जम्मू-कश्मीर में पर्यावरण संरक्षण के मामले में विफल रही है उमर अब्दुल्ला की सरकार : भाजपा
सुरेश
- 24 Feb 2026, 08:34 PM
- Updated: 08:34 PM
श्रीनगर, 24 फरवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जम्मू-कश्मीर इकाई ने गुलमर्ग में कृत्रिम बर्फ का मैदान बनाने की मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की योजना की कड़ी आलोचना की है।
भाजपा ने कहा कि प्रदेश सरकार पर्यावरण के संरक्षण के मामले में पूरी तरह से विफल रही है।
भाजपा प्रवक्ता अभिजीत जसरोटिया ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि पर्यावरण संरक्षण के मामले में जम्मू-कश्मीर सरकार 'पूर्ण रूप से निष्क्रिय' रही है।
उन्होंने कहा कि कश्मीर में तापमान खतरनाक गति से बढ़ रहा है।
जसरोटिया ने कहा, ''ऐसे समय में जब हमें व्यापक रूप से हरियाली और वन संरक्षण की आवश्यकता है, मुख्यमंत्री कृत्रिम बर्फ और कृत्रिम शीतलन की बात कर रहे हैं। ये दिखावटी उपाय हैं और खेल प्रेमियों तथा नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए संभावित रूप से बेहद खतरनाक हैं।''
अब्दुल्ला ने गुलमर्ग में पर्यटन को बढ़ावा देने और इसे शीतकालीन खेलों के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए सोमवार को कृत्रिम बर्फ लगाने की वकालत की।
भाजपा ने हालांकि आरोप लगाया कि पिछले डेढ़ वर्षों के दौरान उमर अब्दुल्ला सरकार क्षेत्र के हरित आवरण की रक्षा करने में 'विफल' रही है।
उन्होंने कहा, ''विकास के नाम पर पेड़ काटे जा रहे हैं, लेकिन जो नष्ट हो रहा है उन्हें बहाल करने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। हम धीरे-धीरे अपनी प्राकृतिक शीतलन प्रणाली को खो रहे हैं।''
उन्होंने सरकार पर स्पष्ट जलवायु कार्रवाई रणनीति का अभाव होने और 'पर्यावरण संरक्षण की तुलना में जनसंपर्क गतिविधियों' को प्राथमिकता देने का आरोप भी लगाया।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि अनियंत्रित शहरी विस्तार, सड़क चौड़ीकरण परियोजनाएं और बागों का घटता क्षेत्रफल पारिस्थितिक असंतुलन में योगदान दे रहा है।
उन्होंने कहा, ''कश्मीर के जंगलों और आर्द्रभूमि की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाने के बजाय, सरकार सत्ता में बने रहने से संतुष्ट दिखती है।''
जसरोटिया ने बड़े पैमाने पर जनभागीदारी का आह्वान करते हुए एक प्रतीकात्मक वृक्षारोपण अभियान का प्रस्ताव भी रखा।
भाजपा नेता ने कहा, ''ईद के अवसर पर प्रत्येक बच्चे को ईदी के रूप में चिनार का पौधा मिलना चाहिए और उसे लगाना चाहिए। इससे हमारी विरासत को संरक्षित करने और हमारे भविष्य को सुरक्षित करने का सशक्त संदेश मिलेगा।''
भाषा रवि कांत सुरेश
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