तमिलनाडु: व्यापक विरोध के बाद हाइड्रोकार्बन अन्वेषण के लिए दी गयी मंजूरी वापस लेने का निर्देश
नोमान नरेश
- 25 Aug 2025, 08:25 PM
- Updated: 08:25 PM
चेन्नई, 25 अगस्त (भाषा) तमिलनाडु सरकार ने मछुआरों और राजनीतिक दलों के व्यापक विरोध के मद्देनजर राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (टीएनएसईआईएए) को रामनाथपुरम जिले में हाइड्रोकार्बन अन्वेषण के लिए तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) लिमिटेड को दी गई मंजूरी वापस लेने का निर्देश दिया है।
तमिलनाडु एसईआईएए ने ओएनजीसी को रामनाथपुरम जिले में 20 कुओं में हाइड्रोकार्बन अन्वेषण ड्रिलिंग करने की मंजूरी दे दी है, जबकि वित्त मंत्री थंगम थेन्नारसु ने कहा है कि सरकार राज्य में ऐसी परियोजनाओं को कभी भी अनुमति नहीं देगी।
पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन तथा वन विभाग संभालने वाले थेन्नारुसु ने एक बयान में कहा, "मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की दृढ़ नीति तमिलनाडु में कहीं भी हाइड्रोकार्बन से संबंधित किसी भी परियोजना की अनुमति नहीं देने की है। इसलिए, राज्य सरकार भविष्य में भी राज्य में किसी भी हाइड्रोकार्बन परियोजना की अनुमति नहीं देगी।"
मंत्री ने रविवार को कहा कि यह द्रमुक सरकार द्वारा बनाया गया संरक्षित कृषि क्षेत्र (पीएजेड) अधिनियम तंजावुर, तिरुवरुर, नागपट्टिनम, पुदुकोट्टई और कुड्डालोर के डेल्टा जिलों में प्राकृतिक गैस, कोयला आधारित मीथेन और शेल गैस के अलावा हाइड्रोकार्बन की खोज पर प्रतिबंध लगाता है।
मंत्री ने कहा, "बाद में 2023 में इस प्रतिबंध को मयिलादुथुराई जिले तक बढ़ा दिया गया।"
पर्यावरणविद् एवं ‘नीथल मक्कल काची के अध्यक्ष कु. भारती’ के अनुसार, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस वर्ष फरवरी में विभिन्न ब्लॉक की नीलामी के बाद तमिलनाडु और पुडुचेरी के भूभाग में 30,000 वर्ग किलोमीटर उथले समुद्री क्षेत्रों और उसके निकट 95,000 वर्ग किलोमीटर गहरे समुद्री क्षेत्रों में हाइड्रोकार्बन भंडार की पहचान की थी।
उन्होंने कहा, "इस परियोजना से 14 तटीय जिलों में मछली पकड़ने वाले 608 गांवों के लोगों की आजीविका प्रभावित होगी।"
भारती ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मत्स्य संसाधन के घटते संकट का सामना कर रहे मछुआरों के पास पहले से ही गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। मत्स्य क्षेत्र और तटीय पर्यावरण के हित में इस हाइड्रोकार्बन परियोजना को रद्द कर दिया जाना चाहिए।’’
तटीय जिलों के मछुआरे इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं और केंद्र से इसे रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
इस परियोजना का विरोध करते हुए, सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की सहयोगी मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एमडीएमके) ने राज्य सरकार से परियोजना के लिए दी गई पर्यावरणीय मंजूरी रद्द करने की मांग की थी। एमडीएमके प्रमुख वाइको ने कहा, ‘‘यह मछुआरों की आजीविका और पर्यावरण के लिए खतरा है।’’
भाषा नोमान