हमारे जवानों ने आतंकवादियों को उनका धर्म देखकर नहीं, उनका कर्म देखकर मारा: राजनाथ सिंह
पृथ्वी संतोष
- 25 Aug 2025, 07:01 PM
- Updated: 07:01 PM
जोधपुर, 25 अगस्त (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए सोमवार को कहा कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कायराना हमलों का 'मुंहतोड़' जवाब दिया और निर्धारित लक्ष्यों पर सटीक हमले किए।
जोधपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘हमारे युवाओं की ऊर्जा और संकल्प ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी हमने देखा है।... हमारी सेनाओं ने पाकिस्तान के कायराना हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया है।’’
सिंह ने कहा कि भारत ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’ के सिद्धांत में विश्वास करता है और जाति, पंथ या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करता, लेकिन आतंकवादियों ने लोगों को उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाया।
उन्होंने कहा, ‘‘हम पूरे विश्व को ही अपना परिवार मानते हैं। जाति, धर्म, पंथ के नाम पर हम भेदभाव करने वाले नहीं हैं। लेकिन आतंकवादियों ने पहलगाम में धर्म पूछकर लोगों को मारा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हमारी सेना के जवानों ने आतंकवादियों को शह देने वालों और आतंकवादी घटनाओं में संलिप्त लोगों को मारा।...उनका धर्म देखकर नहीं मारा बल्कि उनका कर्म देखकर मारा है।’’
उन्होंने कहा कि पहलगाम घटना के बाद उन्होंने तीनों सेना प्रमुखों को बुलाया और पूछा कि क्या वे ऑपरेशन के लिए तैयार हैं? उन्होंने कहा, "हमारे तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने एक स्वर में कहा, 'हम किसी भी प्रकार के ऑपरेशन के लिए तैयार हैं।' यह भारत है।’’ उन्होंने कहा कि इसके बाद प्रधानमंत्री ने आवश्यक निर्देश दिए।
उन्होंने कहा, ‘‘इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी विशेषता थी कि आक्रमण के लिए जो लक्ष्य तय किया था... ठीक उसी लक्ष्य पर हमारी सेना ने सटीक हमला किया। मैं तो यहां तक कहना चाहूंगा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारी सेनाओं को सभी सीमावर्ती क्षेत्रों से पूरा समर्थन मिला।’’
भारतीय सशस्त्र बलों ने मई में ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी समूहों से जुड़े कई ठिकानों पर सटीक हमले किए। इस अभियान का उद्देश्य 22 अप्रैल के पहलगाम हमले के बाद आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना और प्रमुख आतंकवादियों को नेस्तनाबूद करना था।
शिक्षा क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों की सराहना करते हुए सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। उन्होंने कहा, "हमारे समय की शिक्षा और आज की शिक्षा में काफी अंतर है। मैं भी एक गांव के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में पढ़ा हूं। जब मैं प्रधानाचार्य की मेज पर रखे ग्लोब को देखता था, तो मुझे ऐसा लगता था जैसे कोई जादुई गेंद हो।"
उन्होंने इन बदलावों का श्रेय दशकों की कड़ी मेहनत को देते हुए कहा, "हाल के वर्षों में शिक्षा में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। आज, हमारे बच्चे इंटरनेट पर हर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इतना बड़ा परिवर्तन हुआ है।"
रक्षा मंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताते हुए कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए मजबूत इरादों और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया है।’’
उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार कोई आसान काम नहीं था। कई आयोग बने और सिफारिशें दीं, लेकिन जिस तरह के सुधार की अपेक्षा थी, वह नहीं हुए।"
उन्होंने कहा कि आज के बच्चे मोबाइल पर एक ऐप से पूरी दुनिया की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। हमारे जमाने में तो विज्ञान का मतलब सिर्फ ब्लैकबोर्ड होता था।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में पहले की तुलना में यह जो फर्क आया है यही भारत की ताकत है और यही असली बदलाव है। यही भारत का भविष्य है। मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि यह सब हमारे देश को और ऊंचाइयों तक ले जाएगा।
भारत के इतिहास की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जब दुनिया के दूसरे हिस्सों में लोग गुफाओं में रहते थे तब हमारे भारत में भरत मुनि नाट्य शास्त्र लिख रहे थे।
उन्होंने कहा,‘‘जब दुनिया में लोग बीमारी का कारण नहीं समझ पाते थे, उस समय भारत में आचार्य चरक व आचार्य सुश्रुत जैसे चिकित्सक पैदा हुए।’’
उन्होंने कहा, "हल्दी, नीम और अश्वगंधा जैसे औषधीय पौधों का ज्ञान पहले से ही था, जिसे आज वैज्ञानिक भी स्वीकार करते हैं।"
सिंह ने बच्चों के आध्यात्मिक विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा,‘‘मैं बार बार इस बात पर बल देता हूं कि बच्चों का केवल भौतिक विकास ही नहीं होना चाहिए, आध्यात्मिक विकास भी होना चाहिए।’’
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के एक कथन को दोहराते हुए उन्होंने कहा,‘‘छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता। टूटे मन से कोई खड़ा नहीं उठता।’’ उन्होंने कहा कि व्यक्ति का मन बड़ा होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमारे देश के ऋषियों व मनीषियों का मन बड़ा था और उन्होंने केवल अपने परिवार को ही अपना परिवार नहीं माना, बल्कि पूरे विश्व की धरा पर रहने वाले लोगों को अपने परिवार का सदस्य मानते हुए कहा,‘‘वसुधैव कुटुंबकम।... इतना बड़ा मन होना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि जितना ही आपका मन बड़ा होगा उसी अनुपात में आपको सुख और आनंद की अनुभूति होती चली जाएगी। उन्होंने कहा कि मन जितना बड़ा होता जाएगा, तो जीवन में आपको परमानंद की भी प्राप्ति होगी, ईश्वर की भी प्राप्ति होगी।
कार्यक्रम के दौरान, उन्होंने जोधपुर में एक खेल अकादमी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और अन्य नेता भी उपस्थित थे।
भाषा पृथ्वी