मध्यप्रदेश में होती घटना, तो सभी आरोपी कभी के छूट जाते: पुणे पोर्श मामले की पीड़िता के पिता
राजकुमार
- 03 Feb 2026, 09:50 PM
- Updated: 09:50 PM
जबलपुर (मध्यप्रदेश), तीन फरवरी (भाषा) पुणे के बहुचर्चित 'पोर्श हिट-एंड-रन' मामले में खून के सैंपल से छेड़छाड़ में मदद करने के तीन आरोपियों को उच्चतम न्यायालय से जमानत मिलने पर इस दुर्घटना में मारी गई इंजीनियर के पिता ने निराशा जताई लेकिन यह भी कहा कि यदि यह घटना मध्यप्रदेश में हुई होती तो आरोपी कभी के छूट गए होते।
पुणे के कल्याणी नगर में 19 मई 2024 को हुए इस हादसे में 24 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर अनीश अवधिया और अश्विनी कोष्टा की मौत हो गई थी। अनीश उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली के रहने वाले थे जबकि अश्विनी कोष्टा जबलपुर की रहने वाली थी।
अश्विनी कोष्टा के पिता सुरेश कुमार कोष्टा ने 'पीटीआई-भाषा' से बातचीत में उम्मीद जताई कि उन्हें न्याय जरूर मिलेगा क्योंकि पुणे पुलिस आयुक्त ने आरोपियों को उनके अंजाम तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है।
उन्होंने कहा, ''मध्यप्रदेश में यह प्रकरण होता तो आरोपी कभी के छूट जाते।''
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को दुर्घटना के बाद खून के सैंपल से छेड़छाड़ में मदद करने के आरोपी आदित्य सूद, आशीष मित्तल और संतोष गायकवाड़ को यह कहते हुए जमानत दे दी कि वे 18 महीने से जेल में हैं।
मित्तल मुख्य आरोपी के पिता का दोस्त है, जबकि सूद उस लड़के का पिता है जो कार में सवार था। गायकवाड़ एक बिचौलिया है जिसने खून की रिपोर्ट में हेरफेर करने के लिए तीन लाख रुपये की रकम ली थी।
बंबई उच्च न्यायालय ने पिछले साल दिसंबर में उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था।
युवा महिला इंजीनियर अश्विनी कोष्टा के पिता ने कहा कि जिन आरोपियों को जमानत का लाभ मिला उनके कार्य को भी देखा जाना चाहिए था।
उन्होंने कहा,''पहले, साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर कानून के साथ छेड़छाड़ की गई थी। उच्च न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। जमानत का लाभ मिलने से निश्चित तौर पर आरोपी बचाव का प्रयास करेंगे और खुद को बचाने के लिए व्यक्ति किसी भी हद तक जा सकता है।''
सुरेश कुमार कोष्टा ने कहा कि देश में बीमारियों से अधिक सड़क दुर्घटनाओं में मौत होती है, इसलिए मोटर वाहन अधिनियम में बदलाव करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा,''शराब पीकर गाड़ी चलाने वाले लोग दुर्घटना में शामिल होते हैं। इसलिए ऐसे प्रकरणों में किसी व्यक्ति की जान जाती है तो आरोपी के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए।''
उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने स्वयं कहा है कि सड़क दुर्घटनाओं को लेकर भारत का रिकॉर्ड इतना गंदा है कि उन्हें विश्व सम्मेलनों में मुंह छिपाना पड़ता है।
पुणे के इस बहुचर्चित सड़क दुघर्टना में मारे गए मध्यप्रदेश के ही उमरिया के अनीश अवधिया के परिजनों ने भी उच्चतम न्यायालय के सोमवार के फैसले पर निराशा जताई थी और शीर्ष अदालत से तीनों आरोपियों की जमानत रद्द करने का अनुरोध किया था।
अनीश के दादा आत्माराम अवधिया ने सोमवार को 'पीटीआई-वीडियो' से कहा था कि ऐसे मामलों में आरोपियों को जमानत नहीं दी जानी चाहिए थी।
उन्होंने कहा था कि इस मामले में मुख्य आरोपी पूंजीपति परिवार से है, इसलिए उसे बचाने के लिए शुरू से ही फर्जीवाड़े का सहारा लिया गया।
उन्होंने दावा किया था कि खून बदलकर और षड्यंत्रपूर्वक इस पूरे मामले को 'दबाने' की कोशिश की गई।
अदालत के फैसले पर अफसोस जताते हुए आत्माराम ने कहा था,''इतना बड़ा कांड था और अब जमानत दे दी गई।''
अनीश के पिता ओमप्रकाश अवधिया ने 'पीटीआई -वीडियो' से कहा था कि जिन तीन आरोपियों को जमानत दी गई है, उन्होंने मुख्य आरोपी को बचाने के लिए खून के सैंपल में हेराफेरी की थी।
उन्होंने कहा था,''हम चाहते हैं कि जमानत को रद्द किया जाए ताकि हमें न्याय मिल सके।''
मामले की जांच में सामने आया था कि हादसे के समय कार चला रहा युवक नाबालिग था। आरोप है कि उसे बचाने के लिए उसके खून के सैंपल में हेरफेर की गई, ताकि शराब सेवन की पुष्टि न हो सके। इस मामले में कुछ डॉक्टरों की कथित भूमिका और रिश्वत के आरोप भी सामने आए थे।
भाषा सं ब्रजेन्द्र राजकुमार
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