शीर्ष अदालत ने राजस्व मानचित्र सुधार पर उच्च न्यायालय के आदेश को खारिज किया
आशीष दिलीप
- 09 Dec 2025, 10:32 PM
- Updated: 10:32 PM
नयी दिल्ली, नौ दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को इस बात पर जोर दिया कि उच्च न्यायालय को किसी मामले को अनावश्यक रूप से पुनर्विचार के लिए वापस भेजने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे मुकदमेबाज़ी का एक नया दौर शुरू हो जाता है।
न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने कहा कि विचार मुकदमेबाजी को कम करने का है, न कि उसे बढ़ाने का। पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक मामले को सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद नए सिरे से विचार के लिए वापस भेज दिया गया था। यह मामला प्राधिकारों द्वारा राजस्व मानचित्र में सुधार के लिए एक व्यक्ति के आवेदन को खारिज करने से संबंधित था।
अपील पर सुनवाई करते हुए, उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अदालत ने मानचित्र और ‘फील्ड बुक’ के रखरखाव से संबंधित उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 30 की गलत व्याख्या की। पीठ ने कहा कि इससे अनावश्यक रूप से और मुकदमेबाजी बढ़ सकती है।
पीठ ने कहा, "हम यह भी कहना चाहेंगे कि इस अदालत का पहले का मत यह था कि यदि नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन होता है, तो मामले को संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर देने के लिए वापस भेज दिया जाना चाहिए। हालांकि, समय बीतने के साथ, यह मत बदल गया।"
पीठ ने कहा, "विचार मुकदमेबाजी को कम करने का है, न कि उसे बढ़ाने का। उच्च न्यायालय द्वारा अनावश्यक रूप से मामला विचार के लिए भेजने से मुकदमेबाजी का नया दौर शुरू हो जाता है, जिससे बचना चाहिए।"
शुरुआत में, एक भूखंड के नक्शे में सुधार के लिए जिलाधिकारी के समक्ष दायर आवेदन खारिज कर दिया गया था। बाद में, अपर आयुक्त ने भी जिलाधिकारी के आदेश के खिलाफ अपील खारिज कर दी। लगभग 17 साल बाद, राजस्व नक्शे में सुधार के लिए फिर से एक आवेदन दायर किया गया, लेकिन संबंधित प्राधिकारी ने उसे खारिज कर दिया।
इसके बाद मामला उच्च न्यायालय में पहुंचा, जिसने सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का उचित अवसर प्रदान करने के बाद मामले को नए सिरे से विचार के लिए वापस भेज दिया।
संहिता की धारा 30 का हवाला देते हुए उच्चतम न्यायालय की पीठ ने कहा कि जिलाधिकारी निर्धारित तरीके से प्रत्येक गांव के लिए एक नक्शा और एक ‘फील्ड बुक’ बनाए रखने के लिए बाध्य हैं और इसमें किए गए किसी भी बदलाव को सालाना या निर्धारित लंबे अंतराल के बाद दर्ज किया जाना चाहिए।
पीठ ने कहा, "यदि इस मामले के तथ्यों पर गौर किया जाए तो नक्शे में सुधार से संबंधित मुद्दा पक्षों के बीच सुलझ गया था, जब जिलाधिकारी द्वारा पारित आदेश के खिलाफ निजी प्रतिवादियों द्वारा दायर अपील चार सितंबर, 2001 को खारिज कर दी गई थी। नक्शा पहले ही स्थायी हो चुका था।"
पीठ ने कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है, जिसमें राजस्व रिकॉर्ड में कोई त्रुटि पाई गई हो, जिसे संहिता की धारा 30 के तहत सुधारा जाना चाहिए। अपील मंजूर करते हुए पीठ ने उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश को रद्द कर दिया।
भाषा आशीष