विलंब के कारण प्रमुख जनजातीय योजनाओं का 'उद्देश्य विफल' होगा : संसदीय समिति ने किया आगाह
सुरेश अविनाश
- 09 Dec 2025, 10:33 PM
- Updated: 10:33 PM
नयी दिल्ली, नौ दिसंबर (भाषा) एक संसदीय समिति ने जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के संग्रहालयों और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) की स्थापना में देरी को लेकर जनजातीय मामलों के मंत्रालय की खिंचाई की है।
समिति ने आगाह किया कि राज्यों के लिए स्पष्ट समय-सीमा और पूर्व-शर्तों के अभाव में लागत में वृद्धि हो सकती है और प्रमुख योजनाओं का उद्देश्य विफल हो सकता है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने अपनी सिफारिशों पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई पर एक रिपोर्ट में कहा कि वह 11 आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के संग्रहालयों के निर्माण कार्य में धीमी प्रगति तथा ईएमआरएस के बुनियादी ढांचे में कमियों पर मंत्रालय के जवाबों से ‘‘संतुष्ट नहीं’’ है और उसने इन मुद्दों पर चार सिफारिशें दोहराने का निर्णय लिया है।
लोकसभा में मंगलवार को पेश की गई रिपोर्ट से पता चला है कि पहले की गई 14 सिफारिशों में से नौ को सरकार ने स्वीकार कर लिया है, एक को बिना आगे कार्रवाई किए बंद कर दिया गया है और आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालयों और ईएमआरएस के विस्तार और उन्नयन से संबंधित चार सिफारिशों को नए सिरे से कार्रवाई के लिए मंत्रालय को वापस कर दिया गया है।
समिति ने कहा कि वह 10 राज्यों में 11 आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालयों को समर्थन देने के सरकार के फैसले की सराहना करती है, जिन्हें "मुख्यधारा के इतिहास में अक्सर कम स्थान दिया जाता है।" लेकिन समिति ने जमीनी स्तर पर "धीमी प्रगति" को रेखांकित किया।
अब तक केवल तीन संग्रहालयों- रांची में भगवान बिरसा मुंडा स्मारक स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय, छिंदवाड़ा में बादल भोई राज्य जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय और जबलपुर में राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय- का उद्घाटन किया गया है।
समिति ने बताया कि 728 के लक्ष्य के मुकाबले 720 ईएमआरएस स्वीकृत किए गए हैं और 722 स्कूलों के लिए स्थान स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से केवल 477 ही कार्यरत हैं और केवल 341 ही अपने भवनों से संचालित हो रहे हैं। बाकी स्कूल किराए के या अन्य सरकारी भवनों में चल रहे हैं, जिनके बारे में समिति ने चेतावनी दी है कि "इनमें स्कूल के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का अभाव हो सकता है।"
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