ममता सीईसी के साथ बैठक बीच में छोड़कर चली गईं, अपमानित किए जाने का लगाया आरोप
दिलीप
- 02 Feb 2026, 08:39 PM
- Updated: 08:39 PM
(फोटो सहित)
नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एसआईआर मुद्दे पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के साथ सोमवार को बैठक बीच में ही छोड़कर बाहर निकल गईं। बनर्जी ने निर्वाचन आयोग के अधिकारियों पर ''अहंकारी'' होने और उनके प्रतिनिधिमंडल को "अपमानित" करने का आरोप लगाया।
पार्टी के अनुसार, "विरोध" के प्रतीक के रूप में काले शॉल ओढ़े हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सुप्रीमो ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और सांसद कल्याण बनर्जी के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के "एसआईआर प्रभावित परिवारों" के 12 सदस्यों के साथ यहां मुख्य निर्वाचन आयुक्त कुमार और अन्य निर्वाचन आयुक्तों से मुलाकात की।
बनर्जी ने बाद में कहा कि उन्होंने विरोध में बैठक का "बहिष्कार" किया, जबकि निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने दावा किया कि वह अपने द्वारा उठाए गए मुद्दों पर निर्वाचन आयोग के शीर्ष अधिकारियों की प्रतिक्रिया सुने बिना ही गुस्से में बैठक से चली गईं। बनर्जी चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रोकने की मांग कर रही हैं।
अधिकारियों के अनुसार, सीईसी ने तृणमूल कांग्रेस के नेताओं से कहा कि "कानून का शासन सर्वोपरि रहेगा" और कानून को अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ कानून के प्रावधानों और निर्वाचन आयोग की शक्तियों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निर्वाचन आयोग के मुख्यालय से बाहर आने के बाद मीडिया से बात करते हुए, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने आयोग के खिलाफ एक बार फिर तीखा हमला बोलते हुए उस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के "दलाल" के रूप में काम करने का आरोप लगाया।
बनर्जी ने आरोप लगाया, "इतने सारे लोग मारे गए, इसके लिए कौन जिम्मेदार है? निर्वाचन आयोग जिम्मेदार है। वे भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं।"
मुख्यमंत्री ने कहा, "उन्होंने हमारे साथ बहुत बुरा बर्ताव किया। मैंने कहा कि हमें अफसोस है, हम न्याय के लिए यहां आए थे; हमें न्याय नहीं मिला, और आप झूठ बोल रहे हैं। वह बहुत बड़ा झूठा है...।"
उन्होंने आरोप लगाया, ''हमने कहा कि हम ज़मीनी स्तर पर इसका मुकाबला करेंगे। आपके पास भाजपा की ताकत है, हमारे पास जनता की ताकत है। हमने बैठक का बहिष्कार किया और बाहर आ गए। उन्होंने हमारा अपमान किया, हमें बेइज्जत किया... मैंने इस तरह का निर्वाचन आयोग पहले कभी नहीं देखा; वे बहुत अहंकारी हैं... वे ऐसे बात करते हैं जैसे वे जमींदार हों और हम नौकर हों।''
हालांकि, निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने कहा कि टीएमसी नेताओं की बात धैर्यपूर्वक सुनी गई।
अधिकारियों ने बताया कि पहले टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने अपनी बात रखी, इसके बाद ममता बनर्जी ने बात की। उन्होंने कहा कि टीएमसी नेताओं द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं को सीईसी कुमार और निर्वाचन आयुक्त एस. एस. संधू तथा विवेक जोशी ने नोट किया।
एक अधिकारी ने कहा, "जब सीईसी ने जवाब देना शुरू किया, तो टीएमसी नेताओं ने कई बार बीच में हस्तक्षेप किया। ममता बनर्जी नाराज थीं और गुस्से में बैठक छोड़कर चली गईं।"
अधिकारी के अनुसार, सीईसी ने स्पष्ट किया कि "कानून का शासन कायम रहेगा" और कानून अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ आयोग की शक्तियों और कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारी ने बताया कि सीईसी कुमार ने टीएमसी नेताओं से कहा कि पार्टी के विधायक आयोग और विशेष रूप से मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ खुले तौर पर अपमानजनक व धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं।
कुमार ने टीएमसी नेताओं को बताया कि टीएमसी कार्यकर्ताओं और विधायकों द्वारा निर्वाचन अधिकारियों के काम में व्यवधान पैदा किया जा रहा है।
एक अधिकारी ने कहा, "सीईसी ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि एसआईआर में लगे अधिकारियों पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए और न ही उनके काम में बाधा या हस्तक्षेप किया जाना चाहिए। बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) को देय मानदेय बिना किसी देरी के समय पर जारी किया जाना चाहिए।"
सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण से प्रभावित लगभग 100 लोगों को राष्ट्रीय राजधानी लाया गया है।
उन्होंने कहा कि इनमें वे लोग शामिल हैं, जिन्हें गलत तरीके से मृत घोषित कर दिया गया और उन लोगों के परिजनों के सदस्य भी शामिल हैं, जिनकी कथित तौर पर ''एसआईआर के कारण'' मृत्यु हो गई।
पिछले हफ्ते, मुख्य निर्वाचन आयुक्त कुमार ने बनर्जी को सोमवार को मुलाकात के लिए समय दिया था। टीएमसी प्रमुख और उनकी पार्टी ने एसआईआर प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया है और इस प्रक्रिया को रद्द करने की मांग करते हुए उच्चतम न्यायालय का भी रुख किया है।
भाषा आशीष दिलीप
दिलीप
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