कुकी संगठन ने मेइती विधायक के राहत शिविर दौरे की आलोचना की, कहा-‘सोची-समझी राजनीतिक कवायद’
मनीषा गोला
- 09 Dec 2025, 01:35 PM
- Updated: 01:35 PM
इंफाल, नौ दिसंबर (भाषा) कुकी संगठनों ने मणिपुर के उखरुल जिले में एक राहत शिविर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक वाई. खेमचंद सिंह के दौरे की निंदा करते हुए दावा किया कि यह कोई वास्तविक चिंता नहीं, बल्कि ‘‘सोची-समझी राजनीतिक कवायद’’ है।
मेइती समुदाय से ताल्लुक रखने वाले पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सिंह ने सोमवार को उखरुल जिले में एक राहत शिविर का दौरा किया, जहां कुकी समुदाय के लोग जातीय हिंसा के कारण बेघर होने के बाद से रह रहे हैं।
मई 2023 में हिंसा भड़कने के बाद कुकी और मेइती समुदाय एक-दूसरे के इलाकों में नहीं जाते, जिससे राज्य जातीय आधार पर मानो बंट सा गया है। सिंह ऐसे पहले नेता हैं जिन्होंने इस विभाजन को पार करते हुए दूसरे समुदाय के राहत शिविर का दौरा किया।
नगा-बहुल उखरुल जिले में समुदाय की शीर्ष संस्था ‘कुकी इंपी उखरुल’ ने सिंह के दौरे की आलोचना करते हुए उन्हें ‘‘बिन बुलाया मेहमान’’ करार दिया।
एक बयान में कहा गया, ‘‘कुकी इंपी उखरुल, लिटन सारेखोंग राहत शिविर में विधायक वाई. खेमचंद के बिन बुलाए पहुंचने और अनधिकृत दौरे की स्पष्ट और कड़ी निंदा करता है।’’
इसमें कहा गया, ‘‘ढेरों सुरक्षाकर्मियों के साथ उनका अचानक आना, प्रोटोकॉल और शिष्टाचार का गंभीर उल्लंघन है।’’
संगठन ने दावा किया कि यह दौरा अस्वीकार्य है और न्याय की प्रतीक्षा कर रहे समुदाय के लिए बेहद अपमानजनक है।
इसमें आरोप लगाया गया, ‘‘यह दौरा कोई वास्तविक चिंता नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक कवायद थी।’’
कुकी जो काउंसिल (केजेडसी) ने विधायक के दौरे को ‘‘गैर जिम्मेदाराना प्रचार स्टंट’’ करार दिया। काउंसिल ने कहा ‘‘उनका दौरा कुकी जो नेताओं, शिविर के प्राधिकारियों और जिला प्रशासन को सूचना दिए बगैर हुआ। खबरों में पुष्टि की गई है कि वह भाजपा कार्यकर्ताओं से मिल रहे थे और वापस जाते समय बेवजह शिविर में रुक गए। बाद में उन्होंने फोटो और वीडियो ऑनलाइन डाले जिसमें खुद को संघर्ष प्रभावित मणिपुर में शांति दूत के तौर पर पेश किया।’’
काउंसिल ने कहा ‘‘इससे मूल सवाल उठता है कि तीन से सात मई 2023 को जब हिंसा भड़की और इंफाल के भीतर तथा बाहर कुकी जो परिवारों को निशाना बनाया गया और वे विस्थापित हुए, तब खेमचंद कहां थे। तब बोलने से उन्हें किसने रोका था। त्रासदी के समय उनकी खामोशी और अचानक उनकी चिंता का कहीं तालमेल नहीं है। घाव बहुत गहरे हैं, भरोसा टूट चुका है और हमारे लोगों का दर्द कोई कम नहीं कर सकता।’’
केजेडसी ने कहा कि सिंह ने जिस जगह का दौरा किया, वह ‘‘कोई बड़ी बात नहीं है।’’
संगठन ने कहा ‘‘मेइती हमेशा बिना किसी रोक-टोक के उखरुल और दूसरे कच्चा नगा-बहुल जिलों में आज़ादी से आते-जाते रहे हैं। सिंह की फुरसत की यात्रा के दौरान अचानक रुकने से बेघर हुए परिवारों को कोई सुरक्षा, न्याय या जवाबदेही नहीं मिलती, जो अब भी परेशान हैं। केजेडसी इस झूठे काम से नफ़रत करता है और सभी लोगों को समुदाय के नेताओं को पहले से बताए बिना कुकी-ज़ो इलाकों या राहत केंद्रों में जाने को लेकर सावधान करता है।’’
केजेडसी ने दावा किया कि इस तरह के बिना बताए दौरे गलतफहमी पैदा कर सकते हैं या अनचाहे टकराव का कारण बन सकते हैं।
शिविर के प्रभारी एल. बाइटे ने कहा कि विधायक ‘‘बिना किसी पूर्व सूचना के और भाजपा के कई कार्यकर्ताओं के साथ’’ पहुंचे।
बाइटे ने दावा किया कि उन्होंने ‘‘जिम्मेदार लोगों’’ की अनुपस्थिति का फायदा उठाया और ‘‘भोले-भाले बच्चों’’ के साथ तस्वीरें खिंचवाईं।
शिविर के अपने दौरे के दौरान, सिंह ने लोगों से कहा था, ‘‘क्रिसमस के आने पर, हम सभी को राज्य में शांति लौटने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। दुनिया में लगभग हर जगह झगड़े होते हैं। लेकिन हमें मौजूदा मतभेदों के बावजूद मिलजुलकर रहना सीखना चाहिए। एक-दूसरे के गांवों में जाने में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए।’’
जातीय संघर्षों में अब तक 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग बेघर हुए हैं। संकट से निपटने के तरीके को लेकर आलोचनाओं के बीच भाजपा नेता एन. बीरेन सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद से राज्य में फरवरी से राष्ट्रपति शासन लागू है।
भाषा मनीषा