दिल्ली के हर भू-खंड को मिलेगा 14 अंकों का विशिष्ट पहचान नंबर, सीमा विवाद होंगे समाप्त: सीएमओ
धीरज
- 15 Feb 2026, 04:26 PM
- Updated: 04:26 PM
नयी दिल्ली, 15 फरवरी (भाषा) दिल्ली सरकार ने शहर में हर भू-खंड को एक विशिष्ट 14 अंकों की पहचान संख्या देने के लिए 'भू-आधार' कार्ड जारी करने की पहल की है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को कहा कि इस कदम का उद्देश्य जमीन की सीमाओं से जुड़े विवादों को खत्म करना है।
उन्होंने बताया कि ड्रोन सर्वे और 'हाई-रिजॉल्यूशन इमेजिंग' के जरिए दिल्ली का नया डिजिटल भूमि मानचित्र तैयार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 'भू-आधार' प्रधानमंत्री के 'डिजिटल इंडिया' दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक "क्रांतिकारी कदम" है।
यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (यूएलपीआईएन) को 'भू-आधार' नाम दिया गया है। वर्ष 2021 में केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) के तहत इसे शुरू किया गया था।
दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ)द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह कदम दिल्ली के भूमि अभिलेखों को आधुनिक बनाने और लोगों को लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवादों से राहत दिलाने के प्रयास का हिस्सा है।
सीएमओ के अनुसार यूएलपीआईएन के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राजस्व विभाग की आईटी शाखा को सौंपी गई है, जिसे भारतीय सर्वेक्षण विभाग का सहयोग मिलेगा।
बयान में कहा गया है कि स्वामित्व योजना के तहत पहले से शामिल 48 गांवों समेत दिल्ली के सभी क्षेत्रों के लिए सटीक यूएलपीआईएन तैयार करने को लेकर भारतीय सर्वेक्षण विभाग से लगभग दो टेराबाइट उच्च गुणवत्ता वाले ''जियोस्पेशियल डेटा और ड्रोन आधारित ऑर्थो रेक्टिफाइड इमेज'' (ओआरआई) प्राप्त की जा रही हैं।
बयान के अनुसार इस परियोजना के लिए पहले 1.32 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे और वित्तीय प्रबंधन आईटी शाखा कर रही है।
बयान में कहा गया है कि अब सरकार एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और तय समयसीमा के तहत चरणबद्ध तरीके से पूरे दिल्ली में इस प्रणाली का विस्तार करेगी।
बयान के अनुसार पश्चिमी दिल्ली जिले के तिलंगपुर कोटला गांव में एक प्रायोगिक परियोजना पहले ही पूरी की जा चुकी है, जहां 274 यूएलपीआईएन रिकॉर्ड सफलतापूर्वक तैयार किए गए हैं।
सीएमओ के अनुसार, 'भू-आधार' प्रणाली से भूमि स्वामित्व में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
सीएमओ ने कहा कि चौदह अंकों का यह कोड भू-संदर्भित (जियो-रेफरेंस्ड) होगा, जिससे जमीन की सीमाओं को लेकर विवाद कम होंगे।
सीएमओ के अनुसार इससे विभिन्न सरकारी विभागों के बीच भूमि संबंधी आंकड़ों को लेकर समन्वय आसान होगा और फर्जी लेन-देन तथा एक ही जमीन के कई बार पंजीकरण जैसी समस्याओं पर प्रभावी रूप से रोक लगेगी।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि इस कदम से लोगों को सुविधा मिलेगी और अब जमीन के स्वामित्व को साबित करने के लिए कई दस्तावेजों की जरूरत नहीं होगी, बल्कि एक ही नंबर से संपत्ति की पूरी जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।
भाषा जोहेब धीरज
धीरज
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