असम में सायरंग-नयी दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस ने सात हाथियों को कुचला, पांच डिब्बे पटरी से उतरे
सुरभि दिलीप
- 20 Dec 2025, 04:52 PM
- Updated: 04:52 PM
नगांव/गुवाहाटी, 20 दिसंबर (भाषा) असम के होजाई जिले में शुक्रवार देर रात हाथियों का एक झुंड सायरंग-नयी दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस की चपेट में आ गया जिससे सात हाथियों की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया। वन विभाग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन के पांच डिब्बे और इंजन भी पटरी से उतर गए।
शुरू में सभी आठ हाथियों के मारे जाने की सूचना मिली थी, हालांकि बाद में कहा गया कि उनमें से एक घायल पाया गया।
अधिकारियों ने बताया कि इस घटना में कोई यात्री घायल नहीं हुआ है। ट्रेन देर रात दो बजकर 17 मिनट पर दुर्घटना का शिकार हुई।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने वन विभाग को विस्तृत जांच करने और वन्यजीव गलियारों को सुरक्षित करने का निर्देश दिया है, जबकि कांग्रेस की असम इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने दुर्घटना के लिए ‘‘वर्तमान सरकार के तहत अनियोजित और खराब तरीके से विनियमित विकास’’ को जिम्मेदार ठहराया है।
इस दुर्घटना के बाद कई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है, ट्रेनों को विभिन्न स्थानों पर रोका गया या यात्रा गंतव्य से पहले ही समाप्त कर दी गई है।
नगांव के संभागीय वन अधिकारी सुहाश कदम ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि यह घटना चांगजुराई गांव में हुई और संभवत: क्षेत्र में भारी कोहरे के कारण यह हादसा हुआ।
उन्होंने कहा, ‘‘मृत सातों हाथियों का पोस्टमार्टम किया जा रहा है और घायल हाथी का इलाज स्थानीय पशु चिकित्सकों द्वारा किया जा रहा है। कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।’’
पूर्वोत्तर सीमा रेलवे (एनएफआर) के मुख्य प्रवक्ता कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि यह दुर्घटना लामडिंग मंडल के अंतर्गत जमुनामुख-कामपुर खंड में हुई।
यह क्षेत्र गुवाहाटी से करीब 126 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
सायरंग-नयी दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस मिजोरम के सायरंग (आइजोल के पास) को आनंद विहार टर्मिनल (दिल्ली) से जोड़ती है।
उन्होंने दावा किया कि दुर्घटना उस स्थान पर हुई, जो हाथियों के लिए निर्धारित गलियारा नहीं है।
शर्मा ने कहा, ‘‘हाथियों के झुंड को देखकर ट्रेन चालक ने आपातकालीन ब्रेक लगाए। फिर भी, हाथी ट्रेन की चपेट में गए।’’
उन्होंने कहा कि दुर्घटना राहत ट्रेनें, मंडल मुख्यालयों के शीर्ष अधिकारियों के साथ पहले ही घटनास्थल पर पहुंच चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि एनएफआर के महाप्रबंधक और लामडिंग के मंडल रेलवे प्रबंधक भी घटनास्थल पर पहुंच गए हैं।
उन्होंने बताया कि गुवाहाटी रेलवे स्टेशन पर हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं।
एनएफआर के प्रवक्ता ने बताया कि प्रभावित डिब्बों के यात्रियों को अस्थायी रूप से अन्य डिब्बों में उपलब्ध खाली सीट पर समायोजित किया गया है और ट्रेन सुबह छह बजकर 11 मिनट पर गुवाहाटी के लिए रवाना हो गई। हालांकि, प्रभावित डिब्बों को घटना स्थल पर ही छोड़ दिया गया।
उन्होंने बताया कि गुवाहाटी में ट्रेन में अतिरिक्त डिब्बे जोड़े जाएंगे, जिनमें यात्रियों को समायोजित किया जाएगा और उसके बाद ट्रेन अपनी यात्रा फिर से शुरू करेगी।
शर्मा ने बताया कि प्रभावित खंड से गुजरने वाली ट्रेनों को अप लाइन से गुजारा जा रहा है और रेल यातायात की बहाली का काम जारी है।
उन्होंने कहा कि दुर्घटना के बाद नौ ट्रेन रद्द कर दी गई हैं, 13 ट्रेन को विभिन्न स्थानों पर रोका गया है और दो रेलगाड़ियों की यात्रा गंतव्य से पहले ही समाप्त कर दी गई है।
रद्द की गई रेलगाड़ियों में रंगिया-न्यू तिनसुकिया एक्सप्रेस, गुवाहाटी-जोरहाट टाउन जन शताब्दी एक्सप्रेस, गुवाहाटी-बदरपुर विस्टाडोम एक्सप्रेस और न्यू तिनसुकिया-रंगिया एक्सप्रेस शामिल हैं।
एनएफआर ने कहा, ‘‘ट्रेन संख्या 15769 (अलीपुरद्वार-मरियानी) डिगारू में ही समाप्त कर दी जाएगी और यह डिगारू-मरियानी के बीच रद्द रहेगी। इसी प्रकार, ट्रेन संख्या 15770 (मरियानी-अलीपुरद्वार) डिगारू से ही अपनी यात्रा शुरू करेगी।’’
शर्मा ने बताया कि जिन रेलगाड़ियों को विभिन्न स्थानों पर रोका गया है उनमें सियालदह-सबरूम कंचनजंगा एक्सप्रेस, डिब्रूगढ़-नयी दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस, डिब्रूगढ़-कन्याकुमारी विवेक एक्सप्रेस और न्यू तिनसुकिया-एसएमवीटी बेंगलुरु एक्सप्रेस शामिल हैं।
इसी बीच, मुख्यमंत्री ने दुर्घटना की गहन जांच के आदेश दिए।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आज सुबह ट्रेन दुर्घटना में तीन वयस्क और चार शावकों समेत सात हाथियों की मौत से हम बेहद दुखी हैं।’’
शर्मा ने कहा, ‘‘मैंने वन विभाग को इस बेहद चिंताजनक दुर्घटना की विस्तृत जांच करने और खासकर कम दृश्यता वाले मौसमों के दौरान हमारे वन्यजीव गलियारों को और अधिक सुरक्षित करने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया है।’’
कांग्रेस की असम इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने भी सोशल मीडिया साइट पर एक पोस्ट में कहा कि हाथियों की मौत ‘‘बेहद चिंताजनक है और राज्य में मानव-पशु संघर्ष की बढ़ती चुनौती को रेखांकित करती है’’।
उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं ‘‘हाल के वर्षों में प्राकृतिक आवासों को तेजी से हो रही क्षति और सिकुड़ते दायरे’’ की ओर इशारा करती हैं।
गोगोई ने कहा, ‘‘वर्तमान सरकार के तहत अनियोजित और खराब तरीके से विनियमित विकास के कारण वन क्षेत्र सिकुड़ रहा है और पारंपरिक प्रवासन मार्ग बाधित हो रहे हैं, साथ ही पारिस्थितिक सुरक्षा उपायों पर भी बहुत कम ध्यान दिया जा रहा है।’’
उन्होंने दावा किया कि दूरदर्शिता और जवाबदेही की कमी के कारण इस तरह की दुर्घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।
गोगोई ने कहा, ‘‘विकास नीतियों में अल्पकालिक मुनाफे के बजाय लोगों, समुदायों और पर्यावरण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस संतुलन की अनदेखी करने से असम में पारिस्थितिक क्षति और सामाजिक लागतें और भी बढ़ जाती हैं।’’
भाषा सुरभि