दिल्ली पुलिस ने दो संगठित अपराध गिरोहों का भंडाफोड़ किया, सरगना पर मकोका के तहत मामला दर्ज
शुभम पवनेश
- 10 Dec 2025, 08:04 PM
- Updated: 08:04 PM
नयी दिल्ली, 10 दिसंबर (भाषा) दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में सक्रिय दो प्रमुख संगठित अपराध गिरोहों का भंडाफोड़ किया है, जिनमें से एक वाणिज्यिक वाहनों को प्रवेश निषेध नियमों को दरकिनार करने की अनुमति देने वाले अवैध स्टिकर बेचने में शामिल था और दूसरा ट्रांसपोर्टर और यातायात पुलिस कर्मियों को निशाना बनाकर जबरन वसूली का गिरोह चलाता था। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
पुलिस ने बताया कि महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के प्रावधानों के तहत मास्टरमाइंड राजकुमार उर्फ राजू मीणा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उसने बताया कि वह पुलिसकर्मियों को धमकी और फर्जी वीडियो क्लिप के माध्यम से पैसे वसूलने वाले एक गिरोह को चला रहा था।
पुलिस उपायुक्त (अपराध शाखा) संजीव कुमार यादव ने एक बयान में कहा, "एक समानांतर गिरोह में सरगना जीशान अली सहित चार लोगों को प्रतिबंधित घंटों के दौरान अवैध आवागमन के लिए वाणिज्यिक वाहन चालकों को कई 'मार्का/स्टिकर' बनाने और बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।"
अधिकारी ने बताया कि पहला मामला तब सामने आया जब बदरपुर में एक वाणिज्यिक एलजीवी चालक ने अभियोग से बचने की कोशिश की और एक स्टिकर पेश करके छूट का दावा किया।
डीसीपी ने कहा, "प्राथमिकी दर्ज की गई और चालकों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सोशल मीडिया समूहों की बाद की जांच से पता चला कि एक संगठित गिरोह द्वारा एक समानांतर प्रणाली चलाई जा रही थी, जो प्रति वाहन प्रति माह 2,000 रुपये से 5,000 रुपये तक के स्टिकर उपलब्ध कराता था और साथ ही छेड़छाड़ किए गए वीडियो के माध्यम से यातायात कर्मियों से जबरन वसूली में भी शामिल था।"
जांच के दौरान पुलिस ने दो अलग-अलग गिरोहों की पहचान की। इनमें से एक राजकुमार द्वारा संचालित मनगढ़ंत वीडियो क्लिप का उपयोग करके यातायात पुलिस कर्मियों और ट्रांसपोर्टर को निशाना बनाने वाला था। जबकि दूसरा जीशान द्वारा संचालित वह गिरोह था जोकि प्रवेश निषेध के घंटों के दौरान सुरक्षित आवागमन का वादा करने वाले स्टिकर छापता और बेचता था।
दोनों गिरोह अलग-अलग काम कर रहे थे।
एक गोपनीय जांच के बाद राजकुमार के खिलाफ मकोका लगाने का प्रस्ताव रखा गया। मंजूरी मिलने पर आठ दिसंबर को प्राथमिकी में मकोका की धारा तीन और चार जोड़ दी गईं।
डीसीपी ने बताया, "राजकुमार 2015 से ही जबरन वसूली का गिरोह चला रहा है, वह अपने सहोयोगियों की भर्ती करता है, अधिकारियों के फर्जी वीडियो बनाता है, झूठी शिकायतें दर्ज कराता है और पैसे वसूलने के बाद शिकायतें वापस लेता है।"
डीसीपी ने बताया, "निगरानी, तकनीकी विश्लेषण और पूछताछ के बाद एक टीम ने दोनों मुख्य साजिशकर्ताओं के साथ-साथ जीशान के तीन साथियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में चंदन कुमार चौधरी, दिलीप कुमार और दीना नाथ चौधरी उर्फ राजकुमार शामिल हैं। राजकुमार के खिलाफ जबरन वसूली, डकैती और मारपीट से संबंधित सात मामले पहले से दर्ज हैं।"
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