बीमा क्षेत्र में 100 फीसदी एफडीआई से इसका नियंत्रण बाहरी शक्तियों के पास चला जाएगा : विपक्ष
मनीषा अविनाश
- 17 Dec 2025, 06:03 PM
- Updated: 06:03 PM
नयी दिल्ली, 17 दिसंबर (भाषा) किसानों की समस्याओं की आड़ में बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 100 फीसदी कर विदेशी कंपनियों को लाभ पहुंचाने का सरकार पर आरोप लगाते हुए राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों ने सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा विधि संशोधन) विधेयक 2025 को प्रवर समिति में भेजने की मांग की।
उच्च सदन में विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए राजद के संजय यादव ने कहा कि बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश 100 फीसदी करने से इसका नियंत्रण बाहरी शक्तियों के हाथ में चला जाएगा और फिर नियम भी वहीं तय करेंगी। ‘‘जाहिर है कि वे अपना फायदा देखेंगी।’’
उन्होंने कहा कि सरकार खुद कहती है कि वह 81 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज देती है तो क्या ये लोग विदेशी कंपनियों से बीमा कराएंगे।
उन्होंने कहा कि विधेयक में किसानों, गरीबों, दलितों के लिए और उनके जीवन को सुरक्षा देने वाला प्रावधान होना चाहिए। पॉलिसी धारक को उसकी पूरी रकम उसकी जरूरत के अनुसार तत्काल मिलना चाहिए लेकिन होता बिल्कुल अलग है। बीमा कंपनियां बड़ी -बड़ी बातें करती हैं लेकिन जरूरत के समय वे सारी बातें सामने आती हैं जो पहले नहीं बताई जातीं।
उन्होंने सुझाव दिया कि विधेयक को स्थायी समिति में भेजा जाए और सदस्यों के सुझावों को इसमें शामिल किया जाए।
अन्नाद्रमुक के डॉ एम थंबीदुरै ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह विधेयक गहन सोचविचार के बाद तैयार किया गया है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस विधेयक के कानूनी रूप लेने से तमिलनाडु के किसानों को राहत मिलेगी जो कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उनके यह कहने पर द्रमुक सदस्यों ने विरोध जताया।
आम आदमी पार्टी के अशोक कुमार मित्तल ने कहा कि बीमा कंपनियां सुरक्षा के नाम पर बड़े-बड़े सपने दिखाती हैं लेकिन जरूरत के समय स्थिति बिल्कुल बदल जाती है।
उन्होंने कहा ‘‘सरकार कहती है कि इस विधेयक से किसानों को फायदा होगा। लेकिन उनका तो सुरक्षा कवच ही आधा कर दिया गया है। उनकी आमदनी पता नहीं, कब दोगुना होगी।’’
मित्तल ने कहा ‘‘100 फीसदी निवेश करने वाली विदेशी कंपनियों को भारतीयों के व्यापक आंकड़े मिल जाएंगे। इससे भी बड़ी बात यह है कि यह विधेयक भारतीय जीवन बीमा निगम को कमजोर कर देगा।’’
भाकपा के संदोष कुमार पी ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि 100 फीसदी विदेशी निवेश करने वाली विदेशी कंपनियां जो नियम बनाएंगी, वह उनके अनुकूल होंगे, भारतीयों के अनुकूल नहीं होंगे।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, बीमा क्षेत्र, रेल क्षेत्र आदि बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं और इनके बारे में कोई भी फैसला सोच-समझ कर लिया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजा जाए।
भारतीय जनता पार्टी के भागवत कराड़ ने कहा कि देश के 140 करोड़ लोगों के बीमा के लिए यह संशोधन विधेयक लाना जरूरी था। उन्होंने कहा कि विधेयक के माध्यम से दावा निपटारा प्रक्रिया पारदर्शी होगी।
उन्होंने कहा कि विधेयक में, नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का प्रावधान है। विधेयक में इरडा (भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण) को सशक्त बनाने का भी प्रावधान है।
उन्होंने कहा ‘‘जो प्रावधान बनाए गए हैं वह हर क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं चाहे वह असंगठित क्षेत्र क्यों न हो।’’
बसपा के रामजी ने कहा कि यह विधेयक सवाल उठाता है कि ‘‘आत्म निर्भर भारत का क्या होगा?’’ उन्होंने कहा कि बीमा क्षेत्र में 100 फीसदी विदेशी निवेश बहुत बड़ा जोखिम होगा।
उन्होंने कहा कि निजी बीमा क्षेत्र लाभ को प्राथमिकता देगा और जन कल्याण की उपेक्षा होगी। ‘‘प्रीमियम अधिक होगा और दावे के निपटारे में मुश्किलें आएंगी।’’
भाजपा की रेखा शर्मा ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह विधेयक भारत के सामाजिक सुरक्षा ढांचे में बदलाव लाएगा। उन्होंने दावा किया कि बीमा क्षेत्र में 100 फीसदी विदेशी निवेश पर चिंता जाहिर करने वालों को देखना चाहिए कि राजग सरकार की नीतियों और राजनीतिक इच्छा शक्ति की वजह से ही आज बीमा घनत्व उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक नियामक और पॉलिसी धारक दोनों को मजबूत करता है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी ने कहा कि लेह और लद्दाख में ‘बीआरओ’ के लिए काम करने वाले झारखंड के मजदूरों के लिए भी दुर्घटना बीमा की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बीमा सुधार का लाभ सबसे कमजोर वर्ग को मिलना चाहिए।
चर्चा में भाजपा के महाराजा संजाओबा लेशंबा, मनन कुमार मिश्रा, देवेंद्र प्रताप सिंह, भुवनेश्वर कालिता, संगीता यादव, महेंद्र भट्ट, नरेश बंसल, आईयूएमएल के हारिस बीरन, माकपा के जॉन ब्रिटास आदि ने भी भाग लिया।
भाषा मनीषा