भोजशाला परिसर में नमाज के 'वास्तविक स्थान' पर इजाजत नहीं दी गई : मुस्लिम नेता
रवि कांत
- 24 Jan 2026, 10:50 PM
- Updated: 10:50 PM
धार (मप्र), 24 जनवरी (भाषा) मुस्लिम समुदाय के एक नेता ने शनिवार को आरोप लगाया कि उच्चतम न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद मध्यप्रदेश के धार जिले के भोजशाला–कमाल मौला मस्जिद परिसर के भीतर उनके 'सही स्थान' पर नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी गई।
हालांकि, जिला प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसने शीर्ष अदालत के आदेश का पालन किया है।
प्रशासन के अनुसार, शुक्रवार को बसंत पंचमी के अवसर पर परिसर में हिंदुओं को सरस्वती पूजा की अनुमति दी गई, जबकि मुसलमानों को अलग स्थान पर नमाज अदा करने की अनुमति दी गई। ग्यारहवीं शताब्दी का यह स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है।
कमाल मौला वेलफेयर सोसाइटी के सदस्य अब्दुल समद ने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय परिसर में "चार दीवारों" के अंदर नमाज पढ़ना चाहता था, लेकिन शुक्रवार को उन्हें जो जगह दी गई, वह जमीन के रिकॉर्ड के अनुसार वक्फ कब्रिस्तान के रूप में दिखाई गई है।
उन्होंने कहा, " हमने बैठक में जिलाधिकारी से मौखिक और लिखित दोनों ही तरह से आपत्ति जताई, फिर भी उन्होंने हमारी बात को नजरअंदाज कर दिया और एक 'डमी नमाज' कराई गई.. हमारा परिसर (जिस जगह को मुसलमान मस्जिद होने का दावा करते हैं) चार दीवारों के अंदर है, हमें अपनी जगह पर नमाज़ पढ़ने की इजाजत मिलनी चाहिए"।
समद ने कहा कि समुदाय ने नमाज अदा करने वालों की संख्या कम करने पर सहमति जताकर प्रशासन को पूरा सहयोग दिया, इसके बावजूद उनके साथ "धोखा" हुआ। उन्होंने कहा कि इस मामले में अदालत में अवमानना याचिका दायर की जाएगी।
धार के जिलाधिकारी प्रियांक मिश्रा ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि एएसआई ने लिखित रूप से प्रशासन को सूचित किया कि शुक्रवार को जहां नमाज अदा की गई, वह संरक्षित परिसर और स्मारक का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन को एएसआई के अभिलेखों पर निर्भर रहना पड़ा।
हिंदू समुदाय भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे 'कमाल मौला मस्जिद' का दावा करता है। पूजा-अर्चना के अधिकार को लेकर विवाद के बाद एएसआई ने अप्रैल 2003 में आदेश जारी कर कहा था कि हिंदू प्रत्येक मंगलवार को भोजशाला में पूजा और मुसलमान प्रत्येक शुक्रवार को यहां नमाज अदा कर सकते हैं।
इस वर्ष बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ने के कारण दोनों समुदायों ने विवादित परिसर में पूजा और नमाज का अधिकार जताया था। उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को आदेश दिया कि हिंदू सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा कर सकते हैं, जबकि मुसलमान अपराह्न एक बजे से तीन बजे तक नमाज अदा कर सकते हैं।
भाषा
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