आग में परिवार के नौ सदस्यों को गंवाने वाले पिता ने कहा : व्यवस्था की वजह से हम हार गये
सुरेश
- 19 Mar 2026, 04:47 PM
- Updated: 04:47 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 19 मार्च (भाषा) दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम में भीषण आग में नौ लोगों की जान जाने के एक दिन बाद, एक शोकाकुल पिता बृहस्पतिवार को अपने जले हुए घर में वापस लौटा और आरोप लगाया कि व्यवस्था की लापरवाही ने उससे वह सब कुछ छीन लिया जो उसे प्रिय था।
राजेंद्र कश्यप इस भीषण आग में अपने परिवार के नौ सदस्यों को खो चुके हैं। वह मौजूदा जांच के हिस्से के तहत पुलिस और फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की टीम के साथ राम चौक बाजार के पास स्थित बुरी तरह क्षतिग्रस्त इमारत में दाखिल हुए।
घर से बाहर निकलते ही वह गहरे दुख से भाव-विह्वल हो गए और फूट-फूटकर रोने लगे। उन्होंने अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए कहा, ''यह व्यवस्था की विफलता है। अगर समय पर कार्रवाई हुई होती, तो मेरा परिवार आज जीवित होता।''
पालम मेट्रो स्टेशन के पास भीड़भाड़ वाली एक गली में स्थित चार मंजिला इमारत के तहखाने, भूतल और पहली मंजिल पर कपड़े और सौंदर्य प्रसाधन का व्यवसाय चलता था, जबकि परिवार ऊपरी मंजिलों पर रहता था।
बुधवार तड़के करीब 6.15 बजे चार मंजिला इस इमारत में आग लग गयी थी, जिसमें 70-वर्षीय महिला और तीन छोटी बच्चियों सहित नौ लोगों की मौत हो गई। उन बच्चों में से एक महज तीन साल की थी। भागने की कोशिश में तीन अन्य लोग घायल हो गए।
चश्मदीदों ने पहले बचाव कार्यों में देरी का आरोप लगाया था और दावा किया था कि घटनास्थल पर तैनात पहली हाइड्रोलिक क्रेन खराब हो गई थी और दूसरी क्रेन को पहुंचने में लगभग एक घंटा लग गया, जिससे महत्वपूर्ण समय बर्बाद हो गया।
बृहस्पतिवार को पड़ोसी शोकसभा के लिए इमारत के बाहर एकत्र हुए तथा आग लगने के कारण और आपातकालीन सेवाओं की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठे।
कुछ लोगों ने शॉर्ट सर्किट का संदेह व्यक्त किया और उन्होंने भूतल पर सीढ़ियों के पास स्थित एक विद्युत बोर्ड को आग लगने का संभावित कारण बताया। हालांकि आग लगने का सटीक कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है।
एक पड़ोसी ने शोक संतप्त पिता के बगल में खड़े होकर कहा, ''सहयोग बहुत देर से आया। अगर मदद समय पर पहुंच जाती, तो हालात अलग हो सकते थे।''
एक अन्य स्थानीय निवासी ने आरोप लगाया कि त्वरित कार्रवाई से कम से कम चार से पांच जानें बचाई जा सकती थीं। उन्होंने दावा किया, ''पहली दमकल गाड़ी का हाइड्रोलिक सिस्टम काम नहीं कर पाया। यह देरी घातक साबित हुई।''
इमारत अब काली पड़ चुकी है और अंदर से खोखली हो चुकी है, उसका आंतरिक भाग पूरी तरह से नष्ट हो चुका है, और पड़ोस के लोग इस त्रासदी की भयावहता को समझने की कोशिश कर रहे हैं।
भाषा राजकुमार सुरेश
सुरेश
1903 1647 दिल्ली