यूजीसी समानता विनियमों के समर्थन में वामपंथी, दलित छात्रों का पटना में प्रदर्शन
सुरभि
- 18 Mar 2026, 11:07 PM
- Updated: 11:07 PM
पटना, 18 मार्च (भाषा) वामपंथी तथा दलित छात्रों ने बुधवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा) विनियम, 2026 के समर्थन में यहां प्रदर्शन किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए), रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (आरवाईए), भीम आर्मी तथा अन्य संगठनों के प्रतिनिधि ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी (एआईएफई) के बैनर तले डाकबंगला चौराहा पर एकत्र हुए और प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
एआईएसए और आरवाईए, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (भाकपा-माले) लिबरेशन के छात्र संगठन हैं, जबकि भीम आर्मी एक दलित अधिकार संगठन है।
एआईएफई के एक बयान के अनुसार, पुलिस के साथ मामूली झड़प के बाद कई प्रदर्शनकारियों को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया। हालांकि, एसडीपीओ (टाउन-2) के .एन. सिंह ने 'पीटीआई-भाषा' से बातचीत में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और बल प्रयोग के दावों से इनकार किया।
मौके पर मौजूद भाकपा (माले) लिबरेशन से विधान परिषद की सदस्य शशि यादव ने पत्रकारों से कहा, ''शैक्षणिक संस्थानों में भेदभाव अब भी व्यापक है। इसी को देखते हुए बड़ी संख्या में छात्र यूजीसी विनियम के समर्थन में यहां पहुंचे हैं।''
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद उच्चतम न्यायालय ने यूजीसी के (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा) विनियम, 2026 पर रोक लगा दी है।
उच्चतम न्यायालय ने 29 जनवरी को यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा) विनियमों पर रोक लगाई थी, जिन्हें 13 जनवरी को अधिसूचित किया गया था।
इन नियमों के तहत विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में समान अवसर केंद्र स्थापित करना तथा भेदभाव से संबंधित शिकायतों के समाधान और समावेशन को बढ़ावा देने के लिए एक समिति का गठन करना अनिवार्य किया गया था।
एआईएफई के बयान में कहा गया कि प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा) विनियमों को लागू करने के अलावा अनुसूचित जाति/जनजाति/अति पिछड़ा वर्ग/पिछड़ा वर्ग के लिए 65 प्रतिशत आरक्षण लागू करने तथा उच्च शिक्षा में जाति-आधारित भेदभाव से निपटने के लिए 'रोहित अधिनियम' बनाने की मांग भी की।
अन्य मांगों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को वापस लेने, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए आरक्षण समाप्त करने, कॉलेजियम प्रणाली खत्म करने तथा निजी क्षेत्र की नौकरियों और न्यायपालिका में आरक्षण लागू करने की मांग शामिल है।
भाषा कैलाश सुरभि
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