न्यायालय ने कोयला आधारित उद्योगों को एनसीआर से बाहर भेजने के प्रस्ताव पर केंद्र से जवाब मांगा
माधव
- 23 Feb 2026, 08:30 PM
- Updated: 08:30 PM
नयी दिल्ली, 23 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बेहतर वायु गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली-एनसीआर से सभी कोयला-आधारित उद्योगों को स्थानांतरित करने के प्रस्ताव पर सोमवार को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा ऊर्जा और पेट्रोलियम मंत्रालयों से जवाब मांगा।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु गुणवत्ता की समस्या से निपटने के लिए, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह तय किया कि वह इस सिलसिले में दिये गए सुझावों पर विचार करेगी।
ये सुझाव सौंपे गए हैं कि कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र से होने वाले उत्सर्जन को ध्यान में रखते हुए कोयला आधारित कोई भी नया उद्योग दिल्ली के 300 किलोमीटर के दायरे में स्थापित नहीं किये जा सकते हैं।
पीठ ने कहा कि वह वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के सुझावों के आधार पर, वाहनों से होने वाले प्रदूषण के मुद्दे पर 12 मार्च को विचार करेगी।
प्रधान न्यायाधीश ने आदेश में कहा, ''यह देखा जा सकता है कि अनेक प्रकार के सुझाव देते हुए, सीएक्यूएम ने उन संबंधित एजेंसियों की भी पहचान की है जिनसे इन सुझावों को लागू करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की अपेक्षा की जाती है।''
उन्होंने कहा, ''इसलिए हम निर्देश देते हैं कि दिल्ली सरकार और उसकी सभी एजेंसियां सीएक्यूएम द्वारा सुझाए गए दीर्घकालिक समाधानों को लागू करने के लिए एक प्रस्तावित कार्य योजना प्रस्तुत करे।'
आदेश के अनुसार, ''ताप विद्युत संयंत्रों के संबंध में, हम केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा ऊर्जा मंत्रालयों को एक प्रस्ताव सौंपने का निर्देश देना उपयुक्त समझते हैं।''
दिल्ली-एनसीआर से सभी कोयला आधारित उद्योगों को स्थानांतरित करने के मुद्दे पर, न्यायालय ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय से भी जवाब मांगा।
आदेश में कहा गया है कि प्रस्ताव में सबसे पहले उद्योगों की पहचान की जानी चाहिए और उनके लिए वैकल्पिक ईंधन स्रोतों का पता लगाया जाना चाहिए।
अदालत ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान को एनसीआर में कोयला-आधारित उद्योगों समेत हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगने के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
न्यायालय ने कहा, ''ये नोटिस इस न्यायालय द्वारा तामील कर लिये गए माने जाएंगे। सभी राज्यों द्वारा अपनाई गई कार्रवाई योजना में इस संबंध में दिए गए नोटिस का पूर्ण विवरण होना चाहिए। नोटिस में यह उल्लेख होना चाहिए कि वे इस न्यायालय के निर्देशों के अनुसार जारी किए गए हैं। प्रस्तावित स्थानांतरण पर आपत्तियां प्रस्तुत की जा सकती हैं।''
पीठ ने मामले की सुनवाई के लिए 12 मार्च की तारीख तय की और वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सीएक्यूएम द्वारा दिए गए सुझावों पर विभिन्न हितधारकों से निर्धारित तिथि तक या उससे पहले वस्तु स्थिति रिपोर्ट मांगी है।
वाहनों के आवागमन से निपटने के लिए दीर्घकालिक उपायों के मुद्दे पर पीठ ने कहा, ''हम यह बताना उचित समझते हैं कि सीएक्यूएम द्वारा अन्य दीर्घकालिक समाधानों के सुझाव दिये गए हैं, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना है।''
भाषा सुभाष माधव
माधव
2302 2030 दिल्ली