लालकिला विस्फोट: आरोपी राथर को पकड़ने के लिए इंटरपोल से मांगी जा सकती है मदद
प्रशांत
- 25 Jan 2026, 05:51 PM
- Updated: 05:51 PM
(सुमीर कौल)
नयी दिल्ली/श्रीनगर, 25 जनवरी (भाषा) दिल्ली में लाल किले के नजदीक 10 नवंबर को हुए विस्फोट मामले में संलिप्त सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल के सदस्य डॉ. मुजफ्फर राथर को पकड़ने के लिए जल्द ही इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया जा सकता है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि यह पहल अफगानिस्तान से महत्वपूर्ण साजो समान सहायता और धन मुहैया कराने वाले सह-साजिशकर्ता के रूप में राथर का नाम सामने आने के बाद की जा रही है।
राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण(एनआईए) के मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत पेशे से बाल रोग विशेषज्ञ और दक्षिण कश्मीर के निवासी राथर को पहले ही भगोड़ा अपराधी घोषित कर चुकी है।
अधिकारियों ने बताया कि राथर के खिलाफ इंटरपोल का नोटिस जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने बताया कि राथर ने लाल किले के बाहर विस्फोट करने वाले डॉ. उमर-उन-नबी को साजो सामान, वित्तपोषण, संचार और योजना बनाने में मदद की थी। इस धमाके में कम से कम 12 लोगों की मौत हुई थी।
अधिकारियों ने दावा किया कि राथर एक प्रमुख सह-साजिशकर्ता के रूप में सामने आया है, जिसने कथित तौर पर भारत से भागने के बाद विदेश से हमले की योजना बनाई थी।
उन्होंने बताया कि जांचकर्ताओं ने साजो समान, कूट संवाद और कट्टरपंथी बनाने के प्रयासों का पता लगाया है जिनके तार सीधे अफगानिस्तान में सुरक्षित ठिकानों से जुड़ते हैं, जहां राथर के वर्तमान में छिपे होने का संदेह है।
अधिकारियों ने बताया कि उमर ने राथर और अफगानिस्तान स्थित सहयोगियों के समर्थन से आत्मघाती हमला किया, जिन्होंने साजो समान, संचार, धन और योजना उपलब्ध कराई।
उन्होंने दावा किया कि राथर ने विशेष रूप से संपर्क और वित्तपोषण में अहम भूमिका निभाई।
अधिकारियों ने कहा कि राथर लगातार आतंकवादियों के संपर्क में था और बम बनाने और परिचालन रणनीति से संबंधित जानकारी के लिए अफगानिस्तान स्थित संचालकों के साथ उनके संवाद की सहूलियत मुहैया कराई।
उन्होंने बताया कि राथर पिछले साल दिल्ली विस्फोट से कुछ समय पहले अगस्त के मध्य में भारत से गया था। उसने पहले दुबई की यात्रा की और बाद में अफगानिस्तान गया, जहां वह वर्तमान में छिपा हुआ है।
अधिकारियों ने बताया कि सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल के सदस्य होने के आरोप में गिरफ्तार अन्य आरोपियों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि राथर ने कथित तौर पर आतंकी मॉड्यूल के लिए धन जुटाने में सहायता की और स्वयं करीब छह लाख रुपये का योगदान दिया।
अधिकारियों ने बताया कि राथर 2021 में डॉ. मुज़म्मिल अहमद गनई और उमर के साथ तुर्किये की यात्रा पर गया था और इसका मुख्य उद्देश्य बाहरी आकाओं के साथ संपर्क स्थापित करना या अफगानिस्तान की ओर पारगमन का प्रयास करना था।
उन्होंने बताया कि राथर हालांकि उस समय अफगानिस्तान में दाखिल नहीं हुआ परंतु यह यात्रा उनके कट्टरपंथी विचारों को आगे बढ़ाने और तैयारी नेटवर्क गतिविधियों का हिस्सा थीं।
यात्रा के बाद, राथर, उमर और फरीदाबाद के अल फलाह विश्वविद्यालय में शिक्षक पद पर तैनात रहे गनई ने खुले बाजार से भारी मात्रा में रसायन जमा करना शुरू किया। उन्होंने 360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर जमा किये, जिनमें से अधिकांश को विश्वविद्यालय परिसर के पास संग्रहीत किया गया था।
आतंकी साजिश तब नाकाम हो गई जब श्रीनगर पुलिस की गहन जांच के परिणामस्वरूप गनई को गिरफ्तार किया गया और विस्फोटकों को जब्त किया गया। इससे उमर संभवत: घबरा गया और लाल किले के बाहर ''समय से पहले'' विस्फोट को अंजाम दे दिया।
पिछले साल 19 अक्टूबर को श्रीनगर के बाहरी इलाके नौगाम के बनपोरा में दीवारों पर जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर चस्पा होने की एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण घटना के बाद जटिल अंतरराज्यीय आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।
श्रीनगर पुलिस ने मामला दर्ज किया और सीसीटीवी फुटेज की जांच कीं। तस्वीरों और जांच के आधार पर पूर्व में पथराव में संलिप्त रहे तीन स्थानीय लोगों आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर-उल-अशरफ और मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद को गिरफ्तार किया गया।
तीनों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर शोपियां निवासी मौलवी इरफान अहमद को गिरफ्तार किया गया, जो एक पूर्व पैरामेडिक था और बाद में इमाम बन गए था। उस पर पोस्टर मुहैया कराने और सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल में शामिल चिकित्कसों को कट्टरपंथी बनाने के लिए अपने संपर्कों का इस्तेमाल करने का आरोप है।
जांचकर्ताओं को इस मामले की तह तक पहुंचने में मदद मिली और वे हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय पहुंचे, जहां गनई और डॉ. शाहीन सईद को गिरफ्तार किया गया और नवंबर में 2,900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री जब्त की गई।
भाषा धीरज प्रशांत
प्रशांत
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