'मोहम्मद दीपक' को उच्च न्यायालय से कोई राहत नहीं
सुरभि
- 20 Mar 2026, 09:51 PM
- Updated: 09:51 PM
नैनीताल, 20 मार्च (भाषा) कोटद्वार प्रकरण में 'मोहम्मद दीपक' के नाम से चर्चित दीपक कुमार की याचिका पर सुनवाई करने के बाद उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्राथमिकी को रद्द करने, पुलिस सुरक्षा की मांग और कथित 'पक्षपातपूर्ण' आचरण के लिए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की उनकी अर्जी खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की पीठ ने सभी पक्षों को इस घटना से संबंधित कोई टिप्पणी सोशल मीडिया पर नहीं करने के भी निर्देश दिए ताकि जनभावनाएं नहीं भड़कें।
उच्च न्यायालय में दायर याचिका में दीपक ने अपने और अपने परिवार के लिए पुलिस सुरक्षा के साथ कथित पक्षपातपूर्ण आचरण के लिए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच का भी अनुरोध किया।
राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय को सूचित किया कि दीपक ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया है जिनमें यह तथ्य भी शामिल है कि उसे 13 मार्च तक पुलिस सुरक्षा प्रदान की गई थी तथा उसकी शिकायत के आधार पर दो प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं। अदालत को यह भी बताया गया कि दीपक को किसी प्रकार का खतरा नहीं है।
उच्च न्यायालय ने इन प्राथमिकियों पर भी गौर किया।
पुलिस सुरक्षा की अर्जी खारिज करते हुए न्यायालय ने कहा कि आरोपी पुलिस सुरक्षा की मांग नहीं कर सकता, क्योंकि इससे गलत मिसाल कायम होगी और जांच एजेंसी पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस सक्षम है।
दीपक कुमार पर दंगा करने, चोट पहुंचाने और शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गयी है जिसे रद्द करने के लिए उन्होंने उच्च न्यायालय का रुख किया।
अपनी याचिका में दीपक ने मुख्य रूप से अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध किया है। इसके अलावा, उन्होंने कथित घृणा भाषण के दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने, अपने और अपने परिवार के लिए पुलिस सुरक्षा और कथित पक्षपातपूर्ण आचरण के लिए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश दिए जाने का भी अनुरोध किया था।
अदालत ने याचिकाकर्ता की इन अर्जियों को अतार्किक बताते हुए इन पर कड़ी आपत्ति जताई।
भाषा सं दीप्ति सुरभि
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2003 2151 नैनीताल