लड़ाई आसान नहीं होगी, लंबे आंदोलन के लिए तैयार रहें : कॉजपा
Daily world
- 07 Oct 2026, 04:29 PM
- Updated: 04:29 PM
नयी दिल्ली, सात अक्टूबर (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) एवं छात्र संगठनों ने बुधवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एकजुट होकर आंदोलन का आह्वान किया। उन्होंने 10 अक्टूबर को होने वाले प्रदर्शन से पहले कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक चुनावी व्यवस्था में व्यापक सुधार नहीं किया जाता।
यहां आयोजित संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में इन संगठनों ने निर्वाचन आयोग (ईसी) के खिलाफ अपने अभियान को व्यापक राजनीतिक आधार देने की कोशिश की। उन्होंने विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन के सांसदों द्वारा छह अक्टूबर को निकाले गए विरोध मार्च का समर्थन किया और इस टकराव को लोकतंत्र की रक्षा करने वालों और भाजपा के बीच का संघर्ष बताया।
जुलाई में नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर कॉजपा के नेतृत्व में हुए आंदोलन के कारण धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अब यह समूह 10 अक्टूबर से पहले निर्वाचन आयोग के खिलाफ तेज हो रहे प्रदर्शनों के बीच कुमार के खिलाफ सड़क पर दबाव बनाए रखना चाहता है।
बुधवार के संवाददाता सम्मेलन में कॉजपा, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) और स्टूडेंट्स फेडरेशन आफ इंडिया (एसएफआई) के प्रतिनिधि शामिल हुए। आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई एसोसिएशन ऑफ स्टूडेंट्स फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिक्स (एएसएपी) ने भी इसमें हिस्सा लिया।
कॉजपा के सह-संयोजक सौरव दास ने देशभर के लोगों से दिल्ली आने और लंबे समय तक चलने वाले आंदोलन के लिए तैयार रहने की अपील की।
उन्होंने कहा, ''यह लड़ाई आसान नहीं होगी। मैं देशभर के सभी लोगों से हमारे साथ जुड़ने और ट्रेन तथा विमान के टिकट बुक करने की अपील करता हूं।''
दास ने कहा कि अगर कुमार इस्तीफा भी दे देते हैं, तब भी प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटेंगे, क्योंकि चुनावी व्यवस्था को दुरुस्त करने की जरूरत है । उन्होंने कहा कि भाजपा जिस प्रकार का इसका विरोध कर रही है, वह उसके ''अनंत काल तक सत्ता में बने रहने की लालसा'' को दर्शाता है।
दास द्वारा रखी गई मांगों में कुमार का इस्तीफा और उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करना; मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर रोक लगाना, आगामी चुनावों को स्थगित करना, जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करना और स्वतंत्र जांच का आदेश देना; तथा निर्वाचन आयोग में नियुक्तियों से संबंधित 2023 के कानून को निरस्त कर स्वतंत्र और विश्वसनीय चयन प्रक्रिया स्थापित करना शामिल है।
आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा ने कहा कि छात्रों के नेतृत्व में चलाए जा रहे आंदोलन और विपक्षी दलों के प्रदर्शनों के बीच कोई विभाजन नहीं है।
उन्होंने कहा कि आम लोग, नागरिक समाज, विपक्षी दल और छात्र संगठन एक तरफ हैं, जबकि निर्वाचन आयोग (ईसी) और भाजपा दूसरी तरफ हैं।
बोरा ने कहा, ''कोई विभाजन नहीं है। हम, भारत के लोग, बनाम भाजपा। अगर हम एकजुट होकर यह लड़ाई लड़ते हैं, तो इसे प्रभावी ढंग से लड़ पाएंगे।''
कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मंगलवार को निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश करने वाले 'इंडिया' गठबंधन के सांसदों का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे लोगों के मुद्दों को उठाने और उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए सड़कों पर उतरें।
उन्होंने कहा, ''इंडिया गठबंधन के सांसदों ने यही किया,'' और कहा कि कॉजपा तथा विपक्षी दलों के छात्र संगठन 10 अक्टूबर के प्रदर्शन को मजबूती देंगे।
भाजपा खेमे में शामिल लोगों से लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे लोगों के साथ जुड़ने की अपील करते हुये बोरा ने कहा, ''यह भाजपा छोड़ने का सबसे सही अवसर है।''
एकजुटता का यह प्रदर्शन कॉजपा और कांग्रेस के साथ जुड़े कुछ वर्गों के बीच ऑनलाइन तकरार के कुछ दिन बाद सामने आया है।
दास ने कहा कि राजनीतिक संबद्धताओं और विचारधाराओं से परे सभी प्रतिभागी एक ''टूटी हुई व्यवस्था'' को बदलने की व्यापक लड़ाई में एकजुट हैं।
यह पूछे जाने पर कि क्या आयोजक प्रदर्शन के लिए अनुमति लेंगे, दास ने कहा कि उन्होंने बुधवार को संसद मार्ग थाने में औपचारिक सूचना दी है और आवश्यक लिखित आश्वासन भी दिए हैं।
उन्होंने कहा, ''कृपया 'अनुमति' शब्द का इस्तेमाल न करें। हमें अनुमति देने वाली दिल्ली पुलिस कौन होती है?'' उन्होंने कहा कि सूचना देना ही पर्याप्त है।
उन्होंने कहा, ''हम दिल्ली पुलिस के साथ सहयोग करेंगे और हमें उम्मीद है कि दिल्ली पुलिस भी हमारे साथ सहयोग करेगी।''
एसएफआई के आदर्श शाजी ने कुमार पर भारतीय लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया और इस टकराव को ''लोकतंत्र और निरंकुशता'' के बीच की लड़ाई बताया।