कर्नाटक : राज्यपाल ने विधायिका के संयुक्त सत्र में हुए हंगामे पर राष्ट्रपति मुर्मू को रिपोर्ट सौंपी
शफीक
- 24 Jan 2026, 10:53 PM
- Updated: 10:53 PM
बेंगलुरु, 24 जनवरी (भाषा) कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने हाल ही में राज्य विधानमंडल के संयुक्त सत्र से संबंधित घटनाक्रम पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है। शनिवार को आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।
इस सत्र में राज्यपाल द्वारा विधानसभा और विधान परिषद को दिए गए पारंपरिक अभिभाषण को लेकर विवाद खड़ा हो गया था।
सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल की रिपोर्ट में 22 जनवरी (संयुक्त सत्र का दिन) और उससे एक दिन पहले के घटनाक्रम का विवरण है।
गहलोत ने पारंपरिक अभिभाषण देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद विधि एवं संसदीय कार्य मंत्री एच.के. पाटिल के नेतृत्व में एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने गहलोत से मुलाकात की थी।
सूत्रों ने बताया कि रिपोर्ट भेजने से पहले गहलोत ने कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श लिया था।
कर्नाटक विधानसभा में बृहस्पतिवार को उस समय जबरदस्त हंगामा हो गया, जब राज्यपाल ने विधानसभा के संयुक्त सत्र में राज्य सरकार द्वारा तैयार किये गये संबोधन को पढ़ने से इनकार कर दिया और अपना भाषण मात्र तीन पंक्तियों तक सीमित कर दिया।
इसपर राज्य की कांग्रेस सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
गहलोत ने राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए संबोधन में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) शासनकाल की मनरेगा योजना को केंद्र द्वारा 'रद्द' किए जाने के संदर्भों पर भी आपत्ति जताई।
सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल ने अपनी रिपोर्ट में राष्ट्रपति को बताया कि उन्होंने राज्य सरकार को मसौदा भाषण में संशोधन करने का सुझाव दिया था, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम को लागू करने और इसके प्रभाव की आलोचना करने वाले अनुच्छेदों को हटाने की बात कही गई थी।
गहलोत ने रिपोर्ट में संवैधानिक आवश्यकता के अनुसार संयुक्त सत्र को संबोधित करने के लिए उठाए गए कदमों का भी विस्तृत विवरण दिया है।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि विधानसभा भवन से बाहर निकलते समय राज्यपाल के खिलाफ नारे लगाने और उन्हें घेरने की कोशिश करने वाले कांग्रेस पार्टी के सदस्यों के व्यवहार व उसके बाद सत्ताधारी पार्टी और विपक्षी भाजपा दोनों के नेताओं की प्रतिक्रियाओं का भी रिपोर्ट में विस्तार से वर्णन किया गया है।
राज्यपाल ने 22 जनवरी को जब अपना भाषण तीन पंक्तियों में समाप्त किया, तब एच.के. पाटिल जैसे मंत्रियों सहित सत्ता पक्ष के सदस्य खड़े हो गए और गहलोत से भाषण पूरा करने का अनुरोध किया।
जैसे ही गहलोत बाहर निकलने के द्वार की ओर बढ़े, विधान परिषद के सदस्य बीके हरिप्रसाद समेत सत्ताधारी पार्टी के विधायकों ने नारे लगाकर उन्हें घेरने की कोशिश की लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें वहां से हटा दिया।
भाषा जितेंद्र शफीक
शफीक
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