इसरो ने असफलताओं को सीखने और फिर से वापसी करने के अवसर के रूप में लिया: नारायणन
माधव
- 22 Jan 2026, 10:03 PM
- Updated: 10:03 PM
गांधीनगर, 22 जनवरी (भाषा) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने बृहस्पतिवार को कहा कि यह प्रमुख संगठन अधिकतर समय सफल रहता है, लेकिन इसे जिन कुछ असफलताओं का सामना करना पड़ा, इन्हें सीखने और फिर से वापसी करने के अवसरों के रूप में देखा गया है।
अहमदाबाद स्थित राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी) के 45वें दीक्षांत समारोह में पूर्व-रिकॉर्ड किए गए वीडियो संदेश में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सफल होने के लिए हमेशा आत्मविश्वास और ''कर सकते हैं'' वाला दृष्टिकोण होना आवश्यक है।
नारायणन ने एनआईडी के युवा स्नातकों से कहा, ''आपको अपनी 'टीम वर्क' की भावना और जोखिम लेने की क्षमताओं को भी विकसित करना चाहिए। उदाहरण के लिए, इसरो एक अनुसंधान एवं विकास संगठन होने के नाते, अधिकतर समय सफल रहता है, लेकिन कभी-कभी हमें असफलताओं का सामना करना पड़ता है, जिसे हम सीखने और फिर से उठने के अवसर के रूप में लेते हैं।''
संसाधनों की अपेक्षा नवाचार के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि कल्पनाशील डिजाइनर हमेशा उस संगठन पर भारी पड़ेगा जिसके पास अधिक पैसा तो है लेकिन रचनात्मकता कम है।
उन्होंने कहा कि संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए अपने विवेक का इस्तेमाल करें और उनसे आग्रह किया कि वे 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाने में योगदान देने के लिए लक्ष्य निर्धारित करें।
उन्होंने कहा, ''जब हमें आजादी मिली, तब 94.4 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे थे। अब हमने ब्रिटेन को पीछे छोड़ दिया है और आर्थिक रूप से हम चौथे स्थान पर पहुंच गए हैं। आजादी के समय लगभग 12 प्रतिशत लोग साक्षर थे और अब भारत में एनआईडी समेत कई राष्ट्रीय संस्थान हैं, जहां साक्षरता दर लगभग 80 प्रतिशत है।''
नारायणन ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है।
उन्होंने कहा, ''हमने 2026-27 को देश के लिए गगनयान वर्ष घोषित किया है और हम 2027 तक इस मिशन को पूरा करने जा रहे हैं। हम चंद्रयान-4 और 5 मिशनों समेत कई परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं, जिनमें 2035 तक भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाना और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में 'नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्चर' नामक एक विशाल रॉकेट कार्यक्रम शामिल है। हम 2040 तक भारतीयों को चंद्रमा पर भेजने और उन्हें सुरक्षित वापस लाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं।''
भाषा देवेंद्र माधव
माधव
2201 2203 गांधीनगर