ममता बनर्जी ने ईडी के छापे के दौरान ‘कुछ संवेदनशील सामग्री’ हटाने की कोशिश की : भाजपा
धीरज नरेश
- 09 Jan 2026, 10:35 PM
- Updated: 10:35 PM
नयी दिल्ली, नौ जनवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की, एक निजी राजनीतिक परामर्श कंपनी के कार्यालय पर ईडी की छापेमारी के दौरान उनके आचरण को लेकर शुक्रवार को निंदा की।
केंद्र में सत्तारूढ़ और पश्चिम बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी ने आरोप लगाया कि बनर्जी के कृत्यों से संकेत मिलता है कि उन्होंने ‘‘कुछ संवेदनशील चीज को बचाने’’ की कोशिश की, जिससे वह और उनकी पार्टी कथित कोयला तस्करी से जुड़े धनशोधन के मामले में फंस सकती हैं।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यहां भाजपा मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों को धमकाने और छापेमारी के दौरान उनसे दस्तावेज ‘छीनने’ के लिए आरोपी बनाया जाना चाहिए।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘ममता बनर्जी की गैर न्यायोचित कार्रवाई की परिस्थितियां संदिग्ध हैं।’’
प्रसाद ने आरोप लगाया कि बनर्जी, राज्य पुलिस अधिकारियों के साथ, एक निजी परामर्श कंपनी के परिसर में जबरन दाखिल हुईं, जहां एक जांच चल रही थी। उन्होंने ईडी के जांच अधिकारियों को धमकाया और ‘कागजात छीनकर’ अपने साथ ले गईं।
उन्होंने कहा, ‘‘ गत 14 वर्षों से मुख्यमंत्री रहने के कारण उन्हें शासन के तौर-तरीकों की अच्छी जानकारी है। वे अतीत में केंद्रीय मंत्री के रूप में भी कार्य कर चुकी हैं।’’
प्रसाद ने आरोप लगाते हुए सवाल किया, ‘‘इसका मतलब है कि वह कोई संवेदनशील चीज बचाने की कोशिश कर रही थीं, जो उन्हें और उनके दल को फंसा सकती थी। इसके अलावा और क्या अनुमान लगाया जा सकता है? उन्हें किस बात का डर था?’’
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कथित कोयला तस्करी से जुड़े धनशोधन मामले में छापेमारी के दौरान कोलकाता में आई-पैक के निदेशक प्रतीक जैन के आवास में जबरन दाखिल हुईं और दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों सहित ‘महत्वपूर्ण’ सबूत अपने साथ ले गईं।
भाजपा नेता ने कहा, ‘‘हम ममता बनर्जी के गैरजिम्मेदाराना आचरण की कड़ी निंदा करते हैं। जांच में बाधा डालना और फाइलें छीन लेना गंभीर अपराध हैं। ममता गंभीर आपराधिक मामलों की दोषी हैं। प्रथम दृष्टया उनके आचरण के लिए उन पर गंभीर आपराधिक प्रावधानों के तहत मुकदमा चलाया जाना चाहिए।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी की छापेमारी के दौरान बनर्जी का आचरण ‘अनैतिक, गैरजिम्मेदार और असंवैधानिक’ था।
प्रसाद ने कहा कि अपने कृत्यों से उन्होंने पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया और शासन व्यवस्था को ‘शर्मिंदा’ कर दिया है।
प्रसाद ने सवाल किया, ‘‘उस परामर्श कंपनी से ममता बनर्जी का क्या संबंध है? यह कंपनी कई ग्राहकों के लिए काम करती है, लेकिन घोटालों की जांच चल रही है तो ममता बनर्जी ही इतनी चिंतित क्यों हैं? वे कौन से दस्तावेज थे जिनके कारण उन्हें छापेमारी के दौरान हस्तक्षेप करने के लिए सभी नियमों और मानदंडों का खुलेआम उल्लंघन करना पड़ा?’’
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि बनर्जी ने इस तरह का व्यवहार पहली बार नहीं किया है। उन्होंने कहा, ‘‘सारदा घोटाला मामले में जब सीबीआई ने डीजीपी राजीव कुमार को तलब किया था, तब ममता बनर्जी ने धरना दिया था।’’
प्रसाद ने आरोप लगाया कि बनर्जी ने संदेशखलि मामले में मुख्य आरोपी को बचाने की कोशिश भी की थी और आरजी कर मेडिकल कॉलेज सामूहिक दुष्कर्म मामले में ‘हस्तक्षेप’ किया था।
उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या ममता बनर्जी ने राज्य में किसी भी तरह की निष्पक्ष जांच न होने देने का प्रभावी रूप से ठेका ले लिया है?’’
प्रसाद ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सत्तारूढ़ तृणमूल के ‘कई’ सदस्यों की संलिप्तता के साथ कोयला तस्करी का ‘प्रमुख केंद्र’ बन गया है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने बनर्जी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार और भ्रष्ट लोगों को बचाने के लिए ईडी के धनशोधन मामले की जांच के खिलाफ शुक्रवार को कोलकाता में मार्च निकाला।
उन्होंने सवाल किया, ‘‘ऐसा कौन सा डर था जिसने उन्हें एक निजी कंपनी के परिसर में ईडी द्वारा की गई वैध तलाशी और जब्ती कार्रवाई के खिलाफ ‘भ्रष्टाचारी बचाओ’ मार्च निकालने के लिए मजबूर होना पड़ा? इस निजी कंपनी और तृणमूल नेताओं के बीच किस तरह का संबंध है?’’
भंडारी ने आरोप लगाया कि बनर्जी निजी कंपनी के समर्थन में सड़क पर उतरीं क्योंकि ‘‘वह जानती हैं कि अगर उनके द्वारा जबरन ले गईं फाइलें खोली गईं तो तृणमूल नेताओं का भ्रष्टाचार उजागर हो जाएगा।’’
भाषा धीरज