मप्र के महू स्थित सेना युद्ध महाविद्यालय में तीनों सेनाओं का मंगलवार को शुरू होगा ‘रणसंवाद’
धीरज माधव
- 25 Aug 2025, 06:59 PM
- Updated: 06:59 PM
नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा)सैन्य अधिकारियों के लिए युद्ध और युद्धकला पर अपनी तरह की पहली त्रि-सेवा संगोष्ठी मंगलवार को मध्यप्रदेश के महू में ‘रणसंवाद-2025’नाम से शुरू होगी जिसमें अधिकारी आधुनिक युद्धक्षेत्रों से प्रत्यक्ष परिचालन अंतर्दृष्टि और विचार साझा करेंगे।
रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि ‘रण संवाद’के नाम से आयोजित की जा रही दो दिवसीय संगोष्ठी को पहले दिन प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस)जनरल अनिल चौहान संबोधित करेंगे जबकि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दूसरे व अंतिम दिन संगोष्ठी में समापन भाषण देंगे।
मध्य प्रदेश के डॉ. अंबेडकर नगर (महू) स्थित सैन्य महाविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी में सेवारत सैन्य पेशेवर प्रमुखता से रणनीति पर चर्चा करेंगे।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ‘‘सार्थक वार्ता के माध्यम से, यह सूचना युद्ध और ग्रे जोन खतरों से लेकर एकीकृत संचालन और भविष्य की लड़ाकू प्रौद्योगिकियों तक के विषयों का पता लगाएगा।"
‘ ग्रे जोन खतरे’ का अभिप्राय राज्य या गैर-राज्य ताकतों द्वारा संचालित गतिविधियों से हैं जो युद्ध और शांति के बीच के अंतर को धुंधला कर देती हैं तथा पारंपरिक शस्त्र संघर्ष के विपरीत राजनीतिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सैन्य और गैर-सैन्य रणनीति के संयोजन का उपयोग करती हैं।
मंत्रालय के मुताबिक संगोष्ठी के दौरान कुछ संयुक्त सिद्धांत और ‘‘प्रौद्योगिकी परिप्रेक्ष्य और क्षमता खाका (टीपीसीआर)’’ भी जारी किए जाएंगे।
इसमें कहा गया है, ‘‘इस संगोष्ठी के भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं को सुदृढ़ करते हुए वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में विकसित होने की उम्मीद की जाती है। यह रणनीतिक स्वायत्तता, अंतर-सेवा तालमेल और विश्वसनीय सैन्य संवाद की आवश्यकता की बढ़ती मान्यता को दर्शाता है, जो न केवल भारतीय वास्तविकताओं के बारे में, बल्कि व्यापक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा परिवेश के बारे में भी बात करता है।’’
रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस कार्यक्रम के प्रत्येक सत्र का नेतृत्व ‘‘सेवारत अधिकारी करेंगे, जो आधुनिक युद्धक्षेत्रों से अपने प्रत्यक्ष परिचालन अनुभव और विचार साझा करेंगे।’’
पहला ‘रणसंवाद’ भारतीय थल सेना द्वारा आयोजित किया जा रहा है। क्रमवार अन्य सेवाएं इस संगोष्ठी की मेजबानी करेंगी और आगामी वर्षों में नौसेना और वायुसेना आयोजन की जिम्मेदारी निभाएंगी।
भाषा धीरज