प्रधानमंत्री ने दबाव में अमेरिका से व्यापार समझौता किया, यह किसानों के साथ विश्वासघात है: विपक्ष
वैभव
- 03 Feb 2026, 06:12 PM
- Updated: 06:12 PM
नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) विपक्षी दलों ने मंगलवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दबाव में आकर अमेरिका के साथ व्यापार समझौता किया तथा इसमें भारत के करोड़ों किसानों के साथ विश्चासघात किया गया है।
उनका यह भी कहना है कि इस समझौते के विवरण को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं जिसके तहत वाशिंगटन भारतीय उत्पादों पर शुल्क को कुल 50 प्रतिशत से कम करके 18 प्रतिशत करेगा।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, ''नरेन्द्र मोदी घबराए हुए हैं। जो व्यापार समझौता चार महीने से रुका हुआ था, उसमें कुछ बदला नहीं और कल शाम उस पर हस्ताक्षर कर दिया गया। इसके पीछे क्या कारण है, वो मैं जानता हूं और नरेन्द्र मोदी जानते हैं।''
उन्होंने दावा किया, ''मोदी जी पर भयंकर दबाव है। उनकी छवि का जो गुब्बारा है, जिसे हजारों करोड़ रुपए खर्च कर बनाया गया था, वो फूट सकता है। असल में समस्या (पूर्व सेना प्रमुख एम एम) नरवणे जी का बयान नहीं है, ये तो 'साइड शो' है। बड़ी बात यह है कि भारत के प्रधानमंत्री 'कंप्रोमाइज्ड' हो चुके हैं।''
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया, ''हिंदुस्तान के किसानों को यह समझना चाहिए कि इस समझौते में आपकी मेहनत और खून-पसीने को नरेन्द्र मोदी जी ने बेच दिया है क्योंकि वह कंप्रोमाइज्ड हैं। उन्होंने सिर्फ आपको नहीं, देश को बेच दिया है।''
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने राहुल गांधी द्वारा उठाए गए मुद्दे से ''ध्यान भटकाने वाली हेडलाइन'' बनाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्यापार समझौते की घोषणा का अनुरोध किया।
रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''देर रात अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में राष्ट्रपति ट्रंप ने लिखा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा की जा रही है और यह प्रधानमंत्री मोदी के अनुरोध पर तुरंत प्रभाव से लागू हो रहा है। यह अनुरोध निश्चित रूप से ध्यान भटकाने वाली हेडलाइन बनाने के लिए किया गया था, क्योंकि सोमवार दोपहर लोकसभा में राहुल गांधी ने चीन के सामने उनकी कायरता और आत्मसमर्पण को बेनकाब कर दिया था।''
उन्होंने दावा किया, ''अगर प्रधानमंत्री मोदी सोचते हैं कि इस तरह वह विमर्श के रुख को मोड़ सकते हैं, तो वह पूरी तरह गलत हैं, क्योंकि न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ उनका विश्वासघात सामने आ चुका है, बल्कि भारत के किसान भी अब उनके दोहरे चरित्र और अपने हितों को बेचने की उनकी इच्छा को समझ रहे हैं।''
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने दावा किया कि इस समझौते के पीछे कोई न कोई गुप्त एजेंडा जरूर है क्योंकि अमेरिका कभी ऐसा समझौता नहीं करता जिसमें उसे घाटा हो।
उनका कहना था, ''अमेरिका बहुत शातिर व्यापारी है। वह कभी भी ऐसा कुछ नहीं करेगा जो उसके हितों के खिलाफ हो या उसे कोई नुकसान हो, इसलिए इस समझौते में जरूर कोई छिपा हुआ एजेंडा होगा... सब कुछ गुप्त है।''
शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने आरोप लगाया कि गौतम अदाणी को अमेरिका में मुकदमे से बचाने के लिए व्यापार समझौता किया गया है।
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि यह समझौता किसानों के साथ विश्वासघात है।
उन्होंने आरोप लगाया, ''मोदी सरकार ने किसानों की पीठ और पेट में छुरा घोंपा है...हम इस समझौते का सड़क से लेकर सदन तक पुरजोर विरोध करेंगे।''
द्रमुक सांसद कनिमोई ने व्यापार समझौते को लेकर कहा, ''इस पर बिल्कुल भी स्पष्टता नहीं है. संसद का सत्र चल रहा है, अभी तक वहां कोई बयान नहीं दिया गया है, जबकि अमेरिका की ओर से यह घोषणा आयी है। अमेरिकी राष्ट्रपति के बोलने के बाद ही प्रधानमंत्री ने प्रतिक्रिया दी।''
उन्होंने कहा, ''हमें विवरण जानने की जरूरत है, खासकर यह जानना जरूरी है कि क्या भारतीय कृषि और किसान सुरक्षित हैं। यह अस्वीकार्य है कि संसद को सूचित किए बिना विदेश में किसी सौदे की घोषणा की जाती है।''
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो ने एक बयान में दावा किया कि यह असंतुलित समझौता है जिसमें भारत के हितों की अनेदखी हुई है।
उसने कहा, ''यह महत्वपूर्ण है कि सरकार व्यापार समझौते का विवरण संसद और सार्वजनिक पटल पर रखे, ताकि गहन चर्चा हो सके। भारतीय उद्योग, कृषि और कामकाजी लोगों के हितों की रक्षा के लिए किसी भी हानिकारक प्रावधान को रद्द किया जाना चाहिए।''
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