सतना के जिस अस्पताल में बच्चे एचआईवी संक्रमित मिले थे, उसके बाहर ‘खून की दलाली’ करते तीन गिरफ्तार
सं ब्रजेन्द्र शफीक
- 18 Dec 2025, 11:12 PM
- Updated: 11:12 PM
सतना (मध्यप्रदेश), 18 दिसंबर (भाषा) मध्यप्रदेश के सतना स्थित जिस सरकारी अस्पताल में छह बच्चे एचआईवी से संक्रमित पाए गए थे, उसी के बाहर कथित तौर पर ‘खून की दलाली’ करते पाए जाने के बाद बृहस्पतिवार को तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि तीनों आरोपियों को एक ‘स्टिंग ऑपरेशन’ करके पकड़ा गया और अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सरदार वल्लभभाई पटेल शासकीय अस्पताल के ब्लड बैंक और वहां के कर्मचारियों की इसमें कोई संलिप्तता तो नहीं है।
सतना के एसडीएम राहुल सिलाडिया ने 'पीटीआई वीडियो' से बातचीत में कहा, ‘‘अस्पताल के बाहर खून की दलाली की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद, सत्यापन के लिए एक व्यक्ति को खरीददार बनाकर भेजा गया।’’
उन्होंने कहा कि इस दौरान एक आरोपी की ओर से 4,500 रुपये में एक यूनिट खून की पेशकश की गई। उन्होंने कहा कि इसके बाद खरीददार बनकर गया व्यक्ति पैसों की व्यवस्था करने की बात कहकर वापस आ गया।
एसडीएम ने कहा कि इसके बाद उन्होंने उसे 4500 रुपए दिए, जिनमें 500 के 7 नोट, 200 के 4 नोट और 100 के 2 नोट थे।
सिलाडिया ने कहा कि इन नोटों के ‘सीरियल नंबर’ का एक वीडियो बनाया और फिर खरीदार को वही नोट देकर दलाल के पास भेज दिया।
उन्होंने बताया कि कथित दलाल ने एक यूनिट खून के एवज में वह नोट ले लिए और फिर आरोपी को रंगे हाथों पकड़ लिया गया। आरोपी की निशानदेही पर बाद में दो और लोगों को पकड़ा गया।
सिलाडिया ने कहा कि जब नोटों के नंबर मिलाए गए तो हूबहू वही नंबर मिले। एसडीएम ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी बनवा लिया।
अधिकारी ने बताया कि तीनों को कोतवाली थाने ले जाया गया और फिर न्यायालय में पेश किया गया, जिसके बाद सभी आरोपियों को जेल भेज दिया गया।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि आरोपियों की पहचान रंजीत साहू, मोहम्मद कैफ और अनिल गुप्ता के रूप में हुई है।
उन्होंने कहा कि अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि अस्पताल के ब्लड बैंक और वहां के कर्मचारियों की इसमें कोई संलिप्तता तो नहीं है।
उल्लेखनीय है कि 16 दिसंबर को खुलासा हुआ था कि सतना जिला अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित छह बच्चे एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) जाने से इस लाइलाज बीमारी के शिकार हो गए हैं। इनमें से एक के माता-पिता भी इसकी चपेट में आ गए हैं।
यह सारे मामले इस साल जनवरी से मई के बीच सामने आए हैं और सभी पीड़ितों का एचआईवी प्रोटोकॉल के तहत इलाज किया जा रहा है। सरकार ने इस मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय समिति गठित की है।
भाषा सं ब्रजेन्द्र