हम सिर्फ पंचायत व निकाय चुनाव आयोजित करते हैं: उप्र निर्वाचन आयोग ने अखिलेश से कहा
जफर खारी
- 05 Sep 2025, 11:17 PM
- Updated: 11:17 PM
लखनऊ, पांच सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतदाता सूचियों की त्रुटियों में सुधार के लिए कृत्रिम मेधा (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-एआई) के इस्तेमाल पर शुक्रवार को स्पष्टीकरण जारी किया और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा 18,000 हलफनामों के संबंध में लगाए गए आरोपों का जवाब दिया।
यादव ने शुक्रवार को निर्वाचन आयोग पर कटाक्ष करते हुए उसे ‘‘जुगाड़ आयोग’’ करार दिया और कुंदरकी विधानसभा उपचुनाव के नतीजे को लेकर सवाल खड़े किए।
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने सवाल उठाया था कि उनकी पार्टी द्वारा जमा किए गए 18,000 हलफनामों में से केवल 14 पर ही कार्रवाई क्यों की गई? यादव की पोस्ट में लिखा था, ‘‘जब ‘जुगाड़ आयोग’ एएआई से सवा करोड़ का अपना घपला पकड़ सकता है तो फिर हमारे द्वारा दिये गये 18000 में से केवल 14 हलफनामे का जवाब देने के बाद बचे 17986 हलफनामे का क्यों नहीं?’’
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आयोग ने ‘एक्स’ पर अपने आधिकारिक खाते से पोस्ट कर कहा, ‘‘ एआई अर्थात कृत्रिम मेधा के माध्यम से मतदाता सूचियों में विद्यमान् त्रुटियों को ढूंढकर उनका सुधार किये जाने का समाचार राज्य निर्वाचन आयोग उत्तर प्रदेश के हवाले से विगत दिनों में उत्तर प्रदेश के समाचार पत्रों में छपा था।’’
पोस्ट में कहा गया, ‘‘राज्य निर्वाचन आयोग उत्तर प्रदेश में स्थित पंचायतीराज संस्थाओं एवं नगरीय निकायों के निर्वाचनों से संबंधित मतदाता सूचियों को बनाने एवं इन संस्थाओं व निकायों के चुनाव करवाने का कार्य करता है। इससे भिन्न भारत निर्वाचन आयोग लोकसभा, विधानसभा एवं विधान परिषद के चुनावों से संबंधित मतदाता सूचियों को बनाने एवं उनके रखरखाव का कार्य करता है और इन सदनों के चुनाव करवाता है।’’
इसमें कहा गया, ‘‘प्रायः आम जनता में एवं मीडिया में भी इस बात की स्पष्टता नहीं रहती है तथा लोग इन दोनों आयोगों के कार्य में अंतर नहीं जानते हैं। यहां तक कि सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों में भी बहुधा इस भिन्नता की जानकारी नहीं है। इस अवसर का सदुपयोग कर इस भिन्नता को रेखांकित किया जाता है। एआई का प्रयोग कर मतदाता सूची को शुद्ध किए जाने का समाचार भारत निर्वाचन आयोग से संबंधित नहीं है।’’
पोस्ट में कहा गया, ‘‘18 हजार शपथ पत्रों के संबंध में अवगत कराना है कि यह मामला भारत निर्वाचन आयोग से एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तर प्रदेश से संबंधित है।’’
इसके अनुसार, ‘‘जिला निर्वाचन अधिकारियों से जानकारी करने पर यह पता चला है कि चार सितंबर 2025 तक वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम गलत ढंग से काटने की शिकायत से संबंधित तथाकथित 18 हजार शपथ पत्रों में से एक शपथपत्र भी मूल रूप में संबंधित 33 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों और संबंधित 74 विधानसभा क्षेत्रों के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को प्राप्त नहीं हुआ है।’’
पोस्ट में कहा गया, ‘‘मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तर प्रदेश के कार्यालय में भी चार सितंबर 2025 तक इस संबंध में कोई शपथपत्र मूलरूप में प्राप्त नहीं हुआ है। इस शिकायत से संबंधित मूल शपथ पत्र प्राप्त होते ही तत्परता से जांच पूर्ण कर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी और सर्वसाधारण को अवगत कराया जाएगा।’’
भाषा जफर