने मंत्री के जवाब के बाद विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया। राज्यसभा ने बुधवार को विधेयक को मंजूरी प्रदान की थी। इसके साथ ही विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गयी।
मंत्री ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि यह विधेयक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के अधिकारियों की सेवा शर्तों में उत्पन्न प्रशासनिक अस्पष्टता तथा कैडर प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जिससे इन बलों की कार्यकुशलता और मनोबल, दोनों को सुदृढ़ किया जाएगा।
उन्होंने विधेयक का विरोध करने वाले सदस्यों पर प्रहार करते हुए कहा, ''जहां तक मैं समझता हूं विपक्ष ने इसमें अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने का प्रयास किया है। उन्होंने कंफ्यूजन में डालने का प्रयास किया और खुद भी कंफ्यूजन में हैं। वे या तो विधेयक को समझ नहीं पाए, या समझ पाए तो ना समझदार बनने का दिखावा किया।''
सीएपीएफ कर्मियों की पदोन्नति के संबंध में विपक्षी सदस्यों द्वारा उठाये गए मुद्दों पर मंत्री ने कहा कि विभिन्न पदोन्नति समितियों का नियमित रूप से गठन किया जाता है और यह (पदोन्नति) समय पर सुनिश्चित की जाती है।
उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में वरिष्ठता संबंधित विवादों के अदालतों में लंबित होने या अनुशासनात्मक कार्रवाइयों के कारण पदोन्नति में देर होती है।
राय ने विपक्ष की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा, ''यह विधेयक सीएपीएफ के किसी भी वर्ग या श्रेणी के अहित में नहीं है। यह केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के प्रशासनिक ढांचे में आवश्यक स्पष्टता और सुव्यवस्था प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।''
उन्होंने कहा कि यह विधेयक सीएपीएफ को और अधिक सशक्त बनाने में सहायक होगा।
मंत्री ने कहा, ''ऐतिहासिक रूप सें सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारत की संघीय व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए एक सशक्त प्रशासनिक ढांचे की कल्पना की थी। इसी के अनुरूप, सीएपीएफ में बेहतर समन्वय, नेतृत्व और कार्यकुशला सुनिश्चित करने के लिए प्रतिनियिुक्त के आधार पर अधिकारियों की तैनाती की व्यवस्था विकसित हुई, जिसमें सेना एवं आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) के अधिकारी भी शामिल हैं।''
उन्होंने कहा कि सीएपीएफ का दायरा निरंतर बढ़ा है, जिसके परिणामस्वरूप सुव्यवस्थित विकास सुनिश्चित करने की आवश्यकता महसूस हुई।
राय ने कहा कि सीएपीएफ में शामिल बलों के अलग-अलग नियम, दिशानिर्देश और प्रशासनिक उपाय विकसित हुए, जिससे उनके संचालन के दौरान अस्पष्टता देखने को मिली।
उन्होंने कहा, ''इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए यह महसूस किया गया कि भर्ती, पदोन्नति, वरिष्ठता तथा अन्य सेवा शर्तों से संबंधित विषयों के प्रबंधन के लिए स्पष्ट शीर्ष (अम्ब्रेला) ढांचा उपलब्ध कराया जाए।''
उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से सीएपीएफ के सामान्य 'ग्रुप ए' ड्यूटी अधिकारियों की भर्ती एवं सेवा शर्तों के विनियमन के लिए इस विधेयक में 'अम्ब्रेला' ढांचा का प्रावधान किया गया है, जिसका उद्देश्य भर्ती, पदोन्नति, वरिष्ठता तथा अन्य सेवा शर्तों के नियमों के माध्यम से स्पष्टता प्रदान करना है।
मंत्री ने कहा कि यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि प्रस्तावित कानून सीएपीएफ के 'ग्रुप ए' के अधिकारियों की भर्ती तथा सेवा शर्तों के विनियमन से संबंधित है।
उन्होंने यह भी बताया कि अर्धसैनिक बलों में 2022 के बाद अब तक, कांस्टेबल, सब- इंस्पेक्टर और असिस्टेंट कमांडेंट के स्तर पर 2,10,000 नियुक्तियां हुई हैं।
इससे पहले दिन में, गृह राज्य मंत्री राय ने सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए विधेयक को पेश किया। उन्होंने कहा, ''मैं माननीय गृह मंत्री जी की ओर से प्रस्ताव करता हूं कि विधेयक पर राज्यसभा द्वारा पारित रूप में विचार किया जाए।''
इस पर, विपक्षी सदस्यों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि बिना गृह मंत्री के चर्चा कैसे शुरू हो सकती है, यह गलत है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से कहा, ''नहीं सर, गृह मंत्री को (सदन में) होना चाहिए।''
इस पर, लोकसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी सदस्यों से कहा, ''बैठिये, ज्ञान मत बांटिए, कौन सी किताब में लिखा है कि गृह राज्य मंत्री विधेयक को पेश नहीं कर सकते। नियम बताइए। सदन नियम व प्रक्रिया से चलेगा। आप नहीं बताएंगे कि कौन (सदन में) होना चाहिए, कौन नहीं होना चाहिए।''
तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा ने एक संशोधन प्रस्तुत करते हुए कहा कि विधेयक को 15 सदस्यीय प्रवर समिति को भेजा जाए, साथ ही निर्देश दिया जाए कि इस पर लोकसभा के अगले सत्र के प्रथम सप्ताह के आखिरी दिन रिपोर्ट सौंपी जाए।
विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के कुछ सदस्यों ने इसे गहन विचार-विमर्श के लिए संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) या प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की थी।
भाषा सुभाष अविनाश
अविनाश
0204 2114 संसद