प्रत्येक बच्चे को मां और बाप दोनों के प्यार का अधिकार : न्यायालय
धीरज माधव
- 02 Sep 2025, 10:22 PM
- Updated: 10:22 PM
नयी दिल्ली, दो सितंबर (भाषा)उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए टिप्पणी की कि प्रत्येक बच्चे को माता-पिता दोनों का स्नेह पाने का अधिकार है और भले ही वे अलग या दो देशों में रहते हों, बच्चे के लिए उनके साथ संबंध बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया जिसमें उसने अपने नौ वर्षीय बेटे के साथ वीडियो चैट पर बातचीत करने की अनुमति देने का अनुरोध किया था। याचिकाकर्ता का बेटा अपनी मां के साथ आयरलैंड में रह रहा है।
याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि संपर्क से इनकार करने से बच्चा पिता के प्यार, मार्गदर्शन और भावनात्मक समर्थन से वंचित हो जाएगा।
शीर्ष अदालत ने कहा कि बच्चा फिलहाल आयरलैंड में अपनी मां के साथ रह रहा है और लगता है कि वहीं बस गया है।
न्यायालय ने मामले में माता-पिता दोनों का आचरण आदर्श नहीं होने को रेखांकित करते हुए कहा कि उनके व्यक्तिगत मतभेद एक लंबे और तीखे संघर्ष में बदल गए हैं, लेकिन अदालत बच्चे को इस संघर्ष का शिकार नहीं बनने दे सकती।
पीठ ने कहा कि इस स्तर पर उस व्यवस्था को बाधित करना उनके हित में नहीं होगा।
न्यायालय ने कहा, ‘‘पिता ने हमारे सामने अपना अनुरोध भी सीमित रखा है क्योंकि वह संरक्षण की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि केवल वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से अपने बेटे के साथ नियमित रूप से बातचीत करने का मौका मांग रहे हैं। हम इस अनुरोध को उचित और आवश्यक, दोनों पाते हैं।’’
पीठ ने कहा, ‘‘हर बच्चे को माता-पिता दोनों का स्नेह पाने का अधिकार है। भले ही माता-पिता अलग-अलग रहते हों या दो देशों में रहते हों, बच्चे के लिए दोनों के साथ संबंध बनाए रखना ज़रूरी है। ऐसे संपर्क से इनकार करने से बच्चा पिता के प्यार, मार्गदर्शन और भावनात्मक समर्थन से वंचित हो जाएगा।’’
पीठ ने कहा, ‘‘इसलिए हमारा मानना है कि अपीलकर्ता का वीडियो बातचीत का अनुरोध उचित है। यह बच्चे की वर्तमान जीवन स्थिति की वास्तविकता को इस आवश्यकता के साथ संतुलित करता है कि पिता बच्चे के जीवन का हिस्सा बना रहे।’’
शीर्ष अदालत ने कई निर्देश जारी करते हुए कहा कि व्यक्ति को प्रत्येक दूसरे रविवार को पूर्वाह्न 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक (आयरलैंड समयानुसार) दो घंटे के लिए वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से अपने बेटे से बातचीत करने का अधिकार होगा।
पीठ ने फैसले में कहा, ‘‘दोनों पक्षों को यह सुनिश्चित करने के लिए सहयोग करना होगा कि बातचीत सुचारू रूप से, सद्भावनापूर्वक, बिना किसी बाधा या द्वेष के संपन्न हो।’’
इसमें कहा गया, ‘‘वीडियो कांफ्रेंस सत्र की व्यवस्था करने में आने वाली किसी भी तकनीकी या तार्किक कठिनाई को आपसी सहमति से हल किया जाएगा, यह ध्यान में रखते हुए कि बच्चे का हित सर्वोपरि है।’’
भाषा धीरज