उत्तराखंड में ‘ऑपरेशन कालनेमि’ के तहत अब तक 300 से अधिक ढोंगी बाबा गिरफ्तार
दीप्ति संतोष
- 25 Aug 2025, 07:38 PM
- Updated: 07:38 PM
देहरादून, 25 अगस्त (भाषा) साधु-संतों का वेश धारण करके सनातन धर्म की आड़ में लोगों को ठग रहे बहरूपियों के खिलाफ उत्तराखंड में चलाए जा रहे 'ऑपरेशन कालनेमि' के तहत अब तक प्रदेश भर में एक बांग्लादेशी नागरिक समेत 300 से अधिक ढोंगी बाबाओं को गिरफ्तार किया जा चुका है।
उत्तराखंड के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर यह ऑपरेशन पिछले माह शुरू किया गया था।
अधिकारियों ने यहां बताया कि इसके तहत, प्रदेश में अपनी पहचान छिपाकर सनातन संस्कृति की आड़ में कथित रूप से ठगी और धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने वाले 4000 से अधिक लोगों का अब तक सत्यापन किया गया है जिनमें से 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
उन्होंने बताया कि इस अभियान का असर सबसे अधिक उन जिलों में देखा जा रहा है, जहां बाहरी तत्वों की अधिक सक्रियता की सूचना मिली थी।
हरिद्वार जिले में 2301 लोगों का सत्यापन करके 162 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसी तरह देहरादून में 865 लोगों का सत्यापन और 113 व्यक्तियों की गिरफ्तारी की गई है, जबकि उधम सिंह नगर में गिरफ्तारी का आंकड़ा 17 है।
इसके अलावा प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी यह अभियान लगातार जारी है ।
देहरादून में इस अभियान के तहत सहसपुर में रह रहे एक बांग्लादेशी नागरिक रूकन रकम उर्फ शाह आलम को भी गिरफ्तार किया गया जो यहां पर अपनी पहचान छिपाकर बाबा बनकर रह रहा था।
‘कालनेमि’ एक असुर था जिसका दोनों प्रमुख हिंदू धर्मग्रंथों (रामायण और महाभारत) में उल्लेख है। रावण के मामा मारीच के पुत्र कालनेमि ने साधु का वेश धारण करके लक्ष्मण की मूर्छा को तोड़ने के लिए संजीवनी बूटी ला रहे हनुमान का रास्ता रोकने का प्रयास किया था।
हालांकि, हनुमान उसकी असलियत समझ गए और उन्होंने उसका वध कर दिया था।
महाभारत काल में कालनेमि का पुनर्जन्म कंस के रूप में हुआ जिसका संहार भगवान कृष्ण ने किया।
इस ऑपरेशन की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि जिस प्रकार असुर कालनेमि ने साधु का वेश धारण करके भ्रमित करने का प्रयास किया था, वैसे ही आज समाज में कई 'कालनेमि' सक्रिय हैं जो साधु-संत का वेश धारण करके अपराध कर रहे हैं।
धामी ने कहा था कि देवभूमि में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि, पहचान छिपाकर ठगी या धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
भाषा दीप्ति