प्रधानमंत्री मोदी और शाह के दौरों से महाराष्ट्र को कुछ नहीं मिला : कांग्रेस नेता पटोले
संतोष शफीक
- 29 Oct 2025, 10:14 PM
- Updated: 10:14 PM
मुंबई, 29 अक्टूबर (भाषा) कांग्रेस नेता नाना पटोले ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मुंबई दौरे से महाराष्ट्र को कुछ नहीं मिलता।
‘पीटीआई वीडियो’ से बात करते हुए पटोले ने आरोप लगाया कि ‘‘चुनावों से पहले महाराष्ट्र के धन को अवैध या अनियमित तरीके से बिहार भेजा जा रहा है।’’
शिवसेना (उबाठा) प्रमुख और कांग्रेस के सहयोगी उद्धव ठाकरे द्वारा शाह को ‘एनाकोंडा’ कहे जाने पर टिप्पणी करते हुए पटोले ने कहा कि वह किसी भी व्यक्ति के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने से बचते हैं, क्योंकि यह ‘‘हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है।’’
प्रधानमंत्री मोदी बुधवार को यहां आयोजित भारत समुद्री सप्ताह-2025 से संबंधित कार्यक्रमों में शामिल हुए, जबकि शाह इस सप्ताह की शुरुआत में मुंबई पहुंचे थे।
पटोले ने कहा, ‘‘जब भी वे मुंबई आते हैं, तो यातायात में भारी व्यवधान पैदा होता है, फिर भी महाराष्ट्र को बदले में कुछ नहीं मिलता।’’
उन्होंने कहा, ‘‘किसान परेशान हैं, आत्महत्याएं बढ़ रही हैं और यहां तक कि गृह मंत्री द्वारा वादा किया गया दिवाली राहत कोष भी उन तक नहीं पहुंचा है।’’
उन्होंने भाजपा पर चुनावों को प्रभावित करने के लिए लोगों को धार्मिक आधार पर बांटने का भी आरोप लगाया और इसे ‘एक हताश करने वाला प्रयास बताया जो सफल नहीं होगा’।
इससे पहले कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने दावा किया था कि मोदी के दौरे के दौरान जोगेश्वरी में झुग्गियों को छिपाने के लिए पर्दे लगाए जा रहे हैं और भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर मुंबई के गरीबों को लेकर शर्मिंदा होने का आरोप लगाया था।
सावंत ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘वे झुग्गियों में रहने वाले मुंबईवासियों से इतने शर्मिंदा हैं कि उन्होंने उन्हें छिपाने के लिए पर्दे लगा दिए हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आप गरीबी, गंदगी, कचरा, दुख और लोगों की पीड़ा को तो छिपा सकते हैं - लेकिन आप गरीबों के प्रति भाजपा की नफरत और उसकी अमानवीय, करुणाहीन मानसिकता को कैसे छिपाएंगे?’’
उन्होंने कहा कि सरकार ने झुग्गी-झोपड़ियों को ढककर ‘गरीबी छुपाओ अभियान’ शुरू किया है। उन्होंने अहमदाबाद में ‘नमस्ते ट्रंप’ और मुंबई में आयोजित जी 20 शिखर सम्मेलन जैसे पहले के कार्यक्रमों के दौरान कथित तौर पर उठाए गए इसी तरह के कदमों से इसकी तुलना की।
भाषा संतोष