वांगचुक की हिरासत रद्द करने का फैसला स्वागत योग्य : लद्दाख के उपराज्यपाल
माधव
- 14 Mar 2026, 06:53 PM
- Updated: 06:53 PM
लेह, 14 मार्च (भाषा) लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने शनिवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत को रद्द करने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के लिए सकारात्मक कदम बताया।
हालांकि, सक्सेना ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में आंदोलन और हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है तथा लोगों की आकांक्षाओं एवं चिंताओं से जुड़े सभी मुद्दों को हितधारकों के साथ संवाद के जरिए सुलझाया जाएगा।
केंद्र ने शनिवार को कहा कि उसने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। उन्हें लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद करीब छह महीने पहले गिरफ्तार किया गया था, जिनमें चार लोगों की मौत हो गई थी।
वांगचुक को उसी दिन जोधपुर जेल से रिहा कर दिया गया, और उसके बाद से उन्हें वहां हिरासत में रखा गया है।
लोक भवन द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, सक्सेना ने केंद्र के इस कदम को "सकारात्मक कदम" बताया।
उन्होंने कहा, "लद्दाख हमेशा से ही देशभक्ति, राष्ट्रवाद और शांतिप्रिय स्वभाव के लिए विख्यात रहा है।"
शुक्रवार को लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के चौथे उपराज्यपाल के रूप में शपथ लेने वाले सक्सेना ने कहा कि सभी मुद्दों को संवाद और आपसी समझ के माध्यम से सौहार्दपूर्ण ढंग से हल किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, "लद्दाख में आंदोलन, बंद या हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। ऐसे कार्यों से सार्थक प्रगति नहीं होती। इसके बजाय, स्थायी समाधान प्राप्त करने के लिए सहयोग और शांतिपूर्ण बातचीत का मार्ग अपनाया जाना चाहिए।"
लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में इसे शामिल करने के लिए आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।
सक्सेना ने आशा व्यक्त की कि लद्दाख की जनता के निरंतर समर्थन और सहयोग से केंद्र शासित प्रदेश में स्थायी शांति और तेज गति से विकास होगा।
राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर केंद्र शासित प्रदेश में हिंसक प्रदर्शन शुरू होने के दो दिन बाद, 26 सितंबर, 2025 को वांगचुक को हिरासत में लिया गया था।
प्रदर्शनों में 22 पुलिसकर्मियों सहित 45 से अधिक लोग घायल हुए।
लेह के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर "जनव्यवस्था बनाए रखने" के लिए वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत हिरासत में लिया गया और बाद में जोधपुर जेल भेज दिया गया था।
भाषा
राखी माधव
माधव
1403 1853 लेह