भारत को सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण में निवेश करना चाहिए : वायुसेना प्रमुख चौधरी
सुभाष पवनेश
- 25 Jun 2024, 08:27 PM
- Updated: 08:27 PM
नयी दिल्ली, 25 जून (भाषा) वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वी आर चौधरी ने मंगलवार को कहा कि वर्तमान परिदृश्य सीमा विवादों और आतंकवाद से लेकर साइबर खतरों एवं क्षेत्रीय अस्थिरता तक ‘‘बहुआयामी चुनौतियां’’ पेश करता है तथा भारत को इस चुनौतीपूर्ण स्थिति से निकलने के लिए अपने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण में निवेश करना चाहिए।
वायुसेना प्रमुख ने यहां एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि आधुनिक युद्ध को त्वरित प्रौद्योगिकी उन्नयन, असमान्य खतरों के रूप में परिभाषित किया जा सकता है और भू-राजनीति, सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य को व्यापक रूप से समझने की जरूरत है।
विश्व के कुछ क्षेत्रों में टकराव के बीच उभरती भू-राजनीति की पृष्ठभूमि में उनकी यह टिप्पणी आई है।
संगोष्ठी का आयोजन भारतीय वायुसेना, कॉलेज ऑफ एयर वारफेयर (सीएडब्ल्यू) और सेंटर फॉर एयर पावर स्टडीज (सीएपीएस) द्वारा सुब्रतो पार्क स्थित वायुसेना सभागार में ‘तीसरे युद्ध एवं एयरोस्पेस रणनीति कार्यक्रम’ (डब्ल्यूएएसपी) के समापन के अवसर पर किया गया था।
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि इस ‘‘बहुआयामी परिदृश्य’’ के लिए ऐसे सैन्य कर्मियों की आवश्यकता है जो न केवल युद्ध कौशल से लैस हों, बल्कि अपने कार्यों के व्यापक निहितार्थों की गहरी समझ भी रखते हों।
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, मेरी राय में एक दक्ष योद्धा ऐसा सैन्य पेशेवर है जो वर्तमान समय में ‘‘जटिल होते जा रहे सुरक्षा माहौल’’ में बौद्धिक कौशल को युद्ध कौशल के साथ जोड़ता है।’’
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भारत के सामरिक सोच-विचार की जड़ें ईसा पूर्व चौथी सदी में लिखे गए (कौटिल्य के) अर्थशास्त्र जैसी प्राचीन रचनाओं तक जाती हैं।
वायुसेना प्रमुख ने इस बात पर जोर देने के लिए प्राचीन यूनानी इतिहासकार थ्यूसिडाइड के शब्दों का भी हवाला दिया, जिन्होंने कहा था, ‘‘जो समाज अपने विद्वानों को अपने योद्धाओं से अलग करता है, वहां सोच-विचार कायरों द्वारा और युद्ध मूर्खों द्वारा लड़ी जाएगी।’’
उन्होंने कहा कि भारत की सामरिक कार्यशैली ऐतिहासिक अनुभवों और ‘‘निरंतर विकसित हो रहे भू-राजनीतिक वातावरण’’ से आकार लेती है।
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि यह सामरिक स्वायत्ता, सावधानी और एक मजबूत क्षेत्रीय अखंडता पर जोर देती है।
उन्होंने कहा, ‘‘वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य सीमा विवाद और आतंकवाद से लेकर साइबर खतरों और क्षेत्रीय अस्थिरता तक बहुआयामी चुनौतियां प्रस्तुत करता है। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति से निपटने और अपने राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करने के लिए, भारत को अपने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण में निवेश और सामरिक साझेदारी को मजबूत करना चाहिए। साथ ही, स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना चाहिए और आंतरिक एवं बाहरी सुरक्षा, दोनों के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।’’
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