शिवाजी-टीपू सुल्तान टिप्पणी विवाद: पुणे में भाजपा का प्रदर्शन, कांग्रेस ने पथराव का आरोप लगाया
पारुल
- 15 Feb 2026, 04:14 PM
- Updated: 04:14 PM
मुंबई/पुणे, 15 फरवरी (भाषा) टीपू सुल्तान को छत्रपति शिवाजी महाराज के "समकक्ष" बताने वाली कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल की टिप्पणी के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं ने रविवार को पुणे में विपक्षी दल के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।
वहीं, कांग्रेस ने विरोध-प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेताओं पर उसके कार्यकर्ताओं पर पथराव करने का आरोप लगाया।
महाराष्ट्र में सियासी विवाद खड़ा कर देने वाली सपकाल की टिप्पणियों की निंदा करते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस भवन के बाहर प्रदर्शन किया, जिसके मद्देनजर इलाके में भारी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।
मालेगांव महानगरपालिका की उप-महापौर शान-ए-हिंद निहाल अहमद के कार्यालय में टीपू सुल्तान का चित्र लगाए जाने को लेकर शनिवार को विवाद हो गया था। शिवसेना पार्षदों और हिंदू संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता और 'स्वराज' के विचार को पेश करने के टीपू सुल्तान के तरीके का जिक्र करते हुए अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध के उनके आह्वान का उदाहरण दिया था और दावा किया था कि यह लड़ाई शिवाजी महाराज के आदर्श की तर्ज पर थी।
इससे पहले दिन में कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के नेता सचिन सावंत ने भाजपा पर "दोहरे मापदंड" अपनाने और ध्रुवीकरण का एजेंडा चलाने का आरोप लगाया।
एक बयान में कांग्रेस नेता ने कई उदाहरणों का हवाला देते हुए दावा किया कि भाजपा नेताओं ने पहले सार्वजनिक जगहों और आधिकारिक मंचों पर 18वीं शताब्दी के मैसूर शासक टीपू सुल्तान की प्रशंसा की थी।
भाजपा पर "दोहरे मापदंड" अपनाने का आरोप लगाते हुए सावंत ने कहा कि 2012 में पार्टी ने अकोला महानगरपालिका में एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें पूर्व महापौर और भाजपा के अकोला चुनाव प्रभारी विजय अग्रवाल ने स्थायी समिति हॉल का नाम 'शहीद-ए-वतन शेर-ए-मैसूर टीपू सुल्तान' रखने की बात कही थी।
सावंत ने अकोला और मुंबई के नगर निकायों में पारित प्रस्तावों के साथ-साथ पूर्व के उन उदाहरणों का हवाला दिया, जहां भाजपा नेताओं ने कथित तौर पर टीपू सुल्तान की प्रशंसा की थी और उनसे जुड़ाव दर्शाया था। उन्होंने कहा कि पार्टी का वर्तमान विरोध राजनीति से प्रेरित है।
भाजपा नेताओं ने सपकाल की टिप्पणियों की निंदा करते हुए पुणे में प्रदर्शन किया।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि कांग्रेस भवन के बाहर प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने पथराव किया, जिसमें उसके दो कार्यकर्ता घायल हो गए।
कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के उपाध्यक्ष मोहन जोशी ने 'पीटीआई-भाषा' से बातचीत में कहा कि नव निर्वाचित महापौर मंजुषा नागपुरे सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस भवन के बाहर प्रदर्शन के लिए एकत्रित हुए।
उन्होंने कहा, "प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पत्थर फेंके गए, जिससे दो कार्यकर्ता घायल हो गए। हम इस घटना के सिलसिले में कार्रवाई की मांग को लेकर शिवाजीनगर थाने के बाहर धरना दे रहे हैं।"
पुलिस उपायुक्त (जोन एक) कृषिकेश रावले ने कहा कि पुलिस ने टकराव को रोकने के लिए हस्तक्षेप किया।
भाजपा की पुणे इकाई के अध्यक्ष धीरज घाटे ने हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में पर्वती थाने में सपकाल के खिलाफ शिकायत की, जिसके आधार पर एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।
टीपू सुल्तान इतिहास की एक विवादास्पद हस्ती हैं। जहां एक वर्ग अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में उनकी वीरता की तारीफ करता है। वहीं, दूसरा वर्ग दक्षिण भारत के कई हिस्सों में हिंदुओं के साथ "दुर्व्यवहार" के लिए उनकी आलोचना करता है। इसके विपरीत, छत्रपति शिवाजी महाराज को उनकी सैन्य प्रतिभा के साथ-साथ परोपकार और सामाजिक कल्याण पर आधारित प्रशासनिक कौशल के लिए व्यापक रूप से सराहा जाता है।
सावंत ने अपने बयान में दावा किया कि भाजपा पहले टीपू सुल्तान की प्रशंसा करती थी, लेकिन अब ध्रुवीकरण के अपने एजेंडे के तहत उन्हें बुरा बताती है।
उन्होंने कहा, "इस पाखंड को क्या नाम दिया जाए? टीपू सुल्तान भगवान राम के नाम वाली अंगूठी पहनते थे।"
सावंत ने आरोप लगाया कि भाजपा धार्मिक विभाजन पैदा करने की रणनीति के तहत टीपू सुल्तान को नकारात्मक रूप में पेश कर रही है, जबकि पहले पार्टी नेताओं ने उनकी प्रशंसा की थी।
कांग्रेस नेता ने सत्तारूढ़ पार्टी पर "धर्म की विकृत राजनीति" में लिप्त होने और मतदाताओं के ध्रुवीकरण का प्रयास करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने इस मुद्दे पर भाजपा के रुख को लेकर पार्टी का मत दोहराया।
सावंत ने भाजपा पर "दोहरे मापदंड" अपनाने और ध्रुवीकरण का एजेंडा चलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि 2012 में भाजपा ने अकोला महानगरपालिका में एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें स्थायी समिति हॉल का नाम 'शहीद-ए-वतन शेर-ए-मैसूर टीपू सुल्तान' रखने की बात कही गई थी।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा नेता एवं कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने टीपू सुल्तान के मकबरे का दौरा किया था और आगंतुक पुस्तिका में उनकी प्रशंसा में अपने विचार लिखे थे।
कांग्रेस नेता ने कहा कि 2017 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी कर्नाटक विधानसभा में टीपू सुल्तान की प्रशंसा की थी।
भाषा सुरभि पारुल
पारुल
1502 1614 मुंबई